
नई दिल्ली. देश में बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या को देखते हुए जीवन बीमा परिषद ने सोमवार को कहा कि सभी बीमा कंपनियां कोरोना वायरस के चलते हुई मौत पर किए जाने वाले क्लेमों के निपटारे के लिए बाध्य है। चाहें वो सार्वजनिक क्षेत्र की या निजी क्षेत्र की ही बीमा कंपनी क्यों न हो। दोनों तरह की बीमाकर्ता कोरोना से मौत के बाद किए गए दावे के निपटारे के लिए प्रतिबद्ध है।
क्लैम में फोर्स मेजर का प्रावधान लागू नहीं होगा
परिषद ने कहा कि कोरोना से मौत के दावों में फोर्स मेजर का प्रावधान लागू नहीं होगा। वित्त मंत्रालय ने 19 फरवरी, 2020 को COVID-19 महामारी को ‘फोर्स मेजर’ ‘Force Majeure’ के रूप में स्वीकार करने की घोषणा की थी। वित्त मंत्रालय के अनुसार, ‘Force Majeure’ से आशय ऐसी असाधारण घटनाओं और परिस्थितियों से है, जो मानव नियंत्रण से परे हों। परिषद का यह बयान उन ग्राहकों के लिए है जिन्होंने इस संबंध में जीवन बीमा कंपनियों से सफाई मांगी थी। अब जब परिषद ने सारी चीजों को स्पष्ट कर दिया है तो सभी बीमा कंपनियों ने इस संबंध में व्यक्तिगत रूप से अपने ग्राहकों को सूचित किया है।
कठिन समय में भी अपने ग्राहकों के साथ है बीमा कंपनियां
जीवन बीमा परिषद के महासचिव एस एन भट्टाचार्य ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के वैश्विक और स्थानीय स्तर पर बढ़ते प्रकोप से प्रत्येक घर में जीवन बीमा की जरूरत को बल मिला है। साथ ही लॉकडाउन के कारण जीवन बीमा उद्योग यह सुनिश्चित करने के लिए हर उपाय कर रहा है कि पॉलिसीधारकों को कम से कम दिक्कत हो। इसके लिए उन्हें डिजिटल माध्यमों के जरिए मदद पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में जीवन बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों के साथ हैं और ग्राहकों को अफवाहों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
(प्रतीकात्मक फोटो)
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