सूत्रों के मुताबिक, मानसून सत्र को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और न ही परिसीमन बिल के लिए कोई विशेष सत्र होगा। सरकार इस सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कराने की तैयारी में है।

नई दिल्ली [भारत], 5 अगस्त (ANI): संसद का मानसून सत्र बढ़ाए जाने की संभावना नहीं है और परिसीमन विधेयक के लिए सरकार की कोई विशेष सत्र बुलाने की योजना नहीं है। हालांकि, सूत्रों ने कहा कि सरकार सत्र के दौरान विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कराने की कोशिश कर सकती है।

FCRA संशोधन विधेयक, 2026 विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करना चाहता है। यह कानून भारत में व्यक्तियों, संघों और कंपनियों द्वारा विदेशी योगदान की स्वीकृति और उपयोग को नियंत्रित करता है। यह विधेयक 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। सूत्रों ने कहा कि अगर इस विधेयक पर चर्चा होती है, तो गृह मंत्री अमित शाह बहस का जवाब दे सकते हैं या चर्चा में हस्तक्षेप कर सकते हैं।

क्या हैं FCRA संशोधन विधेयक के प्रावधान?

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ANI को बताया कि संसद सत्र की तारीखों को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और 16 से 18 अगस्त तक महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर कोई विशेष सत्र की परिकल्पना नहीं की गई है। FCRA संशोधन विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान एक 'डेजिग्नेटेड अथॉरिटी' (नामित प्राधिकरण) का निर्माण है, जो उन संगठनों के विदेशी योगदान और संपत्तियों की देखरेख करेगा जिनका FCRA पंजीकरण रद्द, सरेंडर या समाप्त हो गया है।

प्रस्तावित ढांचे के तहत, जब कोई संगठन अपना FCRA पंजीकरण खो देता है, तो उसका विदेशी योगदान और संपत्ति शुरुआत में अस्थायी रूप से डेजिग्नेटेड अथॉरिटी के पास चली जाएगी। यदि संगठन निर्धारित अवधि के भीतर अपने पंजीकरण को बहाल या नवीनीकृत कर लेता है, तो संपत्ति और अप्रयुक्त विदेशी फंड वापस कर दिए जाएंगे। यदि निर्धारित अवधि के भीतर पंजीकरण बहाल नहीं किया जाता है, तो संपत्ति स्थायी रूप से डेजिग्नेटेड अथॉरिटी के पास निहित हो सकती है।

विधेयक में FCRA प्रमाण पत्र की समाप्ति, गैर-नवीनीकरण या नवीनीकरण से इनकार पर उसे समाप्त करने का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य उन मामलों में संपत्ति और विदेशी योगदान के प्रबंधन को संबोधित करना है जहां कोई संगठन निष्क्रिय हो जाता है या उसका पंजीकरण समाप्त हो जाता है।

पूजा स्थलों जैसी संपत्तियों के लिए, प्रस्तावित ढांचा यह प्रावधान करता है कि डेजिग्नेटेड अथॉरिटी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका धार्मिक स्वरूप बना रहे। विधेयक डेजिग्नेटेड अथॉरिटी के आदेशों के खिलाफ समीक्षा और न्यायिक अपील का अधिकार भी प्रदान करता है।

प्रस्तावित कानून में दंड को तर्कसंगत बनाने का भी प्रयास किया गया है, जिसमें अधिनियम के उल्लंघन के लिए अधिकतम कारावास को पांच साल से घटाकर एक साल करना शामिल है। इसमें यह भी प्रस्ताव है कि राज्य एजेंसियां FCRA के तहत जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करें।

सरकार ने प्रस्तावित संशोधनों को मौजूदा FCRA ढांचे में परिचालन संबंधी खामियों को दूर करने और विदेशी योगदान व संपत्तियों के प्रबंधन तथा निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया बताया है।

हंगामे की भेंट चढ़ा मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था और 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई सहित विपक्ष की मांगों को लेकर सत्र में हर दिन स्थगन देखा गया है।

विपक्षी विरोध के बीच लोकसभा में विधेयक लगभग बिना किसी बहस के पारित कर दिए गए हैं। रिजिजू ने बुधवार को कहा कि बिना बहस के विधेयक पारित होने के लिए विपक्ष जिम्मेदार है। (ANI)

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