Gold Price Fall: जंग के बीच क्यों गिर रहे सोने के दाम? एक्सपर्ट से जानें अब आगे क्या होगा?

Published : Mar 25, 2026, 09:43 AM IST

आमतौर पर युद्ध जैसे संकट के समय सोने की कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन इतिहास में पहली बार ईरान संघर्ष के दौरान सोने के दाम में बड़ी गिरावट आई है। आखिर इसकी वजह क्या है, जानिए इस डिटेल स्टोरी में।

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जंग के बावजूद सोने के दाम क्यों गिरे?

आमतौर पर जंग जैसे संकट में शेयर बाजार गिरता है और सोने की कीमतें चढ़ती हैं। लेकिन इस बार सोना भी गिर गया है! दुनिया में कहीं भी संघर्ष छिड़ने पर इसका असर सोने-चांदी पर पड़ता है। माना जाता है कि युद्ध का मतलब सोने-चांदी के दाम बढ़ना है। लेकिन इतिहास में पहली बार सोने-चांदी ने इसे गलत साबित कर दिया है। निवेशकों के लिए 'सेफ हेवन' कहे जाने वाले सोने में गिरावट की वजह क्या है? यहां जानिए पूरी जानकारी।

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युद्ध में पहली बार आई इतनी बड़ी गिरावट
ईरान युद्ध को 4 हफ्ते हो गए हैं। सबको लगा था कि सोना-चांदी आसमान छू लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इतिहास में यह पहली बार है जब युद्ध के दौरान कीमतें गिरी हैं। ईरान संघर्ष के चलते अब तक सोने की कीमत में 18% की गिरावट आई है। युद्ध शुरू होने के दिन यानी 28 फरवरी को सोना-चांदी उस महीने के उच्चतम स्तर पर थे। 24 कैरेट 1 ग्राम सोने का भाव 16,871 रुपये और 22 कैरेट का 15,465 रुपये था। लेकिन 25 दिनों में प्रति ग्राम करीब 2500-3000 रुपये की गिरावट आई है। 24 कैरेट सोना 14,291 रुपये पर और 22 कैरेट सोना 13,100 रुपये पर आ गया है। वहीं, इस साल 3 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास चल रही चांदी भी 60,000 रुपये गिरकर 2.35 लाख रुपये पर पहुंच गई है। इनमें भी उतार-चढ़ाव जारी है।
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4 दशकों में सोने की सबसे बड़ी गिरावट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1983 के बाद यानी पिछले 43 सालों में यह पहली बार है जब एक हफ्ते में सोने की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आई है। सिर्फ 7 दिनों में इसमें 11% की गिरावट देखी गई है। इससे पहले 1979-1980 के बीच ईरानी क्रांति के समय तेल सप्लाई में रुकावट और शीत युद्ध के कारण सोने की कीमतों में 15-20% की गिरावट आई थी। उसके बाद कभी भी एक हफ्ते में 10% से ज्यादा की गिरावट का कोई उदाहरण नहीं है। पिछले युद्धों में सोने के दाम कैसे थे? पहला विश्व युद्ध: इस दौरान सोने की कीमत सिर्फ 20.67 अमेरिकी डॉलर थी। दूसरा विश्व युद्ध: 1934 में यह 35 डॉलर प्रति औंस थी। तब नागरिकों के सोना खरीदने पर सीमा तय थी। वियतनाम युद्ध: युद्ध के डर से सोने की मांग बढ़ी। नतीजतन, 1968 तक यह बढ़कर 40.20 डॉलर हो गया था। युद्ध खत्म होने तक इसमें करीब 5 गुना की बढ़ोतरी हुई।
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खाड़ी युद्ध के दौरान सोने का भाव क्या था?

