भारत का व्यापार घाटा और बढ़ सकता है, मिडिल ईस्ट का तनाव बढ़ाएगा दबाव

Published : Jul 14, 2026, 01:30 PM IST
Representative Image (File Photo/ANI)

सार

डोलाट कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तनाव से तेल की कीमतें और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। इससे भारत का व्यापार घाटा दबाव में रहेगा। जून में घाटा बढ़कर 30.4 अरब डॉलर हो गया, जो पांच महीने का उच्चतम स्तर है।

नई दिल्ली [भारत], 14 जुलाई (एएनआई): डोलाट कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत का व्यापार घाटा (merchandise trade deficit) दबाव में बना रह सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मिडिल ईस्ट में नए भू-राजनीतिक संकट से तेल की कीमतें और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, चीन से कच्चे तेल की मांग में कमी से वैश्विक तेल की कीमतों में किसी भी तेज उछाल को रोकने में मदद मिल सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "आगे देखते हुए, होर्मुज जलडमरूमध्य में नए सिरे से आने वाली बाधाओं के कारण माल ढुलाई की लागत और तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। हालांकि, चीन से कच्चे तेल की मांग में नरमी और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा रणनीतिक भंडार की आक्रामक जमाखोरी न करने से वैश्विक तेल की कीमतों में किसी भी तेज वृद्धि को सीमित करने की संभावना है।"

जून में पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा घाटा

भारत का व्यापार घाटा जून 2026 में बढ़कर 30.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 19.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आयात, निर्यात की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ा। सालाना आधार पर माल का आयात 31 प्रतिशत बढ़कर 70.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

आयात में क्यों आई तेजी?

डोलाट कैपिटल के अनुसार, आयात में तेज वृद्धि का कारण होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं में कमी के बाद इन्वेंट्री की री-स्टॉकिंग रही है। इसके साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों, उर्वरकों, इलेक्ट्रॉनिक सामानों और प्रमुख कृषि वस्तुओं की मजबूत मांग ने भी इसे बढ़ाया है।

पेट्रोलियम का आयात 19.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर पर बना रहा, जो युद्ध-पूर्व के मासिक औसत लगभग 13-15 बिलियन अमेरिकी डॉलर से काफी अधिक है। वहीं, उर्वरक के आयात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2026 में लागू हुए आयात शुल्क में बदलाव के बाद सोने का आयात घटकर 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि चांदी का आयात तेजी से घटकर 0.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।

निर्यात के मोर्चे पर भी दिखी मजबूती

निर्यात के मोर्चे पर, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक सामान, पेट्रोलियम उत्पाद और ऑर्गेनिक व इनऑर्गेनिक रसायन विकास के प्रमुख चालक बने रहे। संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और चीन जैसे प्रमुख बाजारों के समर्थन से निर्यात की मांग व्यापक बनी रही।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि भारत का निर्यात लचीला बना हुआ है, लेकिन मजबूत आयात वृद्धि ने व्यापार घाटे को बढ़ा दिया है। इसमें यह भी कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण तेल की आपूर्ति में किसी भी और बाधा से देश का आयात बिल ऊंचा रह सकता है और यह आने वाले महीनों में चालू खाते के लिए एक प्रमुख जोखिम बना रहेगा। (एएनआई)

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