NSE vs BSE: क्या आप भी BSE और NSE का नाम सुनकर कंफ्यूज होते हैं? जानिए बॉम्बे और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बीच का असली अंतर क्या है, दोनों किस काम आते हैं?

Share Market Basics: शेयर बाजार की न्यूज आप भी दिनभर सुनते रहते हैं? क्या आप जानते हैं कि NSE और BSE क्या होते हैं और दोनों में क्या अंतर हैं? क्या दोनों एक ही काम करते हैं? अगर किसी शेयर को NSE पर खरीदा जाए तो क्या उसे BSE पर नहीं खरीदा जा सकता है? अगर आपको भी इन सवालों का जवाब नहीं पता, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। आइए बिल्कुल आसान तरह से जानते हैं NSE और BSE क्या हैं, दोनों में क्या फर्क है और निवेशक के लिए कौन-सा बेहतर है...

NSE और BSE क्या हैं?

NSE का पूरा नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange of India Limited) है। वहीं BSE का पुराना नाम बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange) था, जो अब BSE Limited हो गया है। दोनों भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं। ये ऐसी जगह हैं जहां शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए एक संगठित और इलेक्ट्रॉनिक बाजार मिलता है। जब आप अपने मोबाइल में किसी कंपनी का शेयर खरीदने या बेचने का ऑर्डर लगाते हैं, तो आपका ब्रोकर उस ऑर्डर को संबंधित एक्सचेंज तक पहुंचाता है। वहां खरीदार और बेचने वाले के ऑर्डर मैच होने पर ट्रेड पूरा होता है। यानी NSE और BSE को आप शेयर बाजार के दो बड़े प्लेटफॉर्म की तरह समझ सकते हैं।

NSE-BSE को सिंपल तरीके से कैसे समझें?

एनएसई और बीएसई को एक सिंपल उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपको घर के लिए ताजी सब्जियां खरीदनी हैं। आपके शहर में दो बड़ी सब्जी मंडियां हैं। दोनों में लगभग एक ही जैसी सब्जियां (यानी कंपनियों के शेयर) मिलती हैं, रेट भी लगभग एक ही होता है। बस फर्क इतना है कि एक मंडी बहुत पुरानी और भरोसेमंद है और दूसरी मंडी नई है, लेकिन वहां काम बहुत फास्ट और डिजिटल तरीके से होता है। शेयर बाजार भी बिल्कुल ऐसा ही है। यहां सब्जियां नहीं, कंपनियों के हिस्से (Shares) खरीदे और बेचे जाते हैं।

BSE क्या है?

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज हमारे देश की सबसे पुरानी 'शेयर मंडी' है। समझ लीजिए कि यह एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है, जो 1875 में शुरू हुआ था। BSE का मूड चेक करने के लिए जो मीटर होता है, उसे Sensex (सेंसेक्स) कहते हैं। इसमें देश की टॉप 30 बड़ी कंपनियों का हाल देखकर पूरे बाजार का अंदाजा लगाया जाता है। यहां 5000 से भी ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं यानी अपनी हिस्सेदारी बेचती हैं।

NSE क्या है?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज शेयर बाजार की नई और एकदम हाई-टेक 'मंडी' है, जो 1992 में शुरू हुई थी। जब शेयर बाजार में पेपर वाले शेयरों की जगह कंप्यूटर से ट्रेडिंग शुरू हुई, तब NSE ने ही गेम बदला था। NSE का मीटर निफ्टी (Nifty 50) कहलाता है। इसमें अलग-अलग सेक्टर की टॉप 50 कंपनियों का हाल देखा जाता है। यहां करीब 2000 से ज्यादा कंपनियां हैं, लेकिन सबसे ज्यादा लोग रोज यहीं से शेयर खरीदते-बेचते हैं क्योंकि इसका सिस्टम बहुत फास्ट है।

क्या एक ही शेयर NSE और BSE दोनों पर मिल सकता है?

हां, कई कंपनियों के शेयर NSE और BSE दोनों पर लिस्टेड होते हैं। उदाहरण के लिए किसी बड़ी कंपनी के शेयर को देखें तो वह दोनों एक्सचेंज पर उपलब्ध हो सकता है। ऐसे में आपके ट्रेडिंग ऐप में NSE और BSE दोनों के भाव दिखाई दे सकते हैं। लेकिन दोनों जगह शेयर की कीमत में मामूली अंतर नजर आ सकता है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि दोनों एक्सचेंज पर उस समय खरीदने और बेचने वाले ऑर्डर की स्थिति अलग होती है। आमतौर पर यह अंतर बहुत बड़ा नहीं होता और बाजार की गतिविधियों के साथ बदलता रहता है।

फिर शेयर खरीदते समय NSE चुनें या BSE?

अगर वही शेयर दोनों एक्सचेंज पर उपलब्ध है, तो आम छोटे निवेशक के लिए सिर्फ NSE या सिर्फ BSE को चुनना अपने आप में कोई फायदा नहीं देता है। असल चीज है शेयर की लिक्विडिटी, बिड आस्क स्प्रेड (Bid-ask Spread), आपके ब्रोकर की सुविधा और आपके ट्रेड का प्रकार। लिक्विडिटी (Liquidity) का मतलब किसी शेयर में खरीदने और बेचने वाले कितने सक्रिय हैं। ज्यादा लिक्विडिटी होने पर आमतौर पर ऑर्डर को उचित कीमत पर पूरा करना आसान हो सकता है। इसलिए सिर्फ यह देखकर शेयर न खरीदें कि NSE है या BSE।

क्या NSE पर शेयर खरीदने से ज्यादा कमाई होती है?

नहीं। यह एक आम गलतफहमी है कि NSE पर खरीदा गया शेयर ज्यादा रिटर्न देगा और BSE पर खरीदा शेयर कम देगा। शेयर की कमाई इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपने उसे NSE से खरीदा या BSE से। आपका रिटर्न शेयर की कीमत में बदलाव, डिविडेंड और दूसरे संबंधित फैक्टर्स पर निर्भर करता है। एक ही कंपनी का शेयर अगर दोनों एक्सचेंज पर ट्रेड हो रहा है, तो दोनों जगह उसकी कीमत आम तौर पर एक-दूसरे के काफी करीब रहती है।

NSE और BSE में कौन बड़ा है?

अगर ट्रेडिंग एक्टिविटी और कैश मार्केट में कारोबार की बात करें, तो NSE का बाजार हिस्सा लंबे समय से काफी बड़ा रहा है। वहीं BSE का भी भारतीय कैपिटल मार्केट में अहम स्थान है और इसका ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा है। इसलिए 'कौन बेहतर है' का जवाब सिर्फ एक नाम से देना सही नहीं होगा। NSE की पहचान ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम और निफ्टी से है, जबकि BSE की सबसे बड़ी पहचान उसका लंबा इतिहास और सेंसेक्स है।

क्या BSE सिर्फ पुराने शेयरों के लिए है?

बिल्कुल नहीं। यह भी एक गलतफहमी है कि BSE पर सिर्फ पुरानी कंपनियों के शेयर होते हैं। BSE पर भी अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां लिस्टेड और ट्रेड होती हैं। निवेशक अपने ब्रोकर के जरिए उपलब्ध शेयरों को खरीद और बेच सकते हैं। इसी तरह NSE भी सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपनी रिसर्च करें और सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह जरूर लें।