
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने ऐप आधारित ऑटो एग्रिगेटर्स ओला, उबर और रैपिडो के लिए 5 फीसदी कमीशन का प्रस्ताव हाईकोर्ट में रखा है। यह जीएसटी से अधिरिक्त होगा। कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने अस्थायी आदेश में ऑटो एग्रीगेटर्स के लिए 10 प्रतिशत तक कमीशन की अनुमति दी थी। कर्नाटक के परिवहन सचिव ने 25 नवंबर को कोर्ट में 5 प्रतिशत कमीशन का प्रस्ताव रखा।
परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार सरकार द्वारा कोर्ट में बताया गया है कि 5 प्रतिशत कमिशन की अनुमति दी जा सकती है। इस संबंध में अंतिम निर्णय हाईकोर्ट को लेना है। दरअसल, ऐप-आधारित ऑटो एग्रीगेटर्स ओला, उबर और रैपिडो के कमीशन फीस और लाइसेंस पर कई महीनों से बहस चल रही है। कमीशन में सुविधा शुल्क शामिल होता है। यह यात्रियों से उनके घर से पिक-अप करने के लिए लिया जाता है। इस मामले में अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।
करनी पड़ सकती है लागत में कटौती
इस संबंध में उबर की ओर से कहा गया है कि कमीशन पर टिकाऊ फैसला नहीं होता है तो कंपनी को लागत में कटौती करनी होगी। उबर ने कहा, "हमें अभी सरकार के प्रस्ताव को देखना है। कमीशन टिकाऊ होनी चाहिए। यदि हमारी लागत कमीशन के माध्यम से कवर नहीं की जा सकती है तो हमें लागत को कम करने के तरीके खोजने होंगे। इसका असर ड्राइवरों और यात्रियों पर पड़ सकता है।"
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इससे पहले सरकार ने एग्रीगेटर द्वारा लगाए गए कमीशन को 10 प्रतिशत पर रखने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट के अस्थायी आदेशों पर सहमति व्यक्त की थी। सरकार द्वारा ड्राइवरों, आम लोगों और उद्योग के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ कई बैठकें की गईं। कई स्टेकहोल्डर्स ने कहा कि कमिशन पूरी तरह से हटा देना चाहिए। राज्य को अपना ऐप लॉन्च करना चाहिए। 15 नवंबर को हुई पिछली बैठक के दौरान कर्नाटक के परिवहन आयुक्त एसएन सिद्धारमप्पा ने कहा था कि राज्य द्वारा एक नया राइड-हेलिंग ऐप विकसित करना समय लेने वाला और कठिन काम है। वहीं, उद्योग के सूत्रों ने कहा कि कमीशन 25 फीसदी से कम होने पर कारोबार संभव नहीं है।
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