Delhi Former Chief Secretary Rakesh Mehta Suicide: 1975 बैच के IAS अधिकारी राकेश मेहता नोएडा स्थित घर में मृत मिले। पुलिस को कथित सुसाइड नोट मिला है, जिसमें स्वास्थ्य और मानसिक समस्याओं का जिक्र बताया गया है।
Delhi Former Chief Secretary Death: दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता अब हमारे बीच नहीं रहे। 1975 बैच के इस वरिष्ठ IAS अधिकारी ने नोएडा के सेक्टर-82 स्थित अपने फ्लैट में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। 6 सितंबर को उनका शव घर के एक कमरे में छत के पंखे से लटकता हुआ पाया गया, जिसके बाद परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया। मौके से पुलिस को एक पन्ने का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने अपनी खराब सेहत और लगातार बढ़ रहे मानसिक तनाव को इस बड़े कदम की वजह बताया है। सूचना मिलते ही थाना फेस-2 पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने पहुंचकर जांच शुरू कर दी।
Rakesh Mehta Suicide Case: पुलिस को मिला सुसाइड नोट
अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलने के बाद फेस-2 थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया। पुलिस ने घटनास्थल से मिले नोट और अन्य परिस्थितियों के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मेहता ने स्वास्थ्य और मानसिक तनाव को अपने इस कदम के पीछे की वजह बताया है। पुलिस फिलहाल मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
Rakesh Mehta IAS Career: 1975 बैच के अधिकारी थे
राकेश मेहता 1975 बैच के IAS अधिकारी थे और दिल्ली प्रशासन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं। वे दिल्ली सरकार में अलग-अलग पदों पर रहे। दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर के तौर पर भी उन्होंने काम किया था। उनका प्रशासनिक अनुभव लंबा रहा और दिल्ली से जुड़े कई अहम मामलों में उनकी भूमिका रही।
शीला दीक्षित सरकार में निभाई थी अहम भूमिका
राकेश मेहता का नाम दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों में काफी सम्मान के साथ लिया जाता था। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय शीला दीक्षित के कार्यकाल के दौरान राज्य प्रशासन में एक बेहद मजबूत स्तंभ की तरह काम किया। दिल्ली सरकार में अलग-अलग बड़े पदों को संभालते हुए वे दिल्ली नगर निगम (MCD) के कमिश्नर भी रहे।
Delhi Chief Secretary Rakesh Mehta: 2007 में संभाली थी जिम्मेदारी
साल 2007 में वे दिल्ली के मुख्य सचिव के पद पर तैनात हुए और करीब तीन साल से अधिक समय तक इस जिम्मेदारी को निभाया। राजधानी में बिजली, परिवहन व्यवस्था और नागरिक बुनियादी ढांचे (civic infrastructure) को आधुनिक बनाने वाले कई बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने का सीधा श्रेय उन्हीं को जाता है। इसके अलावा, साल 2010 में दिल्ली में आयोजित हुए राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) के सफल प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों के पीछे भी उनकी मुख्य भूमिका मानी जाती है।


