EPF Interest After Retirement: अक्सर लोग रिटायरमेंट या नौकरी बदलने के तुरंत बाद अपना पूरा PF निकाल लेते हैं। लेकिन EPFO के एक नियम के मुताबिक, ऐसा करना जरूरी नहीं है। आपका खाता निष्क्रिय होने के बाद भी 3 साल तक उस पर ब्याज मिलता रहता है, जो कि बैंकों के सेविंग्स अकाउंट से कहीं ज़्यादा है।

EPFO PF Interest: नौकरी से रिटायर होने या जॉब बदलने के बाद लोग सबसे पहले अपने प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा निकालने की सोचते हैं। कई लोगों को लगता है कि कॉन्ट्रिब्यूशन बंद होते ही खाते पर ब्याज मिलना भी बंद हो जाएगा, इसलिए पूरी रकम तुरंत निकाल लेना ही समझदारी है। लेकिन यह सोचना पूरी तरह सही नहीं है और इस जल्दबाज़ी में आप एक बड़े फायदे से चूक सकते हैं।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का एक नियम नौकरीपेशा लोगों के लिए बहुत काम का है। इस नियम के मुताबिक, अगर आप रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के बाद अपने पीएफ खाते से पैसा नहीं निकालते हैं, तो भी उस पर ब्याज क्रेडिट होता रहता है। यह ब्याज आपको पूरे 36 महीने यानी तीन साल तक मिलता है।

क्यों है ये एक फायदे का सौदा?

पीएफ पर मिलने वाला ब्याज आमतौर पर बैंक के सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज से कहीं ज़्यादा होता है। मौजूदा समय में पीएफ पर 8% से ज़्यादा की दर से ब्याज मिल रहा है, जबकि ज़्यादातर बैंक बचत खातों पर महज़ 3 से 4% का ब्याज देते हैं। ऐसे में अगर आपको पैसों की तत्काल ज़रूरत नहीं है, तो उसे पीएफ खाते में ही रहने देना एक स्मार्ट फैसला हो सकता है।

इस तरह आप बिना किसी अतिरिक्त निवेश के अपनी जमापूंजी पर बेहतर रिटर्न पा सकते हैं। ज़ाहिर है, यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो अपने पैसे को सुरक्षित रखते हुए उस पर अच्छा ब्याज कमाना चाहते हैं। तीन साल की यह अवधि आपको अपने भविष्य के खर्चों की योजना बनाने के लिए भी अतिरिक्त समय देती है।

तीन साल बाद क्या होता है?

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह ब्याज सिर्फ तीन साल तक ही मिलता है। EPFO के नियमों के अनुसार, अगर कोई सदस्य रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के तीन साल के भीतर भी अपने खाते से पैसा नहीं निकालता या कोई क्लेम फाइल नहीं करता, तो उस खाते को 'निष्क्रिय' (Inoperative) मान लिया जाता है। एक बार खाता निष्क्रिय हो जाने के बाद उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है।

इसलिए, अगर आप नौकरी बदल रहे हैं या रिटायर हो रहे हैं, तो अपने पीएफ खाते को लेकर तुरंत कोई फैसला लेने की ज़रूरत नहीं है। अपनी ज़रूरत का आकलन करें और अगर संभव हो तो इस नियम का फायदा ज़रूर उठाएं।