AT1 Bond Mis-selling Scandal: 3 टॉप अधिकारियों को HDFC Bank ने नौकरी से किया OUT

Published : Mar 20, 2026, 04:50 PM IST
AT1 Bond Mis-selling Scandal: 3 टॉप अधिकारियों को HDFC Bank ने नौकरी से किया OUT

सार

HDFC बैंक ने क्रेडिट सुइस AT1 बॉन्ड घोटाले में 3 वरिष्ठ अधिकारियों को निकाला। दुबई शाखा के इन अधिकारियों पर ग्राहकों को गुमराह कर बॉन्ड बेचने का आरोप है। इसके बाद दुबई में बैंक पर नए ग्राहक जोड़ने पर रोक लग गई है।

मुंबई : देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC ने एक बड़े घोटाले के मामले में कड़ी कार्रवाई की है। बैंक ने 'क्रेडिट सुइस' (Credit Suisse) के AT1 बॉन्ड्स की बिक्री में हुई गड़बड़ी के चलते अपने तीन सीनियर अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया है। बैंक की आंतरिक जांच के बाद यह फैसला लिया गया। निकाले गए अधिकारियों में ब्रांच बैंकिंग डिविजन के ग्रुप हेड संपत कुमार, एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और NRI बिजनेस) हर्ष गुप्ता और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पायल मंध्यान शामिल हैं। दुबई ब्रांच में हुए इस इन्वेस्टमेंट फ्रॉड की जांच रिपोर्ट आने तक हर्ष गुप्ता और पायल मंध्यान को पिछले साल जनवरी में ही सस्पेंड कर दिया गया था।

बैंक सूत्रों ने क्या बताया?

नाम न बताने की शर्त पर बैंक के एक सीनियर अधिकारी ने जानकारी दी, "वहां जो कुछ भी हुआ, वह संपत कुमार की देखरेख में हुआ था। भले ही वह सीधे तौर पर धोखाधड़ी में शामिल न हों, लेकिन उनकी लापरवाही साफ दिखती है। वहीं, हर्ष और पायल इस फ्रॉड में एक्टिव रूप से शामिल थे।"

कैसे हुई धोखाधड़ी?

AT-1 बॉन्ड खरीदने वाले, जिनमें ज्यादातर NRI हैं, ने बैंक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों ने उन्हें गुमराह किया और भारत में रखे उनके फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट को बहरीन ट्रांसफर करने के लिए कहा। एक बॉन्ड होल्डर ने बताया, "हमें बहरीन ब्रांच में यह कहकर बॉन्ड बेचे गए कि ये फिक्स्ड मैच्योरिटी वाले हैं और इन पर पक्का रिटर्न मिलेगा। हमसे खाली कागजों पर भी साइन करवाए गए थे।"

असल में क्रेडिट सुइस के AT-1 बॉन्ड्स परपेचुअल (Perpetual) बॉन्ड थे, यानी जिनकी कोई मैच्योरिटी डेट नहीं होती। लेकिन बैंक अधिकारियों ने इन्हें 'फिक्स्ड मैच्योरिटी' बताकर ग्राहकों को बेच दिया।

क्या है क्रेडिट सुइस का संकट?

क्रेडिट सुइस को बचाने के लिए चलाए गए रेस्क्यू पैकेज के तहत, शुरुआत में लगभग 20 बिलियन डॉलर के AT-1 बॉन्ड्स को राइट-ऑफ (यानी उनकी वैल्यू जीरो कर दी गई) कर दिया गया था। हालांकि, बाद में स्विस फेडरल एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्ट ने इस कदम को 'गैर-कानूनी' करार दिया। फिलहाल, इस फैसले के खिलाफ FINMA (स्विस रेगुलेटर) और UBS (जिसने क्रेडिट सुइस को खरीदा) ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। इस पूरे मामले के बाद दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) ने HDFC बैंक की दुबई ब्रांच पर नए ग्राहक जोड़ने से रोक लगा दी है। हालांकि, अथॉरिटी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

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