Land Property Registration: संपत्ति का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें? कितनी फीस? कौन-से दस्तावेज जरूरी?

Published : Mar 07, 2025, 01:59 PM ISTUpdated : Mar 31, 2025, 12:40 PM IST
Land Property Registration

सार

Land property registration Guideline: हर एक शख्स के लिए अपनी संपत्ति का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। संपत्ति का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें? यदि आपने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो क्या होगा? 

Land property registration Process: संपत्ति किसी भी व्यक्ति द्वारा अपनी जिंदगी में किया जाने वाला सबसे कीमती इन्वेस्टमेंट है। हालांकि, सही रजिस्ट्रेशन के बिना संपत्ति के स्वामित्व को कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी जा सकती। इसीलिए हर किसी के लिए अपनी संपत्ति का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है और ये एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है। इससे न केवल संपत्ति का कानूनी स्वामित्व सुनिश्चित होता है, बल्कि संपत्ति से संबंधित किसी भी विवाद या मतभेद से भी बचाव होता है। संपत्ति रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन भी संभव है। इसके लिए क्या नियम हैं, कितनी फीस है, कानूनी ढांचा क्या है, कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स लगेंगे और किस तरह की चुनौतियां आएंगी, आइए जानते हैं।

भारत में संपत्ति रजिस्ट्रेशन से संबंधित कुछ कानून हैं, जिनमें भारतीय पंजीकरण अधिनियम-1908 और भारतीय स्टाम्प अधिनियम-1889 शामिल हैं। ये सुनिश्चित करते हैं कि संपत्ति पर स्वामित्व अधिकारों को दर्ज किया जाए और संरक्षित किया जाए। इसलिए, संपत्ति रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस, उससे जुड़ी लागत और कानूनी पहलुओं को समझना जरूरी है। इससे संपत्ति खरीदारों को भविष्य में विवादों और वित्तीय जोखिमों से बचने में मदद मिलती है।

संपत्ति रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है?

संपत्ति रजिस्ट्रेशन कानूनी स्वामित्व सुनिश्चित करने के साथ ही धोखाधड़ी से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा इससे कई तरह से आर्थिक लाभ भी मिलते हैं। संपत्ति रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी है, इसके कुछ महत्वपूर्ण कारण इस प्रकार हैं।

फायदेडिटेल्स
कानूनी स्वामित्वस्वामित्व अधिकार स्थापित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि संपत्ति कानूनी रूप से खरीदार की है।
धोखाधड़ी से सुरक्षाअवैध बिक्री, अतिक्रमण और दोहरे लेन-देन को रोकता है।
लोन और कस्टमर एलिजिबिलिटीहोम लोन के लिए संपत्ति को सुरक्षा के रूप में उपयोग करने की अनुमति देता है।
टैक्स बेनिफिटरजिस्टर्ड प्रॉपर्टी पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी और 24(बी) के तहत Tax कटौती की सुविधा मिलती है।
संपत्ति परिवर्तन यह सुनिश्चित करना कि भूमि अभिलेख नगरपालिका अधिकारियों के रिकार्ड में अपडेट हों।
विवाद समाधानरजिस्टर्ड सेल डीड स्वामित्व संबंधी विवादों के मामले में कानूनी साक्ष्य के रूप में काम करता है।

अगर आप अपनी संपत्ति रजिस्टर्ड नहीं कराते हैं तो क्या होगा?

1- स्वामित्व का कोई कानूनी प्रमाण नहीं है।

2- स्वामित्व विवाद का खतरा बढ़ जाता है।

3- आप होम लोन के लिए अपात्र हो जाएंगे।

4- रीसेल और ट्रांसफर का कानूनी रूप से सपोर्ट नहीं मिलेगा।

5- धोखाधड़ी के दावों का जोखिम बढ़ जाता है।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को कंट्रोल करने वाला कानूनी ढांचा

1) भारतीय पंजीकरण अधिनियम-1908

100 रुपये से ज्यादा की संपत्ति के लेनदेन का पंजीकरण अनिवार्य बनाता है।

कानूनी मान्यता प्रदान करता है और यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी अभिलेखों में सटीक स्वामित्व प्रतिबिंबित हो।

2) भारतीय स्टाम्प अधिनियम-1889

लेनदेन को वैध बनाने के लिए स्टाम्प शुल्क का भुगतान आवश्यक बनाता है।

स्टाम्प शुल्क की दरें राज्य और संपत्ति के प्रकार के आधार पर अलग-अलग होती हैं।

भारत में राज्यवार स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस

भारत में विभिन्न राज्यों में स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क अलग-अलग हैं। जिसका अपडेट ब्योरा इस प्रकार है।