खरीदारों की संख्या बढ़ने से इस दौरान सोने की कीमत में भारी तेजी आई। जुलाई 1990 में जो कीमत 384 डॉलर प्रति औंस थी, वह एक महीने में बढ़कर 403 डॉलर हो गई। रूस-यूक्रेन युद्ध: 24 फरवरी 2022 को युद्ध शुरू होने के दिन 24 कैरेट सोने का भाव 5100-5150 रुपये (प्रति ग्राम) के आसपास था। 10 दिनों में यह 5250-5300 रुपये हो गया। कुल मिलाकर इसमें करीब 15% की बढ़ोतरी देखी गई। इजरायल-हमास युद्ध: अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इजरायल-हमास युद्ध के दौरान सोने की कीमत में 10% की बढ़ोतरी हुई थी। 10 ग्राम शुद्ध सोने की कीमत जो 58,000 रुपये के आसपास थी, वह 75,000 रुपये का आंकड़ा पार कर गई थी।

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संघर्ष के बीच भी कीमत गिरने की वजह क्या?

1. डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना मध्य पूर्व संकट के कारण डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरकर 94 के करीब आ गई है। इसे भी कीमतों में गिरावट का एक कारण माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। इसलिए युद्ध के समय निवेशक सोने से ज्यादा डॉलर को सुरक्षित मान रहे हैं। दुनिया भर के बड़े बैंक और निवेश कंपनियां डॉलर में निवेश कर रही हैं, जिसका असर सोने पर पड़ रहा है। 

2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल को पार करने से महंगाई बढ़ी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें घटाने से इनकार कर दिया है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने के बजाय ब्याज देने वाले सरकारी बॉन्ड्स की ओर आकर्षित होते हैं। अमेरिका के सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करना सोने जितना ही सुरक्षित माना जाता है। नतीजतन, निवेशक 0% ब्याज वाले सोने को बेचकर उस पैसे को अमेरिकी बॉन्ड्स में लगाकर मुनाफा कमा रहे हैं।

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बाजार में अस्थिरता और प्रॉफिट बुकिंग
जब बाजार में अस्थिरता होती है, तो निवेशक मुनाफा कमाने या घाटे की भरपाई के लिए सोना बेचकर कैश निकालते हैं। इससे बाजार में सोने की सप्लाई बढ़ जाती है और कीमतें गिरने लगती हैं। युद्ध के शुरुआती दिनों में कीमतें आसमान पर थीं। उस वक्त निवेशकों ने जमकर खरीदारी की थी। जब कीमतें अपने चरम पर पहुंच गईं, तो उन्होंने मुनाफा कमाने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया। प्रॉफिट बुकिंग भी गिरावट का कारण पिछले एक साल में सोने और चांदी ने शानदार रिटर्न दिया था। जब कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, तो निवेशकों ने मुनाफावसूली के लिए बिकवाली शुरू कर दी, जिससे कीमतों में गिरावट आई।
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विदेशों में भी सोने के दाम गिरे

विदेशों में भी सोने-चांदी के दाम गिरे हैं। यूरोप में हाल के दिनों में सोने की कीमतों में 10 से 15 फीसदी की गिरावट आई है। ब्रिटेन, चीन, जापान और दुबई में भी कमोबेश यही स्थिति है। सोने को निवेशकों का 'सेफ हेवन' कहा जाता है, लेकिन अब कीमतों में गिरावट ने उन्हें चिंतित कर दिया है। भविष्य में क्या होगा? इस साल की शुरुआत में कीमतों में 25-30% की बढ़ोतरी हुई थी। 1 जनवरी 2025 को 24 कैरेट सोने का भाव 7800 रुपये प्रति ग्राम था, जो इस साल जनवरी में 13500 रुपये हो गया। यानी प्रति ग्राम 6000 रुपये की बढ़ोतरी। लेकिन अब यह गिर रहा है। अगर युद्ध तेज होता है, तो कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। लेकिन अगर डॉलर मजबूत बना रहता है और फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बदलाव करता है, तो कीमत थोड़ी और गिर सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने का भाव 10,000 रुपये प्रति ग्राम तक आ सकता है। हालांकि, कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट की संभावना बहुत कम है। एक्सपर्ट्स की राय है कि यह गिरावट स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी है। (नव्य श्री शेट्टी, बिजनेस एक्सपर्ट)

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