
बिजनेस डेस्क। दुनिया में जब भी लग्जरी कारों की बात होती है, तो जुबां पर सबसे पहले नाम आता है मर्सडीज। ये वो लग्जरी कार है, जिसे ड्राइव करना हर एक शख्स का सपना है। हालांकि, वर्ल्ड का मोस्ट लग्जीरियस ब्रैंड होने के नाते इसकी कीमत आम आदमी की पहुंच से बाहर है। वैसे, मर्सडीज कार के बारे में तो लोग जानते हैं, लेकिन इस कंपनी के नाम के पीछे आखिर क्या कहानी है, ये बात कम ही लोगों को पता होगी। जानते हैं, आखिर किसके नाम पर कंपनी ने इसका नाम Mercedes रखा।
20वीं सदी में जर्मनी के दो इंजीनियर गॉटलिब डेमलर और कार्ल बेंज ने एक ऑटोमोबाइल कंपनी खड़ी की, जिसका नाम रखा डेमलर-बेंज। बाद में इस कंपनी में ऑस्ट्रियन ऑटोमोबाइल कारोबारी एमिल जेलिनेक भी जुड़ गए। एमिल हमेशा से ही कार रेसिंग और हाईस्पीड कारों के शौकीन थे। इसी बीच मार्च, 1900 में महज 65 साल की उम्र में डेमलर की मौत हो गई, जिसके बाद एमिल ने 35 हॉर्सपावर की गाड़ियां डिजाइन करने में कंपनी की काफी मदद की।
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बाजार में आने के साथ ही 35 हॉर्सपावर वाली ये कार दुनिया की मॉर्डर्न गाड़ियों में शुमार हो गई। इसकी टॉप-स्पीड 80 किलोमीटर प्रतिघंटा थी। लेकिन एमिल जेलिनेक ने इसके बदले कंपनी के सामने शर्त रखी कि इस कार का नाम उनकी बेटी मर्सडीज के नाम पर रखा जाए। इसके पीछे उनका तर्क ये था कि इस नाम के रखने से कार के जर्मन होने का अहसास नहीं होता। इससे इस गाड़ी पर किसी खास देश का ब्रैंड होने का ठप्पा नहीं लगेगा और ये कार यूरोप के दूसरे देशों में भी आसानी से बिक सकेगी।
स्पेनिश शब्द Mercedes की उत्पत्ति लैटिन मूल से हुई है और ये मर्सीज से बना है, जिसका मतलब दया से है। बाद में इसी नाम से कार कंपनी का नाम 'मर्सडीज' पड़ गया। बाद में इस कंपनी के साथ इसके एक और संस्थापक कार्ल बेंज का नाम जोड़ दिया गया। इस तरह ये कंपनी मर्सडीज बेंज हो गई।
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