
Train Lower Seat Rules : ट्रेन में सफर के दौरान महिलाओं के लिए लोअर बर्थ सबसे कंफर्टेबल होता है। इसमें उन्हें बार-बार उतरने-चढ़ने की झंझट नहीं होती और सफर भी अच्छे से कर पाती हैं। लेकिन हर बार रिजर्वेशन के दौरान उन्हें नीचे वाली सीट नहीं मिल पाती है। मिडिल और अपर सीट पर काफी परेशानी होती है। ऐसे में इस महिला दिवस (Mahila Diwas 2025) आइए जानते हैं वो जुगाड़, जिससे लोअर बर्थ मिलना आसान हो सकता है।
रेलवे के नियम के अनुसार, मेल और एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में सभी रिजर्वेशन कोच में सीनियर सीनियर सिटीजन और 45 साल से ज्यादा उम्र की महिला पैसेंजर या प्रेगनेंट वुमन के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। इन सभी के लिए स्लीपर क्लास के हर कोच में 7 लोअर बर्थ का कोटा होता है। एसी और सेकेंड एसी के हर कोच में चार-चार लोअर बर्थ का कोटा (Lower Berth Quota) होता है।
लोअर बर्थ को लेकर गरीब रथ एक्सप्रेस में अलग कोटा है। इस ट्रेन में थर्ड एसी कोच में महिलाओं के लिए 6 लोअर बर्थ का है। इसमें उम्र को लेकर किसी तरह का नियम नहीं है। इस कोटे पर सिर्फ महिला पैसेंजर ही सफर कर सकती हैं।
रेल मंत्रालय के अनुसार, ट्रेन में महिलाओं के लिए जो सीटों का कोटा होता है, पहला रिजर्वेशन चार्ट बनने तक सिर्फ महिलाएं या उनके ग्रुप के लिए ही रिजर्व होता है। पहले रिजर्वेशन चार्ट के बनने के बाद महिला कोटे के सीटों को पहले महिला वेटिंग पैसेंजर को दिया जाता है। इसके बाद भी अगर सीटें बच जाती है तो महिला कोटे की बर्थ सीनियर सिटीजन को दी जाती है। पहले चार्ट के बाद भी अगर महिलाओं के कोटे की सीटें बचती हैं तो उन्हें टिकट चेकिंग स्टाफ RAC कंफर्मम टिकट पर अन्य महिला या सीनियर सिटीजन को अलॉट कर सकते हैं। इसके लिए रिजर्वेशन चार्ट को ही प्रॉयरिटी देनी होती है।
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