
ITR Filing Mistakes: अगर आप इस साल अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने जा रहे हैं, तो रुकिए। जल्दबाजी में कोई भी जानकारी भरने से पहले आपको कुछ बेहद जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा। आजकल इनकम टैक्स विभाग का सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक हो चुका है। इसका मतलब है कि अगर आपके दावों और विभाग के पास मौजूद आंकड़ों में थोड़ी-सी भी गड़बड़ी मिली, तो बिना देर किए सीधे आपके फोन या ईमेल पर टैक्स नोटिस आ जाएगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि आजकल ज्यादातर नोटिस आय छिपाने से नहीं, बल्कि डेटा में अंतर (Mismatch) मिलने की वजह से आते हैं। आइए जानते हैं वो कौन से 3 पेपर्स हैं, जिन्हें आपस में मैच करना आपके लिए सबसे जरूरी है...
AIS (Annual Information Statement)
AIS में आपकी कमाई, बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर ट्रांजैक्शन, हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन जैसी कई जानकारियां दिखाई देती हैं। कई बार लोग बैंक से मिलने वाला छोटा-सा ब्याज या डिविडेंड बताना भूल जाते हैं। यही गलती बाद में नोटिस की वजह बन सकती है।
Form 26AS
यह आपके टैक्स क्रेडिट का रिकॉर्ड होता है। इसमें TDS, TCS और अन्य टैक्स एंट्री दिखाई देती हैं। अगर आपके ITR में भरी गई जानकारी और Form 26AS में दिख रहे आंकड़ों में अंतर है, तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ सकता है।
TIS (Tax Information Statement)
यह AIS का ही एक छोटा और साफ रूप है, जो टैक्स कैलुकलेशन को आसान बनाता है। यह एक तरह की आपके टैक्स डेटा की समरी होती है। ITR भरने से पहले इसे भी जरूर देख लें, ताकि कोई एंट्री छूट न जाए।
बहुत से लोग सोचते हैं कि कुछ सौ रुपये का बैंक इंटरेस्ट या छोटी TDS एंट्री बताने की जरूरत नहीं है। लेकिन अब आयकर विभाग का सिस्टम काफी एडवांस हो चुका है। अगर आपके ITR में दी गई जानकारी और विभाग के रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो ऑटोमैटिक अलर्ट या नोटिस आ सकता है।
कई बार AIS में भी गलत या डुप्लीकेट एंट्री दिखाई दे सकती है। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। आप आयकर पोर्टल पर उपलब्ध फीडबैक विकल्प का इस्तेमाल करके गलत जानकारी को रिपोर्ट कर सकते हैं। इसलिए केवल AIS पर भरोसा करने के बजाय अपने बैंक स्टेटमेंट, निवेश रिकॉर्ड और अन्य डॉक्यूमेंट्स भी जरूर चेक करें।
गलत ITR फॉर्म चुनना
टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, टैक्सपेयर्स अक्सर अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बाद में उनके लिए मुसीबत बन जाती हैं। ऐसी ही गलती है गलत आईटीआर फॉर्म चुनना। अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आमतौर पर ITR-1 भरते हैं। लेकिन अगर आपने शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से कमाई की है, या विदेश में कोई संपत्ति है, तो आपके लिए ITR-2 या ITR-3 फॉर्म सही रहेगा। गलत फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न 'डिफेक्टिव' (अमान्य) मान लिया जाता है।
पुरानी नौकरी की सैलरी छिपाना
अगर आपने बीते साल में जॉब बदली है, तो आपको दोनों कंपनियों (पुरानी और नई) से मिले फॉर्म 16 को जोड़कर कुल सैलरी दिखानी होगी। सिर्फ आखिरी कंपनी की सैलरी दिखाने पर टैक्स की बड़ी देनदारी छिप जाती है, जिसे टैक्स विभाग आसानी से पकड़ लेता है।
F&O और शेयर बाजार की अधूरी जानकारी
अगर आप फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या इंट्रा-डे ट्रेडिंग करते हैं, तो नए नियमों के मुताबिक आपको प्रॉफिट-लॉस स्टेटमेंट की पाई-पाई का हिसाब देना होगा। F&O के लिए इस बार नए ITR फॉर्म में अलग से कॉलम जोड़े गए हैं, और ऐसे नौकरीपेशा लोगों को अब ITR-3 फॉर्म भरना अनिवार्य है।
कई लोग सोचते हैं कि ऑनलाइन फॉर्म सबमिट कर दिया तो काम खत्म हो गया। ऐसा नहीं है! ITR सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसे ई-वेरिफाई (e-verify) करना ज़रूरी है। अगर आप यह नहीं करते हैं, तो आपका रिटर्न रद्द माना जाएगा और आपको पुराने टैक्स सिस्टम का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।
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