
नई दिल्लीः खाद्य महंगाई को देखते हुए सरकार चीनी के निर्यात को सीमित कर सकती है। घरेलू कीमतों में उछाल को रोकने के लिए भारत सरकार यह कदम उठाएगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इस सीजन के निर्यात को 1 करोड़ टन पर सीमित कर सकती है। आपको बता दें कि करीब छह साल में पहली बार चीनी निर्यात को प्रतिबंधित किया जा सकता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत ने सितंबर को समाप्त होने वाले चालू विपणन वर्ष में 18 मई तक 75 लाख टन चीनी का निर्यात किया है। भारत से प्रमुख आयातक देश इंडोनेशिया, अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया और अफ्रीकी देश हैं।
तीन राज्यों से चीनी का 80 फीसदी उत्पादन
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक की देश में कुल चीनी उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। देश के अन्य प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा तथा पंजाब शामिल हैं। र्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 में क्रमशः लगभग 6.2 लाख टन, 38 लाख टन और 59.60 लाख टन चीनी का निर्यात किया गया था।
शेयर मार्केट में मची खलबली
चीनी निर्यात को प्रतिबंधित करने या सीमित करने की संभावना को देखते हुए शेयर मार्केट में खलबली मच गई है। शुगर कंपनियों के स्टॉक टूट रहे हैं। श्री नेणुका शुगर का शेयर 14 फीसदी टूट गया, वहीं बलरामपुर चीनी का शेयर 10 फीसदी तक टूट गया है। धामपुर शुगर में 5 फीसदी, शक्ति शुगर्स में 7 फीसदी और बजाज हिंदुस्तान शुगर में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद महंगी हुई खाद्य वस्तुएं
रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण भोजन की कीमतों में वृद्धि देखी गई है। दुनिया भर में सरकारों मे कुछ चीजों के घरेलू कीमतों को सुरक्षित रखने के लिए कई सारे उपाय किए हैं। मलेशिया ने 1 जून से 1 महीने में 3.6 मिलियन मुर्गों के निर्यात पर रोक लगा दिया है। इंडोनेशिया ने हाल ही में अस्थायी रूप से पाम ऑयल (Palm Oil) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत ने गेहूं के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया है। सर्बिया और कजाकिस्तान ने अनाज शिपमेंट पर कोटा लगा दिया है।
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