
देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को लेकर इन दिनों तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सोशल मीडिया पर कई दावे किए जा रहे हैं कि अब UPI से भुगतान करने पर ग्राहकों को शुल्क देना पड़ सकता है। इन खबरों के बीच लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब हर UPI ट्रांजैक्शन पर पैसा कटेगा या फिर छोटे दुकानदारों को भुगतान स्वीकार करने के लिए चार्ज देना होगा?
इन सभी सवालों पर अब Payments Council of India (PCI) ने स्थिति स्पष्ट की है। आइए समझते हैं कि UPI को लेकर आखिर चर्चा क्यों हो रही है और फिलहाल उपभोक्ताओं व व्यापारियों के लिए क्या व्यवस्था लागू है।
There has been considerable discussion around UPI and merchant charges. Here are the facts behind the conversation what it means for consumers, merchants, and India's digital payment ecosystem.
1. Will I have to pay to use UPI?
No. UPI has always been free for consumers since…— PCI - Payments Council of India (@PCIUpdates) August 7, 2026
इसका जवाब साफ है-नहीं।
UPI की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी और तब से लेकर आज तक आम उपभोक्ताओं के लिए यह सेवा पूरी तरह मुफ्त है। कोई भी व्यक्ति अपने बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए भुगतान करता है तो उस पर किसी प्रकार का ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगता। वर्तमान में भी इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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Payments Council of India के अनुसार, छोटे व्यापारियों और किराना दुकानों को UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए किसी प्रकार का Merchant Discount Rate (MDR) नहीं देना पड़ता।
UPI को इस उद्देश्य से तैयार किया गया था कि देश का सबसे छोटा व्यापारी भी बिना अतिरिक्त लागत के डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सके। इसलिए छोटे व्यापारियों को इस व्यवस्था से बाहर करने या उन पर अतिरिक्त बोझ डालने का फिलहाल कोई प्रस्ताव लागू नहीं है।
पिछले कुछ वर्षों में UPI ने रिकॉर्ड स्तर पर वृद्धि दर्ज की है। आज यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है, जहां हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन होते हैं।
जैसे-जैसे इसका उपयोग बढ़ा है, वैसे-वैसे यह चर्चा भी शुरू हुई है कि इतने बड़े डिजिटल नेटवर्क को लंबे समय तक सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए आवश्यक निवेश कैसे जारी रखा जाए। यही वजह है कि UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता (Sustainability) को लेकर विचार-विमर्श हो रहा है।
पिछले लगभग एक दशक से बैंक, फिनटेक कंपनियां, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर, NPCI और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मिलकर UPI नेटवर्क को मजबूत बनाने में लगातार निवेश कर रहे हैं।
इस निवेश का उपयोग साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने वाली तकनीक, सर्वर क्षमता बढ़ाने, नई सुविधाएं विकसित करने और 24×7 निर्बाध सेवा सुनिश्चित करने में किया जाता है। यही वजह है कि UPI आज दुनिया के सबसे भरोसेमंद डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म में शामिल है।
राष्ट्रीय स्तर के किसी भी डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को संचालित करने के लिए तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, नियमों के अनुपालन, ग्राहक सहायता और नवाचार पर लगातार खर्च करना पड़ता है।
फिलहाल यह लागत बैंक, पेमेंट कंपनियां और अन्य इकोसिस्टम पार्टनर्स वहन करते हैं, ताकि आम उपभोक्ताओं को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित और आसान डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलती रहे।
Payments Council of India ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी श्रेणी में बड़े व्यापारियों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच कोई व्यावसायिक शुल्क व्यवस्था होती भी है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ताओं से UPI इस्तेमाल करने का शुल्क लिया जाएगा।
दुनिया के कई देशों में व्यापारी और पेमेंट सेवा प्रदाताओं के बीच ऐसे व्यावसायिक मॉडल पहले से मौजूद हैं, जबकि उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल भुगतान आसान और सुविधाजनक बना रहता है।
आज UPI सिर्फ एक भुगतान माध्यम नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना बन चुका है। करोड़ों लोग रोजमर्रा के भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी, बिल भुगतान और छोटे-बड़े लेनदेन के लिए इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
मानना है कि जैसे-जैसे ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे सुरक्षा, साइबर प्रोटेक्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों में लगातार निवेश भी जरूरी होगा। इससे आने वाले वर्षों में भी UPI पहले की तरह तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बना रहेगा।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त है और छोटे व्यापारियों पर भी UPI भुगतान स्वीकार करने के लिए कोई MