ईरान के 'ऑयल हब' पर बड़ा हमला: क्या भारत में महंगा हो जाएगा पेट्रोल? समझें कच्चे तेल का नया गणित

Published : Apr 07, 2026, 05:48 PM IST

Iran Israel War Oil Impact: इजराइल ने ईरान के 'ऑयल हब' खार्ग आइलैंड पर हमला कर उसके सबसे बड़े तेल टर्मिनल को निशाना बनाया है। इस खबर से ग्लोबल मार्केट में खलबली मच गई है। ऐसे में सवाल है क्या भारत में पेट्रोल महंगा हो सकता है? आसान तरीके से समझिए…

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खार्ग आइलैंड पर हमला क्यों है बड़ी बात?

खार्ग आइलैंड ईरान की 'पावर' है। ईरान जितना भी कच्चा तेल दुनिया को बेचता है, उसका 80 से 90% हिस्सा इसी अकेले आइलैंड से होकर गुजरता है। यहां से हर दिन करीब 70 लाख बैरल तेल जहाजों में भरा जा सकता है। इस आइलैंड पर करीब 3 करोड़ बैरल तेल जमा रखने की क्षमता है। तेल की बिक्री ही ईरान की सेना और सरकार की सबसे बड़ी ताकत है। अगर यह बंद हुआ, तो ईरान आर्थिक रूप से टूट सकता है।

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डोनाल्ड ट्रंप की डेडलाइन और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक सख्त डेडलाइन दी है। बुधवार सुबह 5:30 बजे (भारतीय समयानुसार) तक अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता है, तो भीषण हमले किए जाएंगे। यह वही समुद्र का संकरा रास्ता है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। जानकार मान रहे हैं कि अगर यहां से सप्लाई रुकी, तो कच्चे तेल की कीमत $10 प्रति बैरल तक तुरंत बढ़ सकती है।

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भारत पर इसका क्या असर हो सकता है?

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदता है। जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल महंगा होता है, तो सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो जाती हैं।जानकारों का कहना है कि अगर खार्ग आइलैंड तबाह होता है या होर्मुज का रास्ता बंद होता है, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर भारत में दाम बढ़ सकते हैं। अगर डीजल महंगा हुआ तो फल, सब्जी और राशन का ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो सकता है। इससे ऑनलाइन डिलीवरी चार्ज बढ़ सकता है। मतलब सीधा असर हमारी-आपकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है।

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ईरान के पास कितना तेल है?

वर्ल्डमीटर्स (worldometers) और तेहरान टाइम्स के अनुसार, ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है। उसके पास लगभग 208.6 अरब बैरल का विशाल तेल भंडार है, जो वैश्विक तेल भंडार का लगभग 11.8% हिस्सा है। ईरान हर दिन लगभग 33 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है। ओपेक (OPEC) देशों में ईरान तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। ईरान के तेल के सबसे बड़े खरीदार चीन और अन्य एशियाई देश हैं। दुनिया की कुल ऊर्जा सप्लाई का 4.5% हिस्सा ईरान से आता है। यही कारण है कि यहां तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका गहरा गई है। इस युद्ध के शुरू होने से पहले ईरान ने अपना तेल निर्यात (Export) अचानक 3 गुना बढ़ा दिया था। 15 से 20 फरवरी के बीच यह 30 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया था।

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खार्ग आइलैंड पर पहले भी हो चुके हैं हमले

यह पहली बार नहीं है जब खार्ग आइलैंड निशाने पर है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी इस टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था। हालांकि तब अमेरिका ने इसे सीधे निशाना नहीं बनाया था, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं।

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