
Ultramarine Blue Price: इतिहास में रंग सिर्फ़ रंग नहीं होते, बल्कि वे ताकत, विश्वास और रुतबे की पहचान भी रहे हैं। रंगों की इस दुनिया में एक ऐसा VIP भी है, जिसकी कीमत हमारी सोच से भी कहीं ज़्यादा है। इस रंग का नाम है अल्ट्रामरीन ब्लू। आपको जानकर हैरानी होगी कि आज बाज़ार में एक ग्राम शुद्ध अल्ट्रामरीन ब्लू की कीमत 80,000 रुपये से भी ज़्यादा है। यह रंग अफ़ग़ानिस्तान की खानों से निकलने वाले 'लापिस लाजुली' नाम के एक बेहद दुर्लभ रत्न से तैयार किया जाता है।
दुनिया की सबसे पुरानी लापिस लाजुली की खानें अफ़ग़ानिस्तान के बदख़्शान प्रांत में हैं। यह पत्थर गहरे नीले रंग का होता है, जिस पर सोने के कण बिखरे होते हैं, जो तारों से भरे रात के आसमान की याद दिलाता है। पाँच हज़ार साल से भी पहले, इस पत्थर को प्राचीन मिस्र और मेसोपोटामिया में एक्सपोर्ट किया जाता था। मिस्र के फ़राओ (राजाओं) के गहनों और शासकों की मुहरों में इस 'नीले सोने' का अहम रोल था।
माना जाता है कि 'अल्ट्रामरीन' नाम लैटिन शब्द 'अल्ट्रामरीनस' से आया है, जिसका मतलब है 'समुद्र के पार से आने वाला'। यह रंग एशिया से समुद्र पार करके यूरोप पहुँचता था और मध्यकाल में तो यह सोने से भी ज़्यादा कीमती था। लियोनार्डो दा विंची, माइकलएंजेलो और वरमीर जैसे पुनर्जागरण काल के महान चित्रकारों ने अपनी मास्टरपीस पेंटिंग्स में इस रंग का इस्तेमाल किया। उस दौर में वर्जिन मैरी (मरियम) के कपड़ों को रंगने के लिए सिर्फ़ अल्ट्रामरीन ब्लू का ही इस्तेमाल होता था। इसकी बेतहाशा कीमत की वजह से, पेंटर इस रंग को इस्तेमाल करने के लिए राजाओं और दूसरे स्पॉन्सर्स से अलग से पैसे लेते थे।
लापिस लाजुली पत्थर को पीसकर, उसमें से गंदगी हटाकर शुद्ध रंग निकालना बेहद मुश्किल काम है। इसे मोम, गोंद और तेल के साथ मिलाकर एक पेस्ट बनाया जाता है और फिर उसे कई बार धोकर यह नीला रंग अलग किया जाता है। यही कड़ी मेहनत और इस पत्थर का दुर्लभ होना, इसे आज भी दुनिया का सबसे कीमती रंग बनाए हुए है।
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