
RBI Repo Rate June 2026: अगर आप हर महीने अपने बैंक को भारी-भरकम EMI चुकाते हैं, तो आपके लिए एक बड़ी राहत वाली खबर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज 5 जून को नए वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग के फैसले सुना दिए हैं। अच्छी बात यह है कि इस बार भी रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25% पर बरकरार रखा गया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल आपका लोन महंगा नहीं होगा और न ही आपकी जेब पर ईएमआई का कोई नया बोझ बढ़ेगा। लेकिन सिर्फ इतने से खुश होकर बैठ मत जाइए। जब ब्याज दरें थमी हुई हों, तो आपके पास अपनी ईएमआई का बोझ और कम करने का एक बेहतरीन मौका होता है। आइए जानते हैं वो 2 काम जो आपको तुरंत करने चाहिए...
ग्रोथ का अनुमान घटा (GDP Outdated)
खाड़ी देशों (वेस्ट एशिया) में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों की वजह से आरबीआई ने इस साल की जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है।
महंगाई और मानसून का डर
गवर्नर ने साफ कहा कि भले ही अभी महंगाई कंट्रोल में है, लेकिन कम बारिश (कमजोर मानसून) के अनुमान और विदेशी तनाव के कारण आने वाले दिनों में ईंधन (फ्यूल) और राशन की कीमतें आपकी जेब का बजट बिगाड़ सकती हैं।
सर्विस सेक्टर में दम
एक अच्छी खबर यह है कि शहरों में नौकरियां और कमाई स्थिर है। हमारा सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
EMI को लेकर कौन से 2 काम करने चाहिए?
लोन का टेन्योर कम करवाएं
दिसंबर 2025 में जब आरबीआई ने रेट घटाया था, तो ज्यादातर बैंकों ने ग्राहकों की ईएमआई कम करने के बजाय उनके लोन के महीने (अवधि) कम कर दिए थे। अब चूंकि दरें दोबारा स्थिर हैं, आप अपने बैंक जाकर या नेट बैंकिंग के जरिए चेक करें। अगर आपकी ईएमआई का अमाउंट वही है, तो बैंक से रिक्वेस्ट करके अपने लोन का टेन्यूर कम करवाएं। इससे आप बैंक को दिए जाने वाले कुल ब्याज में लाखों रुपए बचा लेंगे।
लोन रीफाइनांसिंग या बैलेंस ट्रांसफर का ऑप्शन चुनें
अगर आपने बहुत पहले महंगे ब्याज दर पर लोन लिया था और आपका मौजूदा बैंक आपको कम दर का फायदा नहीं दे रहा है, तो मार्केट में दूसरे बैंकों के ऑफर्स चेक करें। कई बैंक कम ब्याज दर पर बैलेंस ट्रांसफर की सुविधा देते हैं। अपने लोन को किसी दूसरे बैंक में शिफ्ट करके आप अपनी मंथली ईएमआई को सीधे तौर पर कम कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल आपकी जानकारी और सामान्य समझ (Financial Literacy) बढ़ाने के लिए है। लोन की ब्याज दरें, नियम, EMI कैलकुलेशन और रीफाइनांसिंग (बैलेंस ट्रांसफर) की शर्तें अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की पॉलिसी के आधार पर पूरी तरह अलग हो सकती हैं। अपने लोन से जुड़ा कोई भी फैसला लेने, ईएमआई बदलने या बैंक ट्रांसफर करने से पहले अपने संबंधित बैंक के कस्टमर केयर, ब्रांच या किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एक्सपर्ट से पूरी जानकारी और कानूनी नियमों की पुष्टि जरूर कर लें।
अर्थव्यवस्था, बजट, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शेयर मार्केट अपडेट्स के लिए Business News in Hindi पढ़ें। निवेश सलाह, बैंकिंग अपडेट्स और गोल्ड-सिल्वर रेट्स समेत पर्सनल फाइनेंस की जानकारी Money News in Hindi सेक्शन में पाएं। वित्तीय दुनिया की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी — Asianet News Hindi पर।