
Petrol Pump Meter Scam: क्या आप भी उन लोगों में से हैं, जो पेट्रोल पंप पर जाकर आराम से कार की सीट पर बैठे रहते हैं, ऑनलाइन पेमेंट करते हैं और तेल डलवाकर आगे बढ़ जाते हैं? अगर हां, तो अपनी इस आदत को आज से ही बदल लीजिए। आपकी यही 'आरामपसंद' आदत हर महीने आपकी जेब को हजारों रुपए का चूना लगा रही है। अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ जीरो (0) देख लिया, तो पेट्रोल पूरा ही मिलेगा, लेकिन खेल सिर्फ जीरो का नहीं है, खेल उस मीटर के पीछे छिपे रीसेट मैकेनिज्म, नोजल लॉक और डेंसिटी (Density) का है, जिसे आप गाड़ी के अंदर बैठकर कभी नहीं पकड़ सकते। आइए जानते हैं पेट्रोल पंप के उस 'हिडन खेल' के बारे में जिसे जानने के बाद आप अगली बार गाड़ी से उतरे बिना तेल नहीं डलवाएंगे...
जब आप कार के अंदर बैठे होते हैं, तो आपको पेट्रोल मशीन की स्क्रीन पूरी तरह और साफ-साफ नहीं दिखती। कई बार पेट्रोल कर्मी ज़ीरो तो दिखाता है, लेकिन जैसे ही नोजल गाड़ी में डालता है, मीटर सीधा ₹0 से ₹50 या ₹80 पर 'जंप' कर जाता है। इसे 'जंपिंग मीटर स्कैम' कहते हैं। अगर आप बाहर खड़े हैं, तो आपकी नज़र लगातार स्क्रीन पर होगी और कोई भी आपके सामने मीटर जंप कराने की हिम्मत नहीं करेगा। कार के अंदर बैठकर आप सिर्फ अंतिम अमाउंट देखते हैं, बीच का खेल नहीं।
यह पेट्रोल पंपों पर होने वाली सबसे आम तरकीबों में से एक है। पेट्रोल नोजल (जिस पाइप से तेल निकलता है) में एक ऑटो-कट बटन और फ्लो-रेट लॉक होता है। नियम कहता है कि पेट्रोल कर्मी को नोजल आपकी गाड़ी की टंकी में डालकर लॉक कर देना चाहिए, ताकि तेल एक तय स्पीड (फ्लो) से लगातार गिरे। कई बार कर्मी नोजल के हैंडल को हाथ से बार-बार दबाते और छोड़ते रहते हैं। ऐसा करने से तेल का प्रेशर बार-बार रुकता है। मीटर तो तेजी से भागता है, लेकिन पाइप के अंदर हवा का दबाव बढ़ने से आपकी गाड़ी में तेल कम और हवा ज्यादा जाती है। जब आप बाहर खड़े होकर उनके हाथ पर नज़र रखेंगे, तो वो ऐसा नहीं कर पाएंगे।
'सर, कार्ड से पेमेंट करेंगे या UPI?' 'सर, गाड़ी का ऑयल चेक कर दूं?' जैसे ही आप गाड़ी का शीशा नीचे करते हैं, एक अटेंडेंट आपसे बातें करने लगता है या आपका ध्यान भटकाता है। ठीक उसी सेकेंड, दूसरा अटेंडेंट पिछले किसी कूपन या आधी रुकी हुई रीडिंग (जैसे ₹200) से ही आपकी गाड़ी में तेल डालना शुरू कर देता है और उसे ₹1000 पर रोक देता है। आपको लगता है ₹1000 का तेल आ गया, जबकि आया सिर्फ ₹800 का। गाड़ी से नीचे उतरकर जब आप सीधे मशीन के पास खड़े होते हैं, तो कोई आपका ध्यान भटका नहीं पाता है।
आजकल ज्यादातर लोग UPI या QR कोड से पेमेंट करते हैं। कई बार कार में बैठे-बैठे आप अंदर से ही बारकोड स्कैन करने की कोशिश करते हैं या फोन बढ़ा देते हैं। इस चक्कर में आपका पूरा ध्यान मोबाइल स्क्रीन पर चला जाता है, न कि पेट्रोल मीटर पर। जब आप गाड़ी से नीचे उतरते हैं, तो आप पहले मीटर पर '0' देखते हैं, फिर तेल डलवाते हैं, और उसके बाद तसल्ली से पेमेंट काउंटर पर जाकर स्कैन करते हैं। यह सिंपल सी आदत आपको किसी भी किस्म के मैन्युअल फ्रॉड से बचा लेती है।
मशीन पर सिर्फ पैसे और लीटर ही नहीं लिखे होते, बल्कि एक छोटा सा कॉलम घनत्व (Density) का होता है। पेट्रोल की शुद्धता इसी से मापी जाती है। गाड़ी से उतरकर मशीन के पास जाएं और देखें कि क्या डेंसिटी सही है? पेट्रोल की सही डेंसिटी 720 से 775 kg/m³ के बीच होनी चाहिए। डीजल की सही डेंसिटी 820 से 860 kg/m³ के बीच होनी चाहिए। अगर यह नंबर इस रेंज से बाहर है, तो समझ लीजिए तेल में मिलावट है या मीटर के साथ छेड़छाड़ की गई है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और उपभोक्ता जागरूकता (Consumer Awareness) के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका मकसद किसी विशेष पेट्रोल पंप, ब्रांड या कर्मचारियों की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं है। देश के अधिकांश पेट्रोल पंप पूरी ईमानदारी और सरकारी मानकों (Government Norms) के तहत काम करते हैं। गाड़ी के माइलेज, सुरक्षा और सही रीफ्यूलिंग के लिए सतर्कता बरतना हमेशा एक समझदार उपभोक्ता की ज़िम्मेदारी होती है।
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