
बिजनेस डेस्क: कोरोना वायरस महामारी की वजह से आज देश में ज्यादातर कर्मचारी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर रहे हैं। इन कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि घर से काम कर रहे कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी (काम करने की क्षमता) लगभग 65 प्रतिशत कम हो गई है। यानी वे दफ्तर में बैठकर जितना काम करते थे, घर से उसका 65 प्रतिशत ही कर पा रहे हैं।
बेंगलुरु की रिसर्च कंपनी ''फीडबैक इनसाइट्स'' की एक रिपोर्ट में यह पाया गया है की घर से काम करने से उनकी उत्पादकता 78 प्रतिशत रह गई है। इस सर्वे में 550 लोगों की राय शामिल की गई है।
कई अधिकारीयों को किया गया है शामिल
इनमें 450 कर्मचारी और 100 शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। सर्वे में ऑटो पार्ट्स, रसायन, निर्माण, टिकाऊ उपभोक्ता सामान, ग्लास, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, मशीन उपकरण, IT सहित 18 क्षेत्रों के कर्मचारियों-शीर्ष अधिकारियों की राय को शामिल किया गया है।
ये हैं कुछ मुख्य चुनौतियां
सर्वे के अनुसार 65 प्रतिशत कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत स्थिति और टीम के लोगों साथ संपर्क की कमी को लेकर चिंतित हैं। करीब 56 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें नेटवर्क के मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। 47 प्रतिशत का कहना था कि घर से काम करने से उन्हें ध्यान बंटने की चुनौती से भी जूझना पड़ रहा है।
(प्रतीकात्मक फोटो)
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