
Adani Power Share : अडानी पावर ने शुक्रवार 1 अगस्त को बड़ा ऐलान करते हुए अपने निवेशकों को सरप्राइज दिया है। कंपनी के बोर्ड ने स्टॉक स्प्लिट को मंजूरी दे दी है। अब 10 रुपए का एक शेयर टूटकर 2 रुपए के 5 शेयरों में बदल जाएगा। कंपनी पहली बार स्टॉक स्प्लिट करने जा रही है। ऐसे में आइए जानते हैं निवेशकों को कितना फायदा होगा, स्टॉक स्प्लिट क्या होता है और कंपनी का तिमाही रिजल्ट कैसा रहा?
अडानी पावर का Q1FY26 (जून 2025) का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 3,305.13 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी तिमाही यानी Q1FY25 में यह मुनाफा 3,912.79 करोड़ था। इस तरह साल-दर-साल आधार पर कंपनी के प्रॉफिट में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, तिमाही दर तिमाही (QoQ) तुलना करें तो मार्च तिमाही (Q4FY25) के 2,599.23 करोड़ रुपए के मुकाबले 27% की ग्रोथ देखने को मिली है, जो एक पॉजिटिव संकेत है। कंपनी की कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू भी इस तिमाही में थोड़ी कमजोर दिखी। कंपनी का रेवेन्यू जून 2025 तिमाही में 14,109.15 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी अवधि (Q1FY25) में ₹14,955.63 करोड़ था। इस तरह सालाना आधार पर रेवेन्यू में 5.6% की गिरावट आई है।
कंपनी का कंसॉलिडेटेड EBITDA 5,744 करोड़ रुपए रहा, जो Q1FY25 में 6,290 करोड़ था। यानी सालाना गिरावट, लेकिन पिछली तिमाही से 12.7% की बढ़ोतरी। कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 17,550 MW हुई (Q1FY25 में 15,250 MW) यानी 15% का ग्रोथ है। लेकिन प्लांट लोड फैक्टर (PLF) घटकर 67% रह गया, जो पहले 78% था यानी ऑपरेशनल एफिशिएंसी में कमी आई है।
अडानी पावर के बोर्ड ने 1:5 के अनुपात में स्टॉक स्प्लिट को मंजूरी दी है। इसका मतलब 10 रुपए का एक शेयर अब टूटकर 2 रुपए के 5 शेयरों में बदल जाएगा। इससे शेयर की प्रति यूनिट कीमत कम होगी, जिससे रिटेल इनवेस्टर्स के लिए एंट्री आसान हो जाएगी। यह कंपनी की पहली स्टॉक स्प्लिट होगी। न कंपनी ने अब तक कोई बोनस दिया था, न ही कोई स्प्लिट किया था। हालांकि, अभी तक रिकॉर्ड डेट की घोषणा नहीं की गई है।
Q1FY26 रिजल्ट के बाद अडानी पावर के शेयर में दोपहर 1.30 बजे तक 1.56% की गिरावट आई और यह 578.95 रुपए पर ट्रेड करता देखा गया। 2025 YTD में 10% की बढ़त है, लेकिन पिछले 1 साल में 20% की गिरावट देखी गई है।
स्टॉक स्प्लिट एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कंपनी अपने मौजूदा शेयरों को एक तय अनुपात में बांटती है। इससे निवेशकों के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन उनकी कुल वैल्यू समान रहती है।
स्टॉक स्प्लिट का मुख्य उद्देश्य शेयर की कीमत को कम करके उसे रिटेल इनवेस्टर्स के लिए ज्यादा आसान बनाना होता है। इससे शेयर की लिक्विडिटी बढ़ती है और ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी इजाफा होता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी देने के लिए है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। किसी भी निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर या मार्केट एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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