नई दिल्लीः भारत तेजी से नई इंडस्ट्रीज का बड़ा ग्लोबल सेंटर बनने की तरफ बढ़ रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक Jefferies ने 9 सितंबर को जारी अपनी रिपोर्ट में इसे “India’s New Industrial Revolution” कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक- भारत का बड़ा घरेलू बाजार, प्राइवेट कंपनियों की बढ़ती भागीदारी और सरकार की लगातार पॉलिसी सपोर्ट मिलकर कई नई इंडस्ट्री को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। Jefferies ने खास तौर पर स्पेस, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और एयरोस्पेस को भारत के लिए हाई-ग्रोथ सेक्टर बताया है। इन क्षेत्रों में इन्वेस्ट बढ़ रहा है और भारत सिर्फ घरेलू जरूरत पूरी करने के बजाय ग्लोबल सप्लाई चेन में भी अपनी जगह मजबूत कर रहा है।
भारत उन चुनिंदा देशों में है, जिनके पास मजबूत स्पेस टेक्नोलॉजी और लॉन्च कैपेसिटी है। अब इस सेक्टर में सरकारी संस्थानों के साथ प्राइवेट कंपनियों का रोल बढ़ रहा है। Jefferies के मुताबिक- भारत की स्पेस इकोनॉमी 2030 तक करीब 5 गुना बढ़कर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। Skyroot, Pixxel और Agnikul जैसी कंपनियां कमर्शियल स्पेस बिजनेस की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे सैटेलाइट, लॉन्च सर्विस, स्पेस डेटा और दूसरी टेक्नोलॉजी में नए मौके बन सकते हैं।
भारत लंबे समय से चिप मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की की दिशा में वर्क कर रहा है। अब इसका असर जमीन पर दिखाई देने लगा है। करीब 20 अरब डॉलर का इन्वेस्ट इस सेक्टर में आ चुका है। एक चिप फैब का कंसट्रक्शन चल रहा है, जबकि कई OSAT प्रोजेक्ट भी प्रोडक्शन की दिशा में बढ़ रहे हैं। करीब 13 अरब डॉलर की एक्स्ट्रा इंसेंटिव स्कीम से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और डिफेंस जैसे क्षेत्रों को भी फायदा होगा।
भारत में डेटा सेंटर की कैपेसिटी पिछले 5 साल में करीब 5 गुना बढ़कर 2 GW हो गई है। अगले 5 साल में इसके लगभग 10 GW तक पहुंचने का अनुमान है। Jefferies के मुताबिक- इससे करीब 45 अरब डॉलर का इन्वेस्ट चांस बन सकता है। इसमें सिर्फ डेटा सेंटर बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि बिजली, कूलिंग सिस्टम, नेटवर्क और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में भी बड़ा बिजनेस पैदा होगा।
भारत मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली का बड़ा सेंटर बन चुका है। अब अगला टारगेट देश में ज्यादा से ज्यादा कंपोनेंट बनाने का है। रिपोर्ट के मुताबिक- मोबाइल कंपोनेंट्स में भारत की घरेलू वैल्यू एडिशन अगले 6 साल में 20% से कम स्तर से बढ़कर करीब 50% तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है- इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने में भारत की अपनी कंपनियों और सप्लायर्स की भूमिका बढ़ेगी।
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर PV मैन्युफैक्चरिंग देश बन चुका है। देश में करीब 35 GW सेल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी काम कर रही है और लगभग 100 GW कैपेसिटी निर्माण के अलग-अलग फेजों में है। Jefferies का अनुमान है- 2030 तक सोलर वैल्यू चेन का करीब 90% हिस्सा भारत में लोकलाइज हो सकता है। इससे इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
एयरोस्पेस सेक्टर में भी भारत के लिए बड़ा मौका बन रहा है। ग्लोबल लेबल पर विमानों की मांग बढ़ने के बीच भारत को कम लागत वाली मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग टैलेंट का फायदा मिल रहा है। Boeing और Airbus पहले से भारत से हर साल करीब 1.4-1.6 अरब डॉलर की खरीदारी करते हैं। भारतीय कंपनियां ग्लोबल OEM और Tier-1 कंपनियों के लिए अलग-अलग पार्ट्स और इंजीनियरिंग सर्विसेज उपलब्ध करा रही हैं।
Jefferies की रिपोर्ट के मुताबिक- भारत की ग्रोथ अब सिर्फ पारंपरिक सेक्टरों तक सीमित नहीं है। स्पेस से लेकर चिप, डेटा सेंटर, सोलर और एयरोस्पेस तक नई इंडस्ट्री तेजी से डेवलप हो रही हैं। यानी आने वाले वर्षों में भारत के लिए यह बदलाव सिर्फ नई फैक्ट्रियां लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और ग्लोबल एक्सपोर्ट के नए रास्ते भी खोल सकता है।
Jefferies अमेरिका की एक बड़ी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग और कैपिटल मार्केट्स फर्म है। इसकी शुरुआत 1962 में हुई थी और इसका ग्लोबल हेडऑफिस न्यूयॉर्क में है। यह कंपनियों, निवेशकों और सरकारों को इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, वित्तीय सलाह, शेयर और बॉन्ड ट्रेडिंग, रिसर्च, वेल्थ मैनेजमेंट और कैपिटल जुटाने जैसी सर्विस देती है।
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