चांदी की कीमतों में अपने ऑल-टाइम हाई से भारी गिरावट आई है। ग्लोबल मार्केट में बदलाव, बढ़ती ब्याज दरों और इंडस्ट्रियल डिमांड में कमी के कारण चांदी के रेट लगातार गिर रहे हैं। आइए यहां जानते हैं कि आखिर चांदी की कीमतें इतनी तेजी से क्यों टूट रही हैं।
इंटरनेशनल और घरेलू मार्केट में चांदी की कीमतें अचानक धड़ाम हो गई हैं। इस साल की शुरुआत में MCX मार्केट में एक किलो चांदी का रेट 4.2 लाख से 4.27 लाख रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया था। लेकिन अब वहां से कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।
फिलहाल एक किलो चांदी का भाव 1.95 लाख से गिरकर 2 लाख रुपये के नीचे आ गया है। मार्केट एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ग्लोबल इकॉनमी में बदलाव, ट्रेडर्स के मार्जिन कॉल और इंडस्ट्रियल सेक्टर से डिमांड घटना इस भारी गिरावट की मुख्य वजहें हैं।
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मजबूत डॉलर और हाई ब्याज दरों का असर
इंटरनेशनल लेवल पर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से महंगाई का डर फिर से सताने लगा है। इसके चलते अमेरिकी फेडरल बैंक आने वाले कुछ समय तक ब्याज दरों को हाई लेवल पर ही बनाए रख सकता है।
ब्याज दरें ज्यादा होने पर इन्वेस्टर्स को चांदी और सोने जैसे एसेट्स में पैसा लगाना ज्यादा मुनाफे का सौदा नहीं लगता, क्योंकि इन पर कोई ब्याज नहीं मिलता। बॉन्ड और कैश पर ज्यादा रिटर्न मिलने के कारण इन्वेस्टर्स चांदी से अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिससे इसकी कीमतों पर भारी दबाव पड़ा है।
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फ्यूचर्स ट्रेडिंग में भारी मार्जिन सेलिंग
चांदी की कीमतें जब 4.2 लाख रुपये के पार गईं, तो सट्टेबाजी वाली खरीदारी (speculative buying) काफी बढ़ गई थी। लेकिन जैसे ही रेट गिरना शुरू हुए, ग्लोबल कमोडिटी एक्सचेंजों ने मार्जिन लिमिट बढ़ा दी। नुकसान से बचने के लिए फ्यूचर्स ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन क्लोज करनी पड़ी। ब्रोकर्स के ऑटोमैटिक सेल सिग्नल से हुई इस फोर्स्ड सेलिंग के कारण मार्केट में चांदी की सप्लाई अचानक बढ़ गई और कीमतें तेजी से गिर गईं।
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इंडस्ट्रियल सेक्टर में घटी डिमांड
सोने का इस्तेमाल मुख्य रूप से एक सुरक्षित निवेश के तौर पर होता है। लेकिन दुनिया भर में मौजूद कुल चांदी का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा इंडस्ट्रीज में खप जाता है। खासकर सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल), AI चिप्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चांदी का खूब इस्तेमाल होता है।
चीन जैसे बड़े औद्योगिक देशों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ उम्मीद से धीमी रही है। इससे चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यही वजह है कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में ज्यादा तेजी से गिरावट आई है।
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टेक शेयरों में बिकवाली और पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट
हाल के दिनों में मेगा-कैप टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली है। इन्वेस्टर्स ने टेक सेक्टर और दूसरे एसेट्स में हुए नुकसान की भरपाई करने या कोलैटरल डिपॉजिट के लिए कमोडिटी मार्केट से अपनी चांदी की पोजीशन बेच दी। ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स द्वारा फंड्स को रीबैलेंस करने की वजह से कमोडिटी मार्केट से बड़ी मात्रा में पैसा बाहर निकल गया।
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इन्वेस्टर्स के लिए एक्सपर्ट्स की अहम सलाह
भले ही शॉर्ट-टर्म में चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दिख रहा है, लेकिन मार्केट एनालिस्ट्स मानते हैं कि लॉन्ग-टर्म में इसका भविष्य शानदार है। आने वाले दिनों में ग्रीन एनर्जी, सोलर प्रोजेक्ट्स, EV और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में चांदी का इस्तेमाल और बढ़ेगा।
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि फिलहाल मार्केट में काफी वोलैटिलिटी (अस्थिरता) है। इसलिए हर गिरावट पर तुरंत खरीदारी करने के बजाय, मार्केट के एक सपोर्ट लेवल पर स्थिर होने का इंतजार करना बेहतर है। रिटेल ग्राहकों को भी जीएसटी और मेकिंग चार्ज का ध्यान रखते हुए ही खरीदारी का फैसला लेना चाहिए।
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