एक डॉलर की कीमत 80 रुपए के पार- 2014 से अब तक 25% गिरावट, जानें क्यों हुआ ऐसा हाल

Published : Jul 19, 2022, 01:10 PM ISTUpdated : Jul 19, 2022, 01:32 PM IST
एक डॉलर की कीमत 80 रुपए के पार- 2014 से अब तक 25% गिरावट, जानें क्यों हुआ ऐसा हाल

सार

डॉलर के मुकाबले रुपया 80.01 रुपया हो गया है। रुपया अब तक के रिकॉर्ड सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। 19 जुलाई को रुपया 4 पैसे कमजोर होकर खुला था। एक दिन पहले 79.97 पर रुपया बंद हुआ था। 

बिजनेस डेस्कः रुपया 19 जुलाई को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 80.01 रुपया हो गया है। रुपया आज 4 पैसे कमजोर होकर खुला है। इससे पहले सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 79.97 पर बंद हुआ था। पिछले एक महीने में रुपया 2% से भी ज्यादा टूट चुका है। जानकारी दें कि एक साल में रुपया डॉलर के सामने 7.4% नीचे गिर गया है।

कच्चे तेल की कीमत बढ़ी से हुआ ऐसा हाल
रुपया के निचले स्तर पर पहुंचने का कारण सरकार ने कच्चे तेल की कीमत को छहराया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में रुपए के टूटने के कारण बताए। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग जैसे ग्लोबल फैक्टर, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और ग्लोबल फाइनेंशियल कंडीशन्स का कड़ा होना रुपए के कमजोर होने का कारण है। 

करेंसी की कीमत ऐसे होती है तय
किसी भी देश की करेंसी में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। इसके कई कारण हैं। डॉलर की तुलना में किसी भी अन्य करेंसी की वैल्यू घटे तो इसे उस करेंसी का गिरना, टूटना, कमजोर होना कहते हैं। हर देश के पास विदेशी मुद्रा का भंडार होता है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय लेन-देन करता है। विदेशी मुद्रा भंडार के घटने और बढ़ने से किसी भी देश की करेंसी की चाल तय होती है। अगर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर, अमेरिका के रुपयों के भंडार के बराबर है तो रुपए की कीमत स्थिर रहेगी। इसे सरल भाषा में समझते हैं। अगर हमारे पास डॉलर बढ़ जाए तो रुपया मजबूत हो जाएगा। अगर हमारे पास डॉलर घट जाए तो रुपए कमजोर हो जाएगा। 

रुपए कमजोर होने से किसका फायदा किसका नुकसान

इनका होगा फायदा: रुपए को कमजोर होने से एक्सपोर्ट बिजनेस करने वालों को काफी फायदा होगा। उन्हें बाहर जो भी पेमेंट मिलेगा वह डॉलर में होगा। इसे व्यापारी रुपए में बदलकर ज्यादा कमाई कर सकेंगे। इससे विदेश में माल बेचने वाली IT और फार्मा कंपनी को काफी फायदा होगा।

इनका होगा नुकसान: रुपए के कमजोर होने से कच्चे तेल का आयात महंगा होगा। इससे महंगाई बढ़ेगी। देश में सब्जियां और खाद्य पदार्थ महंगे होंगे। भारतीयों को डॉलर में पेमेंट करना भारी पड़ेगा। विदेश घूमना महंगा होगा। विदेशों में पढ़ाई महंगी होगी।

30 दिनों में रुपए का हाल

  • 22 जून - 78.39/डॉलर 
  • 28 जून - 78.57/डॉलर 
  • 1 जुलाई - 79.12/डॉलर 
  • 5 जुलाई - 79.37/डॉलर 
  • 12 जुलाई - 79.65/डॉलर
  • 13 जुलाई - 79.68/डॉलर
  • 14 जुलाई - 79.94/डॉलर
  • 18 जुलाई - 79.97/डॉलर
  • 19 जुलाई - 80.01/डॉलर

2014 से अब तक रुपए का हाल

  • 2014 - 58.57 रुपया
  • 2015 - 63.44 रुपया
  • 2016 - 66.77 रुपया
  • 2017 - 64.88 रुपया
  • 2018 - 68.01 रुपया
  • 2019 - 70.33 रुपया
  • 2020 - 75.82 रुपया
  • 2021 - 73.26 रुपया
  • 2022 - 80.01 रुपया

कब तक रहेगा रुपए का ऐसा हाल
बाजार के जानकारों के मुताबिक अभी कुछ दिनों तक रुपए पर थोड़ा दबाव बना रहेगा। लेकिन देश के पास काफी अच्छा फॉरेक्स रिजर्व (575 मिलियन डॉलर) है। इसके बूते रिजर्व बैंक स्थिति को संभालने में सक्षम है। उम्मीद है जल्द ही RBI इस मामले में दखल देगा। 

यह भी पढ़ें- Edible Oil Price: बढ़ती महंगाई के बीच खुशखबरी- खाने के तेल में इस कंपनी ने की भारी कटौती, कम कर दिए 30 रुपए

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