35 साल की उम्र तक भी निवेश शुरू न करने वालों को एक्सपर्ट ने चेताया है। इसके क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं और क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं।

Retirement Planning: भारत के टॉप इन्वेस्टमेंट मैनेजरों में शामिल मिरे एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के वाइस चेयरमैन और CEO स्वरूप मोहंती ने उन लोगों को कड़ी चेतावनी दी है, जिन्होंने 35 साल की उम्र तक निवेश शुरू नहीं किया है। उन्होंने कहा कि एक समय के बाद आपकी सैलरी बंद हो जाएगी, लेकिन मेडिकल बिल और रोजमर्रा की जरूरतें खत्म नहीं होंगी। ऐसे में अगर समय रहते पर्याप्त पैसा नहीं जुटाया गया तो जिंदगी के आखिरी साल आर्थिक परेशानियों में गुजर सकते हैं।

35 की उम्र में समझें एक्टिव इनकम की हकीकत

  • स्वरूप मोहंती ने फिनोवेट (Finnovate) के एक पॉडकास्ट में कहा कि नौकरीपेशा लोगों को यह समझना चाहिए कि वे एक्टिव इनकम बंद होने के बाद भी कई दशकों तक जीवित रह सकते हैं।
  • उन्होंने कहा, “35 साल की उम्र में किसी को यह एहसास होना चाहिए कि वह बहुत लंबी जिंदगी जीने वाला है। किसी न किसी मोड़ पर सैलरी पाने वाले व्यक्ति के लिए जिसे हम एक्टिव इनकम कहते हैं, वह बंद हो जाएगी। तब आपको अपनी बाकी जिंदगी इस आधार पर जीनी होगी कि आपके पास कितना पैसा है।
  • ”मोहंती ने उन लोगों के लिए भविष्य को बहुत ही डरावनी स्थिति बताया, जिन्होंने अभी तक निवेश शुरू नहीं किया है। उन्होंने कहा, "उस समय, आपका एकमात्र दोस्त पैसा होगा। आप जो कुछ भी करना चाहेंगे, वह पैसे पर निर्भर करेगा। अगर आप 35 साल की उम्र में यह नहीं समझते हैं, तो आप पहले ही अपना बहुत नुकसान कर चुके हैं।"

देर से निवेश करने पर कंपाउंडिंग का भारी नुकसान

  • मोहंती ने समझाया कि निवेश में देरी करने की कीमत काफी बड़ी हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह कंपाउंडिंग के कई सालों का नुकसान है।
  • उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति 10 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखता है और 20 साल की उम्र से निवेश शुरू करता है, तो 12 फीसदी रिटर्न की दर मानते हुए उसे हर महीने लगभग 10,000 से 20,000 रुपये निवेश करने पड़ सकते हैं।
  • वहीं, अगर वही व्यक्ति 40 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है तो लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उसे हर महीने करीब 2 लाख रुपये या उसके आसपास निवेश करना पड़ सकता है।

मेडिकल इंश्योरेंस नहीं होना भी बड़ी गलती

  • मोहंती ने रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ मेडिकल इंश्योरेंस को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अच्छा मेडिकल इंश्योरेंस नहीं होना एक और बड़ी गलती है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें बढ़ सकती हैं और हेल्थकेयर महंगा होता जाएगा।
  • मोहंती के मुताबिक, अच्छा मेडिकल इंश्योरेंस न होना एक और गलती है क्योंकि आपकी सेहत बहुत महत्वपूर्ण है और हेल्थकेयर महंगा होता जाएगा। उन्होंने लोगों को अच्छे प्लानर की मदद लेने और जल्द से जल्द निवेश शुरू करने की सलाह दी।
  • मोहंती ने कहा कि लोगों को इस तरह निवेश करना चाहिए जैसे भविष्य को लेकर कोई निश्चितता नहीं है, क्योंकि पैसा भविष्य की बड़ी जरूरत बन सकता है।

रिटायरमेंट के बाद बचत होने पर भी क्यों रहती है चिंता?

रिटायरमेंट स्ट्रैटेजिस्ट मिलिंद देवगांवकर का कहना है कि पर्याप्त बचत जमा कर लेने के बाद भी जरूरी नहीं कि व्यक्ति की आर्थिक चिंता खत्म हो जाए। उनके मुताबिक, कई रिटायर्ड लोग इसलिए खर्च करने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें यह पता नहीं होता कि वे अपनी बचत खत्म किए बिना हर महीने या साल कितना पैसा सुरक्षित रूप से निकाल सकते हैं। इस अनिश्चितता के कारण कई लोग पैसा होने के बावजूद यात्राएं रद्द कर देते हैं, छोटे कमरे चुनते हैं और यहां तक कि जरूरी हेल्थ चेक-अप भी टाल देते हैं।

रिटायरमेंट में कितनी निकासी सुरक्षित मानी जा सकती है?

मिलिंद देवगांवकर के अनुमान के मुताबिक, 6 से 7 फीसदी की महंगाई और 12 से 14 फीसदी की मेडिकल महंगाई को देखते हुए एक सामान्य भारतीय रिटायर व्यक्ति को अपनी सालाना निकासी को करीब 2.5 से 3.5 फीसदी के बीच सीमित करना पड़ सकता है। हालांकि, यह व्यक्ति की निजी परिस्थितियों और उसके एसेट एलोकेशन पर निर्भर करेगा। 3 फीसदी की निकासी दर को उदाहरण के तौर पर देखें तो 2 करोड़ रुपये की बचत से हर महीने करीब 60,000 रुपये निकाले जा सकते हैं। वहीं, 3 करोड़ रुपये की बचत से हर महीने करीब 90,000 रुपये की निकासी होगी।

रिटायरमेंट फंड के अलावा हेल्थकेयर बफर भी जरूरी

  • देवगांवकर ने मेट्रो शहरों में रहने वाले और निजी अस्पतालों पर निर्भर रिटायर्ड दंपतियों के लिए 35 लाख से 50 लाख रुपये का अलग हेल्थकेयर बफर रखने की सलाह दी है।
  • उनके मुताबिक, अगर अलग से हेल्थकेयर फंड नहीं होगा और अचानक अस्पताल में भर्ती होने जैसी गंभीर स्थिति आती है, तो परिवार को गलत समय पर अपने मुख्य रिटायरमेंट फंड से पैसा निकालना पड़ सकता है।

95 साल की उम्र तक जीने पर आखिरी साल हो सकते हैं मुश्किलभरे

स्वरूप मोहंती ने स्पष्ट किया कि उनकी चेतावनी लोगों में डर पैदा करने के लिए नहीं है। वह केवल भविष्य की एक वास्तविक चुनौती की ओर ध्यान दिला रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं आपको डरा नहीं रहा हूं। मैं एक कड़वा सच बता रहा हूं।" उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई व्यक्ति 95 साल तक जीवित रहने वाला है और उसके पास पर्याप्त पैसा नहीं है, तो जिंदगी के आखिरी 10 से 15 साल बेहद मुश्किल हो सकते हैं। इसीलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि रिटायरमेंट के लिए निवेश जितना जल्दी शुरू किया जाए, उतना बेहतर है।