
दिल्ली : सेबी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच के खिलाफ एक बार फिर हिंडनबर्ग ने मोर्चा खोल दिया है। हिंडनबर्ग ने सवाल उठाया है कि क्या माधवी किसी भी जांच का सामना करने को तैयार हैं और क्या वह सिंगापुर की कंपनी के साथ लेनदेन करने वालों की जानकारी सार्वजनिक करेंगी। रिपोर्ट में लगाए गए कई आरोपों को माधवी के स्पष्टीकरण ने सही ठहराया है।
अडाणी से जुड़ी शेल कंपनियों में सेबी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच का निवेश था, यह दावा हिंडनबर्ग ने पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट में किया था। सेबी चेयरपर्सन को घेरने और अडाणी को फिर से सुर्खियों में लाने के लिए हिंडनबर्ग ने अपनी दूसरी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।
अडाणी समूह के खिलाफ सेबी की जांच चल ही रही है, ऐसे में समूह से जुड़ी शेल कंपनियों में सेबी चेयरपर्सन माधवी बुच और उनके पति के निवेश की खबर ने हंगामा मचा दिया है। शेल कंपनियों का पता लगाने में सेबी नाकाम रही, यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सेबी की आलोचना की थी। ऐसे में हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से यह साफ होता है कि सेबी चेयरपर्सन को शेल कंपनियों के बारे में जानकारी थी।
इन खुलासों के बाद कांग्रेस ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट सेबी चेयरपर्सन के खिलाफ हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान ले। राहुल गांधी ने सवाल किया कि जब कांग्रेस ने सभी लेनदेन की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के गठन की मांग की थी, तो सरकार ने ऐसा क्यों नहीं किया? राहुल गांधी ने कहा कि नए खुलासे से साफ हो गया है कि सरकार जेपीसी जांच से क्यों बच रही है।
सेबी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अडाणीी के खिलाफ सभी आरोपों की जांच की गई है और जल्द ही यह पूरी हो जाएगी। सेबी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच और अडाणी समूह ने भी आरोपों को खारिज किया है।
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