
2047 तक, भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मना रहा होगा, उस समय भारत एक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) होना चाहिए, यह सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है। 2014 में पहली बार देश की कमान संभालने के बाद उन्होंने यही बात कही थी। तब भारत की अर्थव्यवस्था ११वें स्थान पर थी। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल के अंत में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में 11वें स्थान पर थी। इसे तीसरे स्थान पर लाना ही अपना लक्ष्य बताया था नरेंद्र मोदी ने। उनके दूसरे कार्यकाल में ही भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है। अब भारत का लक्ष्य जापान और जर्मनी है। फिलहाल ये दोनों क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। पहले दो स्थान पर काबिज़ अमेरिका और चीन की अर्थव्यवस्था भारत से कई गुना ज़्यादा है, ऐसे में उनके करीब पहुँचना फिलहाल असंभव है। इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने का वादा किया था।
अब वह समय आ गया है। यूपीए सरकार के समय 11वें स्थान पर रही अर्थव्यवस्था अब पाँचवें स्थान पर पहुँच गई है, और कुछ ही महीनों में जर्मनी की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुँचने का सपना साकार हो रहा है। औद्योगिक संस्था PHDCCI ने आज आंकड़ों के हवाले से बताया कि 2026 तक भारत की अर्थव्यवस्था जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। उसने अनुमान लगाया है कि मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में देश की जीडीपी 6.8% और 26 में 7.7% की वृद्धि दर हासिल करेगी। PHD वाणिज्य और उद्योग मंडल के अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में लगातार वृद्धि हो रही है, इसलिए 2026 तक जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है।
वैश्विक उतार-चढ़ाव और चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलेपन का प्रतीक बनकर उभरी है। दुनिया की कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ धीमी वृद्धि से जूझ रही हैं, वहीं भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है। कोविड के समय पूरी दुनिया हिल गई थी, दुनिया की अर्थव्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई थी, लेकिन उस भयानक स्थिति में भी भारत ने संतुलन बनाए रखा। रिपोर्ट में बताया गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियों से पार पाते हुए, कई योजनाएँ बनाकर यह कार्य संभव हुआ है।
रक्षा क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में भारत का आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाना इसका प्रमुख कारण है। विभिन्न क्षेत्रों में आयात की मात्रा कम करके निर्यात की मात्रा बढ़ाई गई है। मोबाइल फ़ोन सहित कई क्षेत्रों में, भारत अब उन वस्तुओं का निर्यात कर रहा है जो पहले अन्य देशों से आयात की जाती थीं। इन सब पृष्ठभूमि में भारत का सपना साकार होने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित भारत का सपना साकार होने के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था में तेज़ी आएगी।
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