
ITR Filing Required Documents: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का सीजन चल रहा है और हर कोई जल्द से जल्द अपना टैक्स फाइल करने में लगा है। लेकिन जल्दबाजी के चक्कर में कहीं आप बड़ी मुसीबत में न पड़ जाएं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने बिना पूरी तैयारी के आधा-अधूरा फॉर्म भरा, तो टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस सीधे आपके घर आ सकता है और आपका टैक्स रिफंड भी लंबे समय के लिए अटक सकता है. चाहे आप नौकरीपेशा (Salaried) हों, फ्रीलांसर हों, शेयर बाजार में पैसा लगाते हों या खुद का छोटा-मोटा बिजनेस चलाते हों, ITR फाइल करने से पहले कुछ जरूरी कागजात अपनी टेबल पर रखना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं वो जरूरी डॉक्यूमेंट्स, जो इस बार आपका रिफंड फटाफट आपके खाते में ट्रांसफर करवाएंगे।
पैन कार्ड और आधार कार्ड
टैक्स फाइलिंग की शुरुआत ही दो सबसे जरूरी कार्ड्स से होती है। सबसे पहले यह चेक कर लें कि आपका पैन (PAN Card) और आधार (Aadhaar Card) आपस में लिंक हैं या नहीं। अगर ये लिंक नहीं हैं, तो रिटर्न दाखिल करने में बड़ी समस्या आएगी।
नाम और नंबर की जांच
यह जरूर देख लें कि आपके पैन कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर पर आपका नाम और जन्मतिथि (DOB) बिल्कुल एक जैसी हो, स्पेलिंग में कोई अंतर न हो।
फॉर्म 16 (Form 16)
अगर आप कहीं जॉब करते हैं, तो आपको दो कागजातों की सबसे ज्यादा जरूरत होगी। पहला फॉर्म 16 है, जो आपको आपकी कंपनी (इम्पलायर) से मिलेगा, जिसमें आपकी कुल सैलरी और कटे हुए टैक्स (TDS) का पूरा ब्रेकअप होता है। अगर आपने साल के बीच में नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों से फॉर्म 16 लेना न भूलें। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि जब तक कंपनी से फॉर्म 16 न मिल जाए, तब तक ITR न भरें।
महीने की सैलरी स्लिप (Salary Slips)
फॉर्म 16 मिलने के बाद अपनी हर महीने की सैलरी स्लिप से उसका मिलान जरूर करें। इससे आपको बोनस, एलाउंस और पीएफ (PF) कटौती का सही-सही अंदाजा मिल जाएगा।
AIS और Form 26AS
ये दोनों डॉक्यूमेंट्स आपकी वित्तीय कुंडली हैं। आपके सेविंग्स अकाउंट पर कितना ब्याज मिला, कंपनियों से कितना डिविडेंड आया, आपने कहां-कहां शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदे-बेचे, वह सब इसमें पहले से दर्ज होता है। अगर आपकी असली कमाई और AIS (Annual Information Statement) के डेटा में थोड़ा सा भी मिसमैच (अंतर) हुआ, तो तुरंत स्क्रूटनी का नोटिस आ जाएगा।
सभी बैंक अकाउंट्स के स्टेटमेंट
आपके जितने भी एक्टिव बैंक खाते हैं, उन सभी का पासबुक या स्टेटमेंट निकाल कर रख लें। घर का किराया आ रहा हो या कोई अन्य बिजनेस रसीद, सबका हिसाब जरूरी है।
ब्याज का सर्टिफिकेट (Interest Certificate)
बैंक या पोस्ट ऑफिस में जो आपकी एफडी (FD) या आरडी (RD) चल रही है, उस पर मिलने वाले ब्याज का सर्टिफिकेट जरूर ले लें ताकि सही टैक्स का पता चल सके।
कमाई का लेखा-जोखा (Capital Gains Statement)
अगर आप शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी के इन्वेस्टर हैं, तो अपने ब्रोकर या म्यूचुअल फंड हाउस से 'कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट' डाउनलोड कर लें। इंट्राडे और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) वाले ट्रेडर्स को अपना प्रॉफिट एंड लॉस (P&L) स्टेटमेंट भी पास रखना होगा।
इन्वेस्टमेंट प्रूफ (80C): पीपीएफ (PPF), एलआईसी (LIC) की प्रीमियम रसीद, सुकन्या समृद्धि योजना, टैक्स-सेविंग एफडी या बच्चों की ट्यूशन फीस की रसीदें।
हेल्थ इंश्योरेंस (80D): खुद के लिए या पैरेंट्स के लिए खरीदी गई मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी की प्रीमियम रसीद।
होम लोन स्टेटमेंट: अगर होम लोन चल रहा है, तो बैंक से लोन स्टेटमेंट (ब्याज और मूलधन का ब्रेकअप) ले लें ताकि सेक्शन 24(b) और 80C के तहत छूट मिल सके।
मकान किराया (HRA): एचआरए क्लेम करने के लिए मकान मालिक का पैन कार्ड (यदि किराया लिमिट से ज्यादा है), रेंट एग्रीमेंट और हर महीने की रेंट रसीद पास रखें।
डोनेशन की रसीद (80G): अगर किसी मान्यता प्राप्त संस्था या चैरिटी को दान दिया है, तो उसकी रसीद संभाल कर रखें।
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