
नई दिल्लीः ये मत सोचिए कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर सिर्फ बिजनेसमैन या बहुत अमीर लोगों पर होती है। अब ऐसा नहीं है। बैंक अकाउंट पैन कार्ड से लिंक हैं और रिपोर्टिंग सिस्टम ऑटोमैटिक हो गया है, इसलिए आम लोगों के बैंकिंग लेन-देन पर भी नजर रखी जा रही है। अगर आपके अकाउंट में पैसे जमा करने, निकालने या कार्ड पेमेंट में कुछ भी असामान्य दिखा, तो आईटी डिपार्टमेंट का नोटिस घर आ सकता है। चलिए जानते हैं ऐसे 10 ट्रांजैक्शन के बारे में, जिन पर इनकम टैक्स विभाग की नजर रहती है।
एक फाइनेंशियल ईयर में अगर आप अपने सेविंग्स अकाउंट में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा 'कैश' जमा करते हैं, तो बैंक इसकी जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को जरूर देगा। इसमें कुछ गलत नहीं है, लेकिन आपके पास इस पैसे के सोर्स का सबूत होना चाहिए। जैसे- प्रॉपर्टी बेचने के कागज, लोन चुकाने का प्रूफ या गिफ्ट डीड।
क्रेडिट कार्ड का बिल भरते समय सावधान रहें। अगर आप एक साल में 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा 'कैश' में बिल भरते हैं, या फिर 10 लाख रुपये से ज्यादा का बिल ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर से चुकाते हैं, तो इसकी जानकारी टैक्स अधिकारियों को दी जाएगी। अगर आपके खर्चे आपकी बताई गई इनकम से मेल नहीं खाते, तो जांच हो सकती है।
10 लाख की लिमिट से बचने के लिए अगर आप 2-2 लाख रुपये करके पांच बार में पैसे जमा करते हैं, तो भी कोई फायदा नहीं होगा। सिस्टम पूरे साल के आपके सभी ट्रांजैक्शन को जोड़ लेता है। अगर आपकी कमाई के हिसाब से कैश लेन-देन ज्यादा है, तो लिमिट से कम होने पर भी शक पैदा हो सकता है।
घर या जमीन खरीदते या बेचते समय अगर सौदे की कीमत 30 लाख रुपये या उससे ज्यादा है, तो इसकी भी रिपोर्टिंग होती है। रियल एस्टेट में काले धन के लेन-देन की आशंका ज्यादा होती है, इसलिए अधिकारी इस पर कड़ी नजर रखते हैं। प्रॉपर्टी का लेन-देन हमेशा चेक या बैंक ट्रांसफर से ही करें और रजिस्ट्री में पूरी रकम दिखाएं।
अगर कोई अकाउंट महीनों या सालों से इस्तेमाल नहीं हो रहा है और उसमें अचानक कोई बड़ा अमाउंट जमा या निकाला जाता है, तो वो तुरंत पकड़ में आ जाता है। शक हो सकता है कि कोई आपके अकाउंट का गलत इस्तेमाल कर रहा है। अगर आप पुराना अकाउंट फिर से शुरू कर रहे हैं और उसमें विरासत में मिला पैसा या कोई संपत्ति बेचकर पैसा आया है, तो उसके कागज संभालकर रखें।
अगर आप एक साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा की विदेशी करेंसी खरीदते हैं, विदेश में पैसा भेजते हैं या इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड से खर्च करते हैं, तो इस पर भी कड़ी निगरानी रखी जाती है। आपकी इनकम से मेल न खाने वाले बड़े विदेशी खर्चों पर सवाल उठ सकते हैं। इसलिए ट्रैवल टिकट, ट्यूशन फीस की रसीदें और पैसे भेजने के सबूत अपने पास जरूर रखें।
सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से मिलने वाले ब्याज के एक-एक रुपये की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास होती है। कई लोग रिटर्न फाइल करते समय इस छोटी इनकम को दिखाना भूल जाते हैं, लेकिन अधिकारी इसे आसानी से पता लगा सकते हैं।
अगर आपके किसी ट्रांजैक्शन पर विभाग की नजर है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप पर जुर्माना लगेगा ही। अगर आप अपने लेन-देन का सही-सही ब्यौरा दे सकते हैं, तो घबराने की कोई बात नहीं है। लेकिन, नोटिस को नजरअंदाज करने पर मामला बिगड़ सकता है। इनकम छिपाने पर टैक्स की रकम का 50% से लेकर 200% तक जुर्माना और ब्याज भी लग सकता है।
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