Personal Loan vs Credit Card EMI: कौन दिखता सस्ता, लेकिन पड़ता महंगा है?

Published : Feb 25, 2026, 12:27 PM IST

Personal Loan vs Credit Card: मेडिकल बिल, नया गैजेट्स, शादी खर्च या इमरजेंसी में दिमाग में दो ऑप्शन पहले आते हैं। पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड EMI में कंवर्ट। दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन एक ज्यादा महंगा पड़ता है।जानिए कौन चुपचाप ज्यादा पैसा खाता है 

PREV
15

इंट्रेस्ट रेट की गणित

आज के समय में पर्सनल लोन की ब्याज दरें काफी हद तक आपके क्रेडिट स्कोर और प्रोफाइल पर डिपेंड करती हैं। अगर आपकी जॉब परमानेंट है और CIBIL स्कोर अच्छा है, तो आपको कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है। हालांकि कमजोर प्रोफाइल होने पर यह रेट तेजी से बढ़ सकती है। फिर भी आमतौर पर यह क्रेडिट कार्ड EMI की तुलना में कम ही रहती है। वहीं, क्रेडिट कार्ड EMI अक्सर महंगी साबित होती है, भले ही शुरुआत में ऐसा न लगे, लेकिन धीरे-धीरे ये आपका बजट बिगाड़ सकती है। कई बैंक 'नो-कॉस्ट EMI' की भी सुविधा देते हैं, लेकिन जब उसकी एनुअल ब्याज निकाली जाती है, तो यह अक्सर 18 से 24 परसेंट या उससे भी ज्यादा तक बैठती है।

25

'No-Cost EMI' का सच

नो-कॉस्ट EMI सुनने में भले ही अच्छा लगने वाला शब्द है, लेकिन असल में कई मामलों में यह सिर्फ एक मार्केटिंग स्ट्रैटजी होती है। अक्सर जो डिस्काउंट आपको कैश पेमेंट पर मिल सकता था, वह EMI ऑप्शन लेने पर हटा दिया जाता है। इस तरह आप ब्याज नहीं दे रहे होते, बल्कि छूट छोड़ रहे होते हैं। इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड EMI पर प्रोसेसिंग फीस और उस पर लगने वाला GST भी जुड़ जाता है। यह रकम आपकी मूल राशि को कम नहीं करती, लेकिन आपकी कुल लागत बढ़ा देती है। पर्सनल लोन में भी प्रोसेसिंग फीस होती है, लेकिन वह आमतौर पर साफ बताई जाती है और तुलना करते समय उसे जोड़कर देखा जा सकता है।

35

मंथली फ्लैक्सिबिलिटी पर असर

पर्सनल लोन की EMI आपके क्रेडिट कार्ड से अलग होती है। इसका मतलब यह है कि आपका कार्ड लिमिट सेफ रहता है और इमरजेंसी में आप उसे यूज कर सकते हैं। EMI तय रहती है और आपकी रोजमर्रा के खर्चों पर सीधा असर नहीं डालती। इसके उलट जब आप क्रेडिट कार्ड बिल को EMI में बदलते हैं, तो वह आपकी उपलब्ध क्रेडिट लिमिट को कम कर देता है। अगर आपकी लिमिट पहले से ज्यादा नहीं है, तो यह आपकी क्रेडिट यूज रेट बढ़ा सकता है, जिसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ सकता है और अगर किसी महीने पेमेंट में देरी हो जाए, तो लेट फीस और बढ़ा हुआ ब्याज पूरे बकाया पर लागू हो सकता है, जिससे कॉस्ट और बढ़ जाती है।

45

ड्यूरेशन और कंट्रोल का अंतर

पर्सनल लोन आमतौर पर लॉन्ग टर्म के लिए उपलब्ध होते हैं, जो कई बार 5 साल तक जा सकते हैं। लॉन्ग टर्म का मतलब कम मंथली EMI, जिससे बड़े खर्च को संभालना आसान हो जाता है। क्रेडिट कार्ड EMI की ड्यूरेशन आमतौर पर छोटी 6 से 24 महीने तक होती है। शॉर्ट टर्म का मतलब हर महीने ज्यादा किस्त है। ऊपर से अगर आप बीच में EMI बंद करना चाहें, तो कई बार 'नो-कॉस्ट' का फायदा खत्म हो जाता है या एक्स्ट्रा चार्ज लग सकते हैं। पर्सनल लोन में आंशिक प्रीपेमेंट का ऑप्शन कई मामलों में ज्यादा फ्लैक्सिबल होता है।

55

किसमें कम खर्च होता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर खर्च बड़ा है और किसी खास मर्चेंट ऑफर से जुड़ा नहीं है, तो लॉन्ग टर्म में पर्सनल लोन अक्सर सस्ता पड़ता है। क्रेडिट कार्ड EMI उन मामलों में सही हो सकती है, जहां टर्म छोटा हो, ऑफर पारदर्शी हो और कुल कॉस्ट साफ तरह से समझ में आ रही हो। सबसे बड़ी गलती सुविधा देखकर फैसला लेना है। क्रेडिट कार्ड EMI तुरंत और आसान लगती है, लेकिन कई बार यह धीरे-धीरे आपकी जेब से ज्यादा पैसा निकाल लेती है। पर्सनल लोन में थोड़ा ज्यादा प्रॉसेस हो सकता है, लेकिन कई कंडीशन में यह आपकी बचत को बेहतर तरीके से सेफ रखता है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। इसमें दी गई ब्याज दरें, चार्जेज और शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं और अलग-अलग बैंक या वित्तीय संस्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। किसी भी तरह का पर्सनल लोन लेने या क्रेडिट कार्ड EMI में कन्वर्ट करने से पहले संबंधित बैंक से पूरी जानकारी जरूर चेक कर लें।

अर्थव्यवस्था, बजट, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शेयर मार्केट अपडेट्स के लिए Business News in Hindi पढ़ें। निवेश सलाह, बैंकिंग अपडेट्स और गोल्ड-सिल्वर रेट्स समेत पर्सनल फाइनेंस की जानकारी Money News in Hindi सेक्शन में पाएं। वित्तीय दुनिया की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी — Asianet News Hindi पर।

Read more Photos on

Recommended Stories