
बिजनेस डेस्क। भारत की थोक महंगाई अप्रैल में तीन दशक की ऊंचाई पर पहुंच गई है। वास्तव में वस्तुओं की ऊंची कीमतें और सप्लाई चेन व्यवधानों ने उत्पादकों के लिए इनपुट कॉस्ट को बढ़ा दिया। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आज जारी आंकड़ों से पता चलता है कि पहले अप्रैल में थोक कीमतों में 15.08फीसदी की वृद्धि हुई। जबकि मार्च के महीने में थोक महंगाई 14.55 फीसदी थी। कुछ दिन पहले रिटेल महंगाई के आंकड़ें सामने आए थे, जिसमें रिटेल महंगाई के आंकड़ें आठ साल की ऊंचाई पर पहुंच गई है। आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर थोक महंगाई के आंकड़ें क्या कह रहे हैं।
जानकारों की मानें तो थोक महंगाई एक बार फिर उम्मीदों से काफी ऊपर रही है। यह लगातार 13वां महीना है जब हम फैक्ट्री लेवल पर दो अंकों की महंगाई देख रहे हैं। थोक मंहगाई इंडेक्स के लगभग सभी घटकों ने इस हाई इंफ्लेशन में योगदान दिया है। हाई इंफ्लेशन प्रिंट केंद्रीय बैंक पर दरों और आसान मौद्रिक नीति पर कार्य करने के लिए और दबाव डालेगा। एक अच्छा मानसून और प्रेशर में आसानी से कच्चे तेल की कीमतें अंतत: मुद्रास्फीति पर दबाव डाल सकती हैं।
फ्यूल की कीमतें, वृद्धि का एक बड़ा घटक, मार्च में 38.66 प्रतिशत बनाम 34.52 फीसदी थी। महंगाई पर काबू पाने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने की शुरुआत में एक आश्चर्यजनक दर वृद्धि की घोषणा की, जून में होने वाली अगली मौद्रिक नीति में, यह दरों में और वृद्धि करने और अपने 5.7 फीसदी महंगाई पूर्वानुमान को संशोधित करने की उम्मीद है।
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