
Hero Motors Share: 23 सितंबर को जब हीरो मोटर्स का शेयर डिस्काउंट पर लिस्ट हुआ, तो आईपीओ में पैसा लगाने वाले कई लोग निराश हो गए थे। लेकिन सिर्फ एक हफ्ते में ही इस शेयर ने ऐसा यू-टर्न मारा कि बेचने वाले हाथ मलते रह गए। 1 अक्टूबर की दोपहर तक BSE पर ये स्टॉक करीब 10% उछलकर ₹167.45 के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। यानी ₹82 के भाव से गिने तो महज 7 कारोबारी सत्रों में निवेशकों की वेल्थ 104% बढ़ चुकी है। आसान शब्दों में कहें तो पैसा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ चुका है। कंपनी का कुल मार्केट कैप भी बढ़कर ₹7,564 करोड़ के पार निकल चुका है। अगर आपकी नजर भी इस रॉकेट बने शेयर पर है और मन में सवाल आ रहा है कि क्या अब इसमें एंट्री लेनी चाहिए? तो एक्सपर्ट्स की सलाह जान लीजिए..
हीरो मोटर्स की शेयर बाजार में एंट्री बेहद ठंडी रही थी। लिस्टिंग का दिन 23 सितंबर को शेयर अपने तय इश्यू प्राइस (₹84) के मुकाबले करीब 2.3% की छूट के साथ ₹82 पर खुला था। उसी दिन रिकवरी भी देखने को मिली। दिन के कारोबार में शेयर ने रफ्तार पकड़ी और ₹98 के करीब बंद होकर पहले ही दिन 17% से ज्यादा का मुनाफा दिखा दिया। 28 सितंबर को हुई एक बड़ी बल्क डील (जिसमें Irage Broking ने 34 लाख से ज्यादा शेयर खरीदे) और कंपनी की 27वीं AGM के बाद शेयर में जोरदार खरीदारी लौटी और भाव ₹167.45 पर पहुंच गया।
हीरो मोटर्स सिर्फ भारत तक सीमित नाम नहीं है। ये असल में एक हाई-टेक ऑटो कंपोनेंट कंपनी है, जो गाड़ियों के इंजन और ट्रांसमिशन से जुड़े खास कलपुर्जे (Powertrain Solutions) तैयार करती है। कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसके क्लाइंट्स हैं। कंपनी BMW और Ducati जैसी दिग्गज अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को पार्ट्स सप्लाई करती है। इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट में लगने वाली मोटर्स और ड्राइव सॉल्यूशंस में भी कंपनी का काम तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका, यूरोप, भारत से लेकर आसियान (ASEAN) देशों के बड़े वाहन निर्माताओं तक इसका नेटवर्क फैला है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, हीरो मोटर्स का बिजनेस मॉडल और ईवी सेक्टर से जुड़ाव तो मजबूत है, लेकिन कंपनी के मौजूदा वित्तीय आंकड़े कुछ बड़े सवाल भी खड़े करते हैं। इसे 4 अहम फैक्टर्स से समझा जा सकता है...
P/E रेश्यो (वैल्यूएशन काफी महंगा)
कंपनी का शेयर इस समय 69 से 74 गुना के P/E पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, ऑटो कंपोनेंट सेक्टर की दूसरी कंपनियों का औसत P/E करीब 50 गुना के आसपास है। इसका मतलब है कि इंडस्ट्री के मुकाबले ये शेयर फिलहाल काफी महंगे भाव पर मिल रहा है।
EBITDA मार्जिन (मुनाफे की रफ्तार धीमी)
कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 10.2% पर है। ये आंकड़ा इस सेक्टर की कई बड़ी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मार्जिन के मुकाबले काफी कम है, जिससे कंपनी के कोर प्रॉफिट पर दबाव दिखता है।
रिटर्न ऑन नेट वर्थ (RoNW में अभी सुधार की दरकार)
कंपनी का RoNW फिलहाल 8.53% है। हालांकि इसमें पहले से सुधार हुआ है, लेकिन अपने साथी खिलाड़ियों के मुकाबले ये अभी भी पीछे चल रहा है।
क्लाइंट बेस (बड़े नाम, लेकिन निर्भरता का रिस्क)
कंपनी के पास BMW और Ducati जैसे दुनिया के सबसे बड़े लग्जरी ब्रैंड्स हैं, जो इसकी क्वॉलिटी साबित करते हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि चुनिंदा बड़े ग्राहकों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर होना एक 'कंसंट्रेशन रिस्क' है यानी अगर एक भी बड़े क्लाइंट के ऑर्डर कम हुए, तो रेवेन्यू पर सीधा असर पड़ सकता है।
इन चारों फैक्टर्स को देखते हुए मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि शेयर के फंडामेंटल अच्छे होने के बावजूद महंगा वैल्यूएशन नए निवेशकों के लिए रिस्क बढ़ा रहा है। इसलिए तेजी में कूदने के बजाय शेयर में स्थिरता आने (Consolidation) तक इंतजार करना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है।
डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और अवेयरनेस के लिए है। इसे निवेश या किसी भी शेयर को खरीदने-बेचने की की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।
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