
ITR Late Filing Penalty: क्या आपने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करके उसे ई-वेरीफाई (E-verify) कर लिया है? अगर नहीं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 2026-27 के लिए आईटीआर दाखिल करने की लास्ट डेट 31 जुलाई 2026 बेहद नजदीक आ चुकी है। अक्सर कई टैक्सपेयर सोचते हैं कि डेडलाइन डेडलाइन निकलने पर सिर्फ 5,000 रुपए की लेट फीस भरनी होगी, लेकिन ऐसा हर मामले में नहीं होता है। देरी से ITR फाइल करना, गलत जानकारी देना या टैक्स से जुड़े नियमों का पालन नहीं करना कई तरह की पेनल्टी और दूसरी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। आइए जानते हैं 31 जुलाई की आखिरी तारीख छूटने या नियमों का पालन न करने पर किन-किन मामलों में जुर्माना लग सकता है...
अगर आप तय समय के बाद ITR फाइल करते हैं, तो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत लेट फीस देनी पड़ सकती है। मैक्सिमम 5,000 रुपए तक लेट फीस लग सकती है। अगर आपकी कुल टैक्सेबल इनकम 5 लाख या उससे कम है, तो अधिकतम 1,000 रुपए की लेट फीस लागू हो सकती है। यानी हर व्यक्ति पर 5,000 रुपए की फीस नहीं लगती, यह आपकी इनकम और नियमों पर निर्भर करता है।
अगर आपने पहले ITR फाइल कर दिया, लेकिन बाद में उसमें गलती पकड़ में आई और उसे समय पर ठीक नहीं किया, तो भी परेशानी हो सकती है। धारा 234-I के तहत देरी से संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करने पर 1,000 से 5,000 रुपए तक की फीस लग सकती है। यह राशि आपकी कमाई और लागू नियमों के आधार पर तय होती है।
अगर कोई टैक्स बचाने के लिए जानबूझकर अपनी आय कम दिखाता है या गलत जानकारी देता है, तो धारा 270A के तहत बड़ी पेनल्टी लग सकती है। ऐसे मामलों में देय टैक्स का 50% से लेकर 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसलिए ITR भरते समय सभी जानकारी सही और पूरी देना बेहद जरूरी है।
इनकम टैक्स कानून में कैश ट्रांजैक्शन को लेकर भी नियम हैं। अगर कोई व्यक्ति नियमों के खिलाफ ₹2 लाख या उससे ज्यादा नकद लेता है, तो धारा 269ST और 271DA के तहत जितनी राशि नकद ली गई है, उतनी ही रकम तक पेनल्टी लग सकती है।
अगर टैक्स कैलकुलेशन के बाद आपके ऊपर कुछ टैक्स (Self-Assessment Tax) बकाया है और आपने उसे समय पर जमा नहीं किया, तो धारा 140A और 221 के तहत कार्रवाई हो सकती है। कुछ मामलों में बकाया टैक्स की राशि के बराबर तक पेनल्टी भी लग सकती है। इसके अलावा ब्याज भी देना पड़ सकता है।
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कई लोग ITR तो भर देते हैं, लेकिन ई-वैरिफिकेशन करना भूल जाते हैं। जब तक आपका रिटर्न सफलतापूर्वक ई-वैरिफाई नहीं होता है, तब तक उसकी प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती है। इसलिए ITR फाइल करने के बाद ई-वैरिफिकेशन जरूर करें।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अलग-अलग मामलों में इनकम, टैक्स स्थिति और अन्य परिस्थितियों के अनुसार नियम और परिणाम अलग हो सकते हैं। ITR दाखिल करने या टैक्स से जुड़ा कोई फैसला लेने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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