
बिजनेस डेस्क : फेस्टिव सीजन में जिधर देखो, उधर सेल लगी है। कस्टमर्स को ऑफर्स और डिस्काउंट भर-भरकर दिए जा रहे हैं। ज्यादातर शोरूम के बाहर 'No Cost EMI' का बोर्ड देखने को मिल रहा है। जिसे देख ज्यादातर लोगों का शॉपिंग का मन बन जाता है लेकिन क्या सचमुच नो कॉस्ट EMI फायदे का सौदा है, क्या इसमें जीरो ब्याज पर हर सामान मिल जाता है या फिर यह एक तरह का छलावा है, क्योंकि बाजार में मुफ्त तो कुछ भी नहीं मिलता है। आइए जानते हैं बाजार में चल रहे इस पूरे खेल के बारें में...
No Cost EMI का सच क्या है
नो कॉस्ट ईएमआई में कस्टमर्स को एक साथ पेमेंट किए बिना ही शॉपिंग की सुविधा मिलती है। ई-कॉमर्स साइट्स या स्टोर्स जो भी सामान आप खरीदते हैं, उसकी प्राइस पर कोई ब्याज न लेने का दावा करते हैं। बहुत से लोगों को लगता है कि नो कॉस्ट ईएमआई पर जीरो परसेंट का ब्याज होता है, लेकिन सच तो ये है कि ये कीमत डिस्काउंट न देकर, छिपे चार्ज और प्रोसेसिंग फीस के तौर पर ली जाती है।
नो कॉस्ट ईएमआई में फायदा या नुकसान
नो कॉस्ट ईएमआई सिर्फ कस्टमर्स को आकर्षित करने के लिए लाया जाता है। इसमें कई छिपे चार्ज (No Cost EMI Hidden Charges) होते हैं, जिनके बारें में ग्राहकों को नहीं बताया जाता है। खुद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी यह मान चुका है। आरबीआई के एक सर्कुलेशन में बताया कि कोई भी लोन ब्याज मुक्त नहीं होता है। आरबीआई का 2013 का सर्कुलर कहता है कि क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग्स पर जीरो परसेंट EMI स्कीम में ब्याज अक्सर प्रोसेसिंग फीस के तौर पर ली जाती है।
नो कॉस्ट EMI क्यों घाटे का सौदा
1. कोई डिस्काउंट नहीं
अगर आप नो कॉस्ट ईएमआई ऑप्शन चुनकर किसी प्रोडक्ट को खरीदते हैं तो इस पर मिल रही छूट की जानकारी कंपनी, स्टोर या ई-कॉमर्स साइट्स पर नहीं दी जाती है, मतलब इस पर किसी तरह का डिस्काउंट नहीं होता है।
2. प्रोडक्ट का हाई रेट
अक्सर स्टोर्स पर या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स किसी प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ा देते हैं, जिसकी वजह से कस्टमर्स को नो कॉस्ट ईएमआई का कोई फायदा नहीं मिलता है। मान लीजिए किसी प्रोडक्ट की कीमत 10,000 रुपए है तो नो कॉस्ट ईएमआई में यह बढ़कर 12,000 रुपए हो सकती है।
3. नो कॉस्ट EMI में हिडेन चार्ज
नो कॉस्ट EMI से सामान खरीदने पर बैंक या फाइनेंसिंग कंपनियां प्रोसेसिंग फीस वसूल लेती हैं, जो 99 रुपए से लेकर 300 रुपए तक हो सकती है। इसके अलावा नो कॉस्ट ईएमआई में ब्याज की रकम छूट के तौर पर दिखाया जाता है लेकिन इस पर 18% GST भी लगता है, जिससे कुल लागत बढ़ जाती है। अगर कोई कस्टमर पूरे पैसे पहले ही चुका देता है तो उसे प्री-क्लोजर फीस या प्री-पेमेंट पेनाल्टी भी देना पड़ सकता है। इसके अलावा समय पर पेमेंट न करने या लेट पेमेंट पर लेट पेमेंट चार्ज भी देना पड़ता है।
शॉपिंग कैसे करें
ज्यादातर मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह है कि हमेशा कैश में ही शॉपिंग करनी चाहिए। इससे आप कर्ज के जाल में फंसने से बच जाते हैं। नो-कॉस्ट EMI पर शॉपिंग करने के लिए आपके पास क्रेडिट कार्ड होना जरूरी है और क्रेडिट कार्ड पर कुछ भी फ्री में नहीं मिलता है, इसलिए इसके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।
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