iPhone खरीदने के लिए 'No-Cost EMI' ले रहे हैं? जानिए बैंक आपको कैसे पहना रहा टोपी!

Published : Aug 20, 2026, 01:57 PM IST
No-Cost EMI

सार

No-Cost EMI Truth: क्या आईफोन या गैजेट्स खरीदने के लिए 'No-Cost EMI' यूज करते हैं? जानिए बैंक और मर्चेंट कैसे कैश डिस्काउंट बंद करके छिपे चार्जेज वसूलते हैं।

No-Cost EMI Hidden Charges: नया आईफोन या कोई महंगा गैजेट खरीदने का मन है और जेब में एक साथ पैसे नहीं हैं? तो सबसे पहला ख्याल दिमाग में क्या आता है? 'No-Cost EMI' का ऑप्शन, है ना। ज्यादातर लोगों को लगता है इसमें कोई ब्याज नहीं लगेगा, आराम से हर महीने किस्त भर देंगे। अगर आप भी यही सोचकर बिना सोचे-समझे किसी भी गैजेट को 'नो-कॉस्ट ईएमआई' पर घर ले आते हैं, तो यह आर्टिकल सिर्फ आपके लिए है। सुनने में यह डील जितनी अच्छी लगती है, असलियत में इसके पीछे बैंक और कंपनियों का एक ऐसा गणित छुपा होता है, जो आपकी जेब पर भारी पड़ जाता है। आइए समझते हैं कि यह 'नो-कॉस्ट ईएमआई' का पूरा खेल असल में काम कैसे करता है...

क्या सच में 'No-Cost EMI' जैसी कोई चीज होती है?

सीधे शब्दों में कहें तो नहीं! दुनिया में कोई भी बैंक या कंपनी आपको बिना किसी फायदे के मुफ्त में पैसे उधार नहीं देगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, किसी भी लोन पर ब्याज (Interest) लगना लाजिमी है। फिर सवाल यह आता है कि जब ब्याज लग रहा है, तो इसे 'नो-कॉस्ट' क्यों कहा जाता है? इसका जवाब छिपा है उस डिस्काउंट में, जो आपको नहीं मिलता।

बैंक और कंपनियों का खेल ऐसे समझें

जब आप किसी स्टोर या ऑनलाइन शॉपिंग ऐप पर कोई फोन देखते हैं, तो उस पर दो प्राइस होते हैं। एक होता है कैश डिस्काउंट, जो एक बार में पूरा पैसा देंने पर मिलता है। दूसरा होता है एमआरपी या नॉर्मल प्राइस, जो ईएमआई के लिए होता है। जब आप नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते हैं, तो बैंक आपको दिखने में तो कोई ब्याज नहीं लगाता, लेकिन दुकानदार आपको मिलने वाला वो भारी-भरकम 'कैश डिस्काउंट' बंद कर देता है। यानी जो फोन आपको एकमुश्त पैसे देने पर 70,000 रुपए का मिल रहा था, वही ईएमआई पर लेने पर आपको करीब 80,000 रुपए का पड़ता है। वही 10,000 रुपए का अंतर बैंक का ब्याज और प्रोसेसिंग फीस बन जाता है!

No-Cost EMI लेते वक्त लगने वाले छिपे हुए चार्जेज

प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee)

बैंक लोन पास करने के नाम पर आपसे अलग से प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं, जिस पर जीएसटी (GST) भी लगता है।

इंटरेस्ट पर जीएसटी

भले ही बैंक कागजों पर ब्याज माफ कर दे, लेकिन लोन प्रोसेस होने के दौरान जो इंटरेस्ट अमाउंट बैंक और मर्चेंट आपस में बांटते हैं, उस पर आपको 18% जीएसटी अलग से देना पड़ जाता है।

क्रेडिट कार्ड के छुपे नियम

अगर आप क्रेडिट कार्ड की लिमिट ब्लॉक करके ईएमआई बनवा रहे हैं, तो जरा सा भी पेमेंट चूकने पर पेनल्टी और भारी-भरकम ब्याज लग सकता है, जो करीब 35% से 42% तक सालाना हो सकता है।

तो फिर क्या करना चाहिए?

कैश प्राइस और EMI प्राइस की तुलना करें

इसका मतलब यह नहीं है कि आप कभी ईएमआई पर सामान न खरीदें। बस आपको थोड़ा स्मार्ट होने की जरूरत है। सामान खरीदते समय हमेशा चेक करें कि एक बार में पेमेंट करने पर वह सामान कितने का मिल रहा है और ईएमआई पर कुल मिलाकर कितने पैसे जेब से जा रहे हैं।

क्रेडिट कार्ड ऑफर्स देखें और बजट का ध्यान रखें

कई बार बैंक डायरेक्ट कैशबैक या बैंक डिस्काउंट देते हैं, जो नो-कॉस्ट ईएमआई से ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। सिर्फ ऑफर के चक्कर में अपनी जरूरत से ज्यादा महंगा फोन या गैजेट ईएमआई पर न लें, जो बाद में आपके हर महीने के बजट को बिगाड़ दे।

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