
RBI Bans Bank Digital Tricks: क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप पर कोई जरूरी काम कर रहे हों, तभी अचानक सामने एक बड़ा सा विज्ञापन आ जाता है? आप उसे हटाने के लिए कट (X) या क्लोज का बटन दबाते हैं, लेकिन ऐप चालाकी से आपको सीधे 'पर्सनल लोन अप्लाई' वाले पेज पर ले जाता है। या फिर किसी बैंक ने बड़े-बड़े अक्षरों में 'लाइफटाइम फ्री' कहकर आपको क्रेडिट कार्ड थमा दिया, और दो महीने बाद पता चला कि इसके पीछे तो खर्च करने की ढेरों शर्तें छिपी थीं? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। देश के करोड़ों मोबाइल यूजर्स रोज बैंकों की इस डिजिटल मनमानी का शिकार होते हैं। तकनीकी भाषा में इसे 'डार्क पैटर्न' (Dark Pattern) कहते हैं, लेकिन अब आपकी टेंशन खत्म होने वाली है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों की इस मनमानी पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। RBI ने एक नया नियम जारी किया है, जिसमें बैंकों की ऐसी 11 चालाकियों की लिस्ट दी गई है, जो अब पूरी तरह गैरकानूनी होंगी। यह नियम 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में लागू हो जाएगा। आइए जानते हैं कि बैंक आपके साथ ऐप पर क्या-क्या खेल खेलते थे और RBI ने उनपर कैसे ब्रेक लगाया है...
ऐप पर अचानक एक टाइमर चलने लगता है कि 'ऑफर खत्म होने में सिर्फ 10 मिनट बाकी, तुरंत लोन लें वरना ब्याज दर बढ़ जाएगी।' रिजर्व बैंक ने साफ कहा है कि 'यह दबाव पूरी तरह नकली होता है। ग्राहकों को डराकर या हड़बड़ी में कोई भी फैसला लेने पर मजबूर नहीं किया जा सकता।'
आप लोन या क्रेडिट कार्ड अप्लाई करते हैं और आखिरी पेज पर देखते हैं कि 'ऑनलाइन फ्रॉड इंश्योरेंस' या 'लोन प्रोटेक्शन' का एक बॉक्स पहले से ही टिक (Tick) है। ध्यान न दें तो चुपके से एक्स्ट्रा पैसे कट जाते हैं। RBI ने एक्शन लेते हुए कहा है कि ग्राहक की मर्जी के बिना कोई भी बॉक्स पहले से टिक नहीं रहेगा। हर सर्विस के लिए आपकी साफ मंजूरी जरूरी होगी।
जब आप एक्स्ट्रा इंश्योरेंस लेने से मना करते हैं, तो स्क्रीन पर लिखा आता है, 'No, मैं अपने अकाउंट की सुरक्षा नहीं चाहता' या 'No, मुझे कैशबैक नहीं चाहिए।' यह आपको गिल्टी (अपराधबोध) महसूस कराने के लिए किया जाता है। RBI ने एक्शन लेते हुए कहा कि अब बैंक आपको इमोशनली ब्लैकमेल नहीं कर सकते। मना करने का बटन बिल्कुल सीधा होना चाहिए, जैसे 'No' या 'Decline'।
बैंक ऐप लॉग-इन करते ही एक बड़ा सा पॉप-अप आ जाता है। जब तक आप उसपर क्लिक करके लोन वाले पेज पर नहीं जाएंगे, तब तक ऐप आपको अपना अकाउंट बैलेंस भी नहीं देखने देता। इसके अलावा बिना वजह कॉन्टैक्ट लिस्ट या कैमरे की परमिशन मांगी जाती है। RBI ने कहा है कि ग्राहक जो काम करने आया है, उसे पहले वो करने दिया जाए। किसी दूसरी सर्विस को बेचने के लिए ऐप को ब्लॉक करना अब अपराध है।
