
Delivery Boy Salary: भारत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शॉपिंग का बड़ा जरिया बन गए हैं। घर बैठे कभी कुछ भी ऑर्डर किया जा सकता है। सामान खरीदने के लिए न तो घर से बाहर जाना पड़ता है और न ही मोलभाव करना पड़ता है। यहां तक घर में ही डिलिवरी बॉय सामान दे जाते हैं। मोहल्ले में ऐसा नजारा हर रोज देखने को मिल जाता है लेकिन, क्या कभी सोचा है, जो लोग कंधे पर बड़ा-बड़ा बोझा उठाकर हर रोज पार्सल देने आते हैं, आखिर उनकी सैलरी कितनी होती है और वो एक दिन का कितना कमा लेते हैं? आज इस सवाल का जवाब हम आपको देंगे।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन से लेकर फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियां पॉलिसी के हिसाब से पेमेंट करती हैं। यदि कोई डिलिवरी बॉय के तौर पर काम करना चाहता है तो उसे शहर में मौजूद मैन ऑफिस में जाकर आवेदन देना होता है। दूसरे चरण में वेरिफिकेशन प्रोसेस और ट्रेनिंग के बाद कैंडिडेट को ग्राहकों तक पार्सल पहुंचाने की जिम्मेदारी मिलती है। कौन, कहां, किस इलाके में डिलिवरी करेगा, ये तय करना कंपनी का काम है। ज्यादातर फ्लेटफॉर्म में यही प्रक्रिया फॉलो की जाती है।
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आवेदन के बाद जो लोग सिलेक्ट होते हैं उनकी ट्रेनिंग होती है। जहां रूट, इलाकों, बिहेवियर, GPS और गूगल मैप का इस्तेमाल सिखाया जाता है। इतना ही नहीं इस दौरान पैकेज को उठाने रखने और टूटने से बचाने, ग्राहकों से बातचीत करने, शिकायतों को डील करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है।
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अब बात आती है सैलरी की आखिर एक डिलिवरी बॉय कितना कमा लेता है तो ये इलाके और उसके पार्सल पर निर्भर करता है। हर रोज एक डिलिवरी बाय लगभग 80 पार्सल डिलीवर करता है, हालांकि कई बार प्राइम लोकेशन होने के कारण ये पार्सल की संख्या बढ़ भी जाती है। कौन कितने पार्सल देगा, ये कंपनी तय करती है। एक डिलिवरी बॉय को बेसिक तौर पर पार्सल के 12 से 14 रुपए मिलते हैं। कुल मिलाकर सैलरी पार्सल डिलिवरी पर निर्भर करती है।
कई बार सामान उठाने-रखने में टूट जाता है। या फिर खो जाता है तो इसकी भरपाई कंपनी नहीं बल्कि डिलिवरी बॉय अपनी जेब से करता है। हालांकि अगर उन्हें लग रहा है कि सामान पहले से टूटा हुआ है तो वह पार्सल ग्राहक तक पहुंचाने से मना भी कर सकते हैं।
सैलरी के अलावा ज्यादातर कंपनियां डिलिवरी बॉय को एक्सीडेंट इंश्योरेंस और इंसेंटिव सुविधाएं भी प्रदान करती हैं।
एक डिलिवरी बॉय हर रोज 80 से 100 पार्सल डिलिवर करता है। ऐसे में उसकी सैलरी टोटल डिलिवर किए गए पार्सल संख्या पर आधारित होती है।
ये भी कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करता है। कई बार कंपनियां कमीशन और पैकेज के आधार पर पेमेंट करना पसंद करती हैं तो कई कंपनियां मासिक सैलरी देती हैं।
दोनों कंपनियों के अपने अलग नियम हैं, जिस वजह से सैलरी और सुविधाओं में फर्क देखने को मिल सकता है।
डिस्क्लेमर- यहां पर दी गई सभी जानकारी इंटरनेट से ली गई है। एशियानेट हिंदी इसका किसी भी प्रकार का दावा नहीं करता है। ज्यादा जानकारी के लिए कंपनियों की ऑफिशियल वेबसाइट चेक करें।
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