
Businessmans Interesting Stories: महज 18 साल की उम्र में बिजनेस की दुनिया में कदम रखने वाले रामकृष्ण डालमिया ने अपने भाई जयदयाल डालमिया के साथ मिलकर डालमिया ग्रुप की नींव रखी थी। 1933 में एक चीनी मिल से शुरुआत करने वाले डालमिया का किस्मत ने खूब साथ दिया और देखते ही देखते वो देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शुमार हो गए। रामकृष्ण डालमिया एक समय जमशेदजी टाटा और घनश्याम दास बिड़ला के बाद देश के तीसरे सबसे बड़े उद्योगपति और अमीर शख्स थे। कहते हैं रामकृष्ण डालमिया बिना किसी हायर एजुकेशन के एक सफल उद्योगपति बने। जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।
रामकृष्ण डालमिया का जन्म राजस्थान के झुंझनू जिले के चिड़ावा नामक कस्बे में एक गरीब अग्रवाल परिवार में हुआ था। यहीं उन्होंने मामूली शिक्षा हासिल की और थोड़ी-बहुत गणित, अंग्रेजी और महाजनी शिक्षा का ज्ञान लिया। 18 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उनके ऊपर घर की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी। डालमिया की पहली शादी कम उम्र में नर्मदा से हो गई थी। लेकिन कुछ सालों में ही पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद मां ने उनकी दूसरी शादी दुर्गा से कर दी। रामकृष्ण डालमिया की बेटी नीलिमा डालमिया अधर ने अपनी किताब ‘फादर डियरेस्टः द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ आर के डालमिया’ में उनकी शादियों और रोमांस का जिक्र किया है।
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दूसरी बीवी के होते हुए भी डालमिया पंजाबी लड़की प्रीतम को दिल दे बैठे। दोनों ने चोरी-छुपे शादी रचा ली। जब ये बात दूसरी पत्नी और परिवार को पता चली तो लोगों ने नाराजगी जताई। डालमिया ने अपनी तीसरी पत्नी को दिल्ली में ही घर लेकर वहां शिफ्ट कर दिया। इसके कुछ सालों बाद उन्होंने दो और शादियां कीं, जिनके नाम सरस्वती और आशा थे। ये दोनों शादियां भी उन्होंने सीक्रेट तरीके से की।
इसी बीच, डालमिया ग्रुप के एक अवॉर्ड फंक्शन के दौरान रामकृष्ण डालमिया को राजस्थान की एक कवियत्रि दिनेश नंदिनी पसंद आ गईं। दो साल तक दोनों के बीच बातचीत और मेल-मुलाकात होती रही। काफी मान-मनौव्वल के बाद दिनेश नंदिनी मान तो गईं लेकिन उन्होंने एक शर्त रखते हुए कहा कि इसके बाद डालमियां अब और शादियां नहीं करेंगे। बता दें कि नीलिमा दिनेश नंदिनी की ही बेटी हैं।
रामकृष्ण डालमिया के संबंध नेहरू के साथ ही मोहम्मद अली जिन्ना से भी अच्छे थे। जिन्ना के घर उनका अक्सर आना-जाना था। नीलिमा बताती हैं कि उनकी मां दिनेश नंदिनी कहती थीं कि तुम्हारे पिता के संबंध जिन्ना की बहन फातिमा के साथ भी थे। कहते हैं कि बंटवारे के बाद 1947 में जब जिन्ना पाकिस्तान गए तो दिल्ली का कलाम रोड वाला बंगला डालमिया को देकर गए थे। हालांकि, बाद में डालमिया और नेहरू के संबंधों में खटास आ गई थी।
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