क्रेडिट कार्ड या कोई सर्विस एक्टिवेट करना बेहद सिंपल होता है, लेकिन जब आप उसे बंद (Cancel) करने जाते हैं, तो उसका लिंक ऐप में इतनी गहराई में छुपा दिया जाता है कि कस्टमर ढूंढ ही न पाए। RBI का सीधा आदेश है है कि अगर ऐप चलाना आसान है, तो एग्जिट करना भी सिंपल रखो! सर्विस बंद करने का तरीका उतना ही आसान होना चाहिए जितना चालू करने का था।
बैंक ऐप चालाकी से 'Accept' या 'Yes' वाले बटन को बड़ा और चमकदार हरे रंग का बनाते हैं, ताकि आपका अंगूठा वहीं जाए। वहीं 'Decline' या 'No' वाले बटन को इतना छोटा और धुंधला (ग्रे कलर) कर देते हैं कि वो दिखे ही ना। RBI ने कहा है कि डिजाइन के जरिए ग्राहक को भटकाना बंद करना होगा। दोनों ऑप्शन स्क्रीन पर बराबर और साफ दिखने चाहिए।
विज्ञापन में दिखाया कि लोन 8% की ब्याज दर पर मिल रहा है, लेकिन जब आप पूरा फॉर्म भर लेते हैं, तो आखिरी में रेट बढ़ाकर 12% कर दिया जाता है। या फिर 'लाइफटाइम फ्री' क्रेडिट कार्ड बोलकर दे दिया और बाद में मिनिमम खर्च की शर्त लगा दी। RBI ने कहा है कि जो वादा किया है, वही निभाना होगा। शर्तों को छुपाकर बाद में ग्राहक को झटका देना अब नहीं चलेगा।
लोन की पूरी प्रॉसेस के दौरान फीस नहीं बताई जाती, लेकिन जैसे ही आप फाइनल सबमिट करने वाले होते हैं, चुपके से 'प्रोसेसिंग फीस' के नाम पर कुछ पैसे जोड़ दिए जाते हैं। RBI ने एक्शन लेते हुए कहा है कि किसी भी सर्विस या लोन की पूरी फीस और चार्ज पहले ही पन्ने पर साफ-साफ बताने होंगे।
आपके फोन पर एक नोटिफिकेशन आता है, 'जरूरी सूचना: आपके अकाउंट में कुछ बदलाव हुआ है!' आप डरकर उसे खोलते हैं, तो अंदर पर्सनल लोन का विज्ञापन निकलता है। RBI ने कहा है कि विज्ञापनों को जरूरी अलर्ट या न्यूज की तरह मास्क करके नहीं भेजा जा सकता।
आप ऐप पर 'No' पर क्लिक कर देते हैं, लेकिन ऐप हर दो मिनट बाद फिर से वही पॉप-अप सामने ले आता है, 'क्या आप पक्का लोन नहीं लेना चाहते?' जब तक आप हां न कह दें, वह परेशान करता रहता है। RBI ने कहा है कि एक बार ग्राहक ने मना कर दिया, तो बैंक उसे बार-बार टोककर परेशान (Irritate) नहीं कर सकता है।
जानबूझकर उलझाने वाली अंग्रेजी लिखना, जैसे- 'अगर आप ऑफर्स नहीं पाना चाहते, तो इस बॉक्स को अनचेक करें।' आम आदमी समझ ही नहीं पाता कि टिक करना है या हटाना है। RBI ने कहा है कि भाषा बिल्कुल साफ, सीधी और आसान होनी चाहिए ताकि कोई भी भ्रम (Confusion) न हो।
RBI ने साफ कहा है कि सभी बैंकों को 1 जनवरी 2027 से पहले अपने ऐप्स और वेबसाइट्स को पूरी तरह सुधारना होगा। अगर इस तारीख के बाद भी आपका बैंक आपके साथ इनमें से कोई भी चालाकी करता है, तो आप शिकायत कर सकते हैं। सबसे पहले अपने बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी (Grievance Redressal Officer) के पास लिखित या डिजिटल शिकायत दर्ज कराएं। अगर बैंक 30 दिनों के अंदर आपकी बात नहीं सुनता या टालमटोल करता है, तो आप सीधे RBI लोकपाल (Ombudsman) की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं। वहां बैंकों पर तगड़ा जुर्माना लगाया जाता है।
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