
Petrol Pump Fuel Filling Mistakes: पेट्रोल या डीजल भरवाते समय लोग अक्सर सिर्फ मशीन पर दिख रहे ‘जीरो’ पर भरोसा कर लेते हैं, लेकिन असल खेल इससे कहीं आगे चलता है। देशभर में कई उपभोक्ता शिकायत करते हैं कि सही दाम चुकाने के बावजूद उन्हें पूरा फ्यूल नहीं मिलता। वजह है कुछ ऐसी चालाकियां, जो देखने में मामूली लगती हैं लेकिन नुकसान बड़ा कर देती हैं। अगर आप रोज गाड़ी चलाते हैं, तो जानिए कि क्यों पेट्रोल पंप पर जीरों के भरोसे नहीं रहना चाहिए और पेट्रोल पंप वाले तेल भरते वक्त किस तरह की चालाकियां करते हैं, जिसपर आपकी नजर होनी जरूरी है।
अधिकतर पेट्रोल पंप पर कर्मचारी पहले मशीन को ‘जीरो’ पर सेट करके आपको दिखाते हैं ताकि भरोसा बन जाए। लेकिन इसी बीच कई जगह ध्यान भटकाने की कोशिश होती है, जैसे कैश, मोबाइल पेमेंट या बातचीत में उलझाना। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्राहक का ध्यान जैसे ही हटता है, कुछ सेकंड में मशीन में सेटिंग या रुकावट के जरिए कम मात्रा में फ्यूल देने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए सबसे जरूरी है कि आप पूरी प्रक्रिया को लगातार देखें और नजर न हटाएं।
कई बार नॉजल (पाइप) की स्पीड के साथ भी हेरफेर किया जाता है। शुरुआत में फ्यूल तेज़ी से निकलता हुआ लगता है, लेकिन बीच में अचानक फ्लो धीमा कर दिया जाता है। इससे मीटर पर दिखने वाला आंकड़ा और असल में टंकी में गया फ्यूल मेल नहीं खाता। इसका असर यह होता है कि आपको लगता है कि सही मात्रा मिली, लेकिन असल में कुछ लीटर कम रह जाते हैं।
कुछ मामलों में मशीन का कैलिब्रेशन सही नहीं होने का फायदा उठाया जाता है। जब ग्राहक जल्दी में होता है, तो वह फ्यूल खत्म होने या भरने की स्पीड पर ध्यान नहीं देता। इसी दौरान छोटे-छोटे गैप में रीडिंग और वास्तविक मात्रा में फर्क पैदा किया जाता है। यह फर्क हर ग्राहक के लिए थोड़ा होता है, लेकिन दिनभर में यह बड़ा अंतर बन जाता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा भरोसेमंद पेट्रोल पंप चुनें, रसीद जरूर लें और ‘जीरो से स्टार्ट’ होते समय पूरी प्रक्रिया पर नजर रखें। अगर संभव हो तो डिजिटल मीटर की रीडिंग खुद चेक करें। साथ ही, किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। पेट्रोल पंप पर छोटी सी लापरवाही भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। ‘जीरो’ देखकर संतुष्ट होना काफी नहीं है, सतर्क रहना ही असली बचाव है।
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