
RBI Monetary Policy Decisions: ग्लोबल इकोनॉमी में मची उथल-पुथल और पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजों की घोषणा कर दी है। गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति ने लगातार दूसरी बार रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इस फैसले का सीधा मतलब है कि फिलहाल आपकी होम लोन और कार लोन की EMI में कोई कमी नहीं आने वाली है। जानिए RBI के 5 बड़े फैसले...
संजय मेल्होत्रा (Sanjay Malhotra) की अगुवाई में हुई MPC बैठक में फैसला लिया गया कि रेपो रेट 5.25% पर ही रहेगा और पॉलिसी स्टांस न्यूट्रल ही रखा जाएगा। इसका मतलब सीधा है कि बैंक जिस रेट पर RBI से पैसा लेते हैं, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल लोन की ब्याज दरों में भी कोई बड़ी राहत नहीं मिलने वाली। हालांकि, RBI का यह कदम अचानक नहीं है। इससे पहले भी फरवरी की बैठक में रेट को स्थिर रखा गया था, यानी सेंट्रल बैंक अभी 'वेट एंड वॉच' वाली रणनीति पर चल रहा है।
RBI ने साफ कहा है कि महंगाई (Inflation) अभी कंट्रोल में है, लेकिन ग्लोबल हालात (जियोपॉलिटिकल टेंशन) इसे बढ़ा सकते हैं। FY27 के लिए महंगाई का अनुमान करीब 4.6% रखा गया है, जो RBI के तय दायरे (2% से 6%) के अंदर है। शुरुआत में महंगाई थोड़ी कम रह सकती है, लेकिन साल के बीच और अंत तक इसमें हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसका मतलब अभी राहत है, लेकिन आगे थोड़ा दबाव बन सकता है।
अच्छी खबर ये है कि RBI को भारत की ग्रोथ स्टोरी पर पूरा भरोसा है। FY26 के लिए ग्रोथ अनुमान 7.6% रखा गया है, जो काफी मजबूत माना जाता है। हालांकि FY27 में यह थोड़ा घटकर 6.9% रह सकता है। यानी इकोनॉमी धीमी नहीं हो रही, बस थोड़ी नॉर्मल स्पीड पर आ सकती है।
RBI ने सिर्फ रेट पर ही फैसला नहीं लिया, बल्कि बिजनेस को आसान बनाने के लिए भी कुछ अहम कदम उठाए हैं। MSME सेक्टर के लिए TReDS प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन आसान किया जाएगा, जिससे छोटे कारोबारियों को फंडिंग मिलना आसान होगा। साथ ही RBI ने हजारों पुराने नियमों को मिलाकर आसान गाइडलाइन बनाने की दिशा में काम किया है, जिससे कंपनियों को कम कागजी झंझट झेलना पड़ेगा। इसका मतलब बिजनेस करना थोड़ा और आसान होने वाला है।
RBI अब मनी मार्केट को और बड़ा और मजबूत बनाना चाहता है। इसके लिए कुछ नए नॉन-बैंक एंटिटीज को भी इस मार्केट में आने की अनुमति देने की तैयारी है। इससे मार्केट में पैसा ज्यादा घूमेगा, लिक्विडिटी बढ़ेगी और फाइनेंशियल सिस्टम और मजबूत होगा।
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