राज्यस्टाम्प ड्यूटी (पुरुष)स्टाम्प ड्यूटी (महिलाएं)रजिस्ट्रेशन फीसक्या ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा उपलब्ध है
महाराष्ट्र5%4%1% (अधिकतम ₹30,000)हां
दिल्ली6%4%संपत्ति मूल्य का 1%हां
कर्नाटक5%5%संपत्ति मूल्य का 1%हां
तमिलनाडु7%7%संपत्ति मूल्य का 1%हां
उतार प्रदेश7%6%संपत्ति मूल्य का 1%हां
पश्चिम बंगाल6%6%संपत्ति मूल्य का 1%हां
गुजरात4.9%4.9%संपत्ति मूल्य का 1%नहीं
पंजाब6%4%संपत्ति मूल्य का 1%नहीं

नोट: कई राज्य महिला खरीदारों को स्टाम्प ड्यूटी में रियायत देते हैं, जिससे महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व को बढ़ावा मिलता है।

भारत में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइडलाइन

स्टेप-1: संपत्ति मूल्यांकन क्षेत्र के सर्कल रेट की जांच करें , न्यूनतम संपत्ति मूल्य निर्धारित करें। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का कैल्कुलेशन इस मूल्यांकन के आधार पर ही किया जाता है।

स्टेप-2: स्टाम्प पेपर खरीदें

गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर ऑनलाइन या अधिकृत विक्रेता से खरीदें।

स्टेप-3: सेल डीड बनवाएं

रजिस्टर्ड वकील सेल डीड तैयार करेगा, जिसमें लेनदेन के विवरण के बारे में जानकारी दी जाती है। विलेख पर दोनों पक्षों द्वारा दो गवाहों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए जाते हैं।

स्टेप-4: डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफिस में जाएं और सेल डीड, पहचान प्रमाण, टैक्स रिसीप्ट और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा करें। क्रेता और विक्रेता को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (फोटो और फिंगरप्रिंट) देना पड़ता है।

स्टेप-5: रजिस्ट्रेशन फीस का पेमेंट

लेनदेन को अंतिम रूप देने से पहले रजिस्ट्रेशन फीस भुगतान करना होगा।

स्टेप-6: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन

डिप्टी रजिस्ट्रार दस्तावेज़ों और पहचान का वेरिफिकेशन करने के बाद प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन करेगा।

स्टेप-7: रजिस्टर्ड डीड प्राप्त करें और लास्ट रजिस्टर्ड सेल डीड 7 से 15 दिनों के भीतर प्राप्त की जा सकती है।

भारत में ऑनलाइन प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन

प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए, कई राज्य अब आंशिक ऑनलाइन प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की पेशकश कर रहे हैं।

ऑनलाइन प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए क्या करें?

1- स्टेट प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जाएं।

2- लागू फीस निर्धारित करने के लिए स्टाम्प ड्यूटी कैलकुलेटर का उपयोग करें।

3- नेट बैंकिंग, UPI या क्रेडिट कार्ड के माध्यम से फीस का भुगतान करें।

4- डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफिस में फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए अपॉइंटमेंट फिक्स करें।

5- बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन एवं डॉक्यूमेंट से जुड़े काम पूरे करें।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने वाले राज्य: महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश

रजिस्ट्रेशन के दौरान होने वाली गलतियों को कैसे ठीक करें

गलतियांकैसे ठीक करें 
स्टाम्प ड्यूटी की गलत कैल्कुलेशनराज्य के ऑफिशियल ऑनलाइन स्टाम्प ड्यूटी कैलकुलेटर का उपयोग करें।
आधे-अधूरे डॉक्यूमेंट्स सुनिश्चित करें कि सभी आवश्यक कानूनी दस्तावेज पूर्ण एवं सटीक हों।
वेरिफिकेशन में देरीलंबे इंतजार से बचने के लिए पहले से ही अपॉइंटमेंट शेड्यूल कर लें।
बार-बार प्रमाण-पत्र की अनदेखीऑनरशिप डीड की जांच करें और सुनिश्चित करें कि संपत्ति के साथ कोई कानूनी विवाद नहीं है।

भारत में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े जरूरी सवाल

1) क्या प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है?

हां, भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 के अनुसार, कानूनी स्वामित्व सुनिश्चित करने और विवादों से बचने के लिए ₹100 से अधिक के सभी संपत्ति लेनदेन का पंजीकरण होना आवश्यक है।

2) किसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन कराने में कितना समय लगता है?

इस प्रक्रिया में आमतौर पर 7 से 15 दिन लगते हैं, जो रजिस्ट्रार ऑफिस के काम और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की स्पीड पर निर्भर करता है।

3) क्या मैं अपनी संपत्ति ऑनलाइन रजिस्टर्ड कर सकता हूं?

कुछ राज्य आंशिक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की परमिशन देते हैं, जहां आप निर्धारित फीस का भुगतान कर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट फिक्स कर सकते हैं। लेकिन डिप्टी रजिस्ट्रार ऑफिस में फिजिकल वेरिफिकेशन जरूरी है।

4) अगर मैं अपनी प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड नहीं कराऊं तो क्या होगा?

अगर प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड नहीं है, तो इससे कानूनी विवाद, स्वामित्व के प्रमाण का अभाव, लोन पाने में कठिनाइयां और कानूनी रूप से संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने में दिक्कत आएगी।

5) प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी हैं?

