
पर्सनल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बिना किसी सिक्योरिटी या गारंटर के मिलने वाले लोन को पर्सनल लोन कहते हैं। सैलरीड और सेल्फ एम्प्लॉयड, दोनों तरह के लोग बैंक/ वित्तीय संस्थानों से बहुत जल्दी पर्सनल लोन प्राप्त कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, आभूषण, यात्रा, वाहन, शादी के खर्चों आदि के लिए लोग पर्सनल लोन पर निर्भर रहते हैं। वहीं कुछ लोग घर खरीदने या मरम्मत के लिए, अपनी ज़रूरत की रकम पूरी करने या डाउन पेमेंट के लिए भी पर्सनल लोन लेते हैं।
हालांकि, किसी भी लोन के मासिक किस्त की गणना लोन की राशि, अवधि, ब्याज दर जैसे कई कारकों के आधार पर की जाती है। आमतौर पर पर्सनल लोन पर अन्य लोन की तुलना में ब्याज दर ज़्यादा होती है। इसलिए, मासिक किस्त (EMI) की योजना सोच-समझकर बनानी चाहिए या मौजूदा पर्सनल लोन के EMI के बोझ को कम करने के लिए लोन से जुड़े कुछ पहलुओं पर विचार करना चाहिए। आइए जानते हैं, वे कौन से पहलू हैं।
>> अपनी ज़रूरतों के हिसाब से सही तरह के लोन का चुनाव करें। घर खरीदने और उसके सुधार के लिए होम लोन उपलब्ध हैं। होम इम्प्रूवमेंट लोन, इंटीरियर लोन जैसे नए तरह के हाउसिंग लोन और टॉप-अप लोन भी ग्राहकों की ज़रूरत के हिसाब से मिल सकते हैं। इनकी चुकौती अवधि ज़्यादा और ब्याज दर कम होने के कारण EMI का बोझ भी कम होता है।
>> वाहन से जुड़ी ज़रूरतों के लिए पर्सनल लोन की बजाय वाहन लोन लेने पर ज़्यादा ब्याज से बचा जा सकता है। पर्सनल लोन की तुलना में वाहन लोन की चुकौती अवधि ज़्यादा होती है, इसलिए मासिक किस्त की राशि भी कम हो जाती है। इसके अलावा, वाहन निर्माताओं के साथ मिलकर वित्तीय संस्थान अक्सर ग्राहकों को कम EMI या डिस्काउंट रेट की पेशकश करते हैं।
>> मौजूदा लोन को किसी दूसरे वित्तीय संस्थान में ट्रांसफर करके भी EMI के बोझ को कम किया जा सकता है, जो समान लोन पर कम मासिक किस्त या कम ब्याज दर की पेशकश करता हो।
>> अगर परिस्थिति अनुमति दे, तो मूल राशि में समय से पहले आंशिक भुगतान करने से भी EMI के बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।
>> लोन में सह-आवेदक को शामिल करने से भी ग्राहकों को ज़्यादा लोन राशि और बेहतर चुकौती शर्तें प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
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