
भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती की है। आरबीआई ने इसमें 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। इसके बाद अब मौजूदा रेपो रेट 6.25 फ़ीसदी हो गया है। इसके पहले यह दर 6.50 फीसदी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरबीआई के गवर्नर ने बताया है ति नई फसल आने के बाद महंगाई दर में कमी आ सकती है। वित्त वर्ष 2025 में महंगाई दर के 4.8% रहने का अनुमान है, और आगे इसमें और कमी आ सकती है।
रेपो रेट में कटौती के बाद लोगों को फायदा होने वाला है। इससे होम लोन एजुकेशन लोन, कॉरपोरेट लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में कमी आ सकती है। इससे ईएमआई का बोझ कम हो सकता है। अब ये बैंको पर भी निर्भर करता है कि वह अपने ग्राहकों को इसका लाभ उठाने का मौका देते हैं या नहीं।
इसके अलावा गवर्नर ने डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की और बताया कि RBI डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि डिजिटल फ्रॉड का बढ़ना चिंता का विषय है। आरबीआई डिजिटल सिक्योरिटी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को पैसा उधार देता है। जब RBI रेपो रेट में कटौती करता है, तो बैंकों के लिए लोन लेना सस्ता हो जाता है। ऐसे में रिजर्व बेंक जब लोगों को कम दर पर उधार देता है तो बैंक भी ग्राहकों को कम दर पर लोन देते हैं। इसका सीधा लाभ होम लोन, कार लोन, और पर्सनल लोन लेने वालों को मिलता है, क्योंकि उनकी ईएमआई कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त, बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ता है, जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं।
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