अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च का कामकाज बंद। कंपनी पर धोखाधड़ी की जांच और बाजार में हेरफेर के आरोपों के बीच यह फैसला आया है। क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी?
बिजनेस डेस्क। हिंडनबर्ग रिसर्च की दुकान बंद हो गई है। यह अमेरिका का एक शॉर्ट सेलर है। हिंडनबर्ग रिसर्च खुद को एक "फोरेंसिक वित्तीय अनुसंधान" इकाई बताता है।
हिंडनबर्ग रिसर्च की 9 खास बातें
स्थापना: हिंडनबर्ग रिसर्च की स्थापना 2017 में नाथन एंडरसन ने की थी। यह खोजी अनुसंधान और शॉर्ट-सेलिंग पर ध्यान केंद्रित करता है।
विशेषज्ञता: हिंडनबर्ग रिसर्च का दावा है कि वह विस्तृत विश्लेषण के माध्यम से सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनियों में धोखाधड़ी और गड़बड़ी को सामने लाता है।
बड़ी रिपोर्टें: हिंडेनबर्ग ने निकोला कॉरपोरेशन, लॉर्डस्टाउन मोटर्स और अडानी समूह जैसी कंपनियों को लेकर सनसनीखेज रिपोर्ट जारी किए थे। इससे इसे दुनिया भर में प्रसिद्धि मिली।
शोध का तरीका: हिंडेनबर्ग का दावा है कि वह कंपनी से जुड़े पब्लिक रिकॉर्ड, इंटरव्यू और वित्तीय विश्लेषण के जरिए जानकारी जुटाता है।
शेयरों पर प्रभाव: हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट से कई बार तहलका मचा है। इसने अक्सर शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट लाई है। इससे संबंधित कंपनी के खिलाफ नियामकों की जांच बढ़ जाती है।
पारदर्शिता: हिंडेनबर्ग अपने रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करता है। दावा है कि उसका उद्देश्य निवेशकों को सूचित करना और बाजार की अखंडता को बढ़ावा देना है।
विवाद: कंपनी को अपनी शॉर्ट-सेलिंग रणनीति के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है। इस पर बाजार में हेरफेर करने का आरोप लगा है।
निवेशक संबंध: हिंडेनबर्ग द्वारा टारगेट की गईं कंपनियां अक्सर रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का खंडन करती हैं। हालांकि अडानी समूह जैसे मामले में संबंधित कंपनी को शेयरों के दाम घटने से काफी नुकसान हो जाता है।
हिंडेनबर्ग का प्रभाव: हिंडेनबर्ग रिसर्च वित्तीय बाजारों में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहा है। यह निवेशकों की भावनाओं और नियामक कार्यों को प्रभावित करता रहा है।
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