सेल डीड (स्वामित्व हस्तांतरण का प्रमाण), ऋण प्रमाणपत्र (पुष्टि करता है कि कोई कानूनी देनदारियां नहीं हैं), पहचान प्रमाण (आधार, पैन, आदि), संपत्ति कार्ड/म्यूटेशन डॉक्यूमेंट (ऑनरशिप हिस्ट्री), स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस की रसीदें (भुगतान का प्रमाण)

6) क्या महिला खरीदारों के लिए स्टाम्प शुल्क में कोई रियायत है?

हां, कई राज्य महिला खरीदारों को घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु कम स्टाम्प ड्यूटी रेट देते हैं। छूट राज्यों के हिसाब से अलग-अलग होती है।

7) क्या संपत्ति संयुक्त नाम से रजिस्टर्ड की जा सकती है?

हां, एक संपत्ति को एक से ज्यादा मालिकों के नाम पर रजिस्टर्ड किया जा सकता है, लेकिन रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस के दौरान सभी संयुक्त मालिकों का उपस्थित होना जरूरी है।

8) प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में देरी होने पर क्या सजा है?

प्रॉपर्टी खरीदने के चार महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है, तो इसके लिए जुर्माना देना पड़ सकता है। कुछ मामलों में लेनदेन अमान्य हो सकता है।

9) क्या कोई नाबालिग रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी का मालिक हो सकता है?

हां, नाबालिग संपत्ति का मालिक हो सकता है, लेकिन वयस्क होने तक इसका मैनेजमेंट लीगल गॉर्जियन द्वारा किया जाना चाहिए।

10) पात्रता प्रमाणपत्र (EC) क्या है और यह क्यों जरूरी है?

डेट लाइबिलिटी सर्टिफिकेट यह वेरिफाइ करता है कि प्रॉपर्टी पर कोई कानूनी बकाया या लोन नहीं है। यह लोन अप्रूवल और संपत्ति की सिक्योर्ड ऑनरशिप के लिए जरूरी है।

11) क्या संपत्ति का रजिस्ट्रेशन खरीदार की मौजूदगी के बिना किया जा सकता है?

हां, यदि क्रेता या विक्रेता रजिस्ट्रेशन के समय उपस्थित होने में असमर्थ हैं, तो उनके लीगल रिप्रेजेंटेटिव को पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) जारी किया जा सकता है।

12) प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में कितनी लागत आती है?

कुल लागत: स्टाम्प शुल्क (राज्य दर राज्य अलग-अलग होता है, आमतौर पर संपत्ति मूल्य का 4-7%)

रजिस्ट्रेशन फीस (संपत्ति मूल्य का 1%, कुछ राज्यों में अधिकतम)

कानूनी और दस्तावेज शुल्क (वकील की फीस, ड्राफ्टिंग फीस आदि)

13) क्या कृषि भूमि किसी व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड की जा सकती है?

हां, लेकिन कुछ राज्य गैर-किसानों को कृषि भूमि खरीदने से प्रतिबंधित करते हैं। राज्य-विशिष्ट भूमि कानूनों की जांच करें। 

14) रजिस्ट्रेशन से पहले संपत्ति की कानूनी स्थिति की जांच कैसे करें?

नीचे बताई गई चीजों की जांच करें:

भार प्रमाणपत्र (ईसी)

टाइटल डीड हिस्ट्री

नगरपालिका टैक्स रिकॉर्ड

RERA पंजीकरण (यदि लागू हो)

15) मूल मालिक की मृत्यु के बाद संपत्ति का स्वामित्व कैसे रिन्यू करें?

स्वामित्व विरासत को वसीयत या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के माध्यम से ट्रांसफर किया जा सकता है। दस्तावेजों का नामांतरण स्थानीय नगरपालिका कार्यालय में ही किया जाना चाहिए।

16) क्या रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी पर कोर्ट में विवाद हो सकता है?

हां, यदि धोखाधड़ी वाले दावे, अस्पष्ट टाइटल या कानूनी विवाद हों तो रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

17) प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में कौन सी सामान्य गलतियां नहीं करनी चाहिए?

गलत स्टाम्प ड्यूटी कैल्कुलेशन - रेट की जांच के लिए स्टेट पोर्टल का उपयोग करें।

मॉर्टगेज सर्टिफिकेशन - इंश्योर करें कि संपत्ति के साथ कोई कानूनी मुद्दे नहीं हैं।

वेरिफकेशन में देरी - पहले से अपॉइंटमेंट शेड्यूल करें।

अधूरे दस्तावेज - जमा करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों की दोबारा जांच कर लें।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है, जो स्वामित्व को सुरक्षित करने के साथ ही धोखाधड़ी को रोकती और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। इसकी प्रॉसेस, लागू शुल्क को समझने और ऑनलाइन टूल का उपयोग करने से खरीदारों को रजिस्ट्रेशन पूरा करने में मदद मिल सकती है।

सुझाव: धोखाधड़ी और कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड कराने से पहले हमेशा कानूनी विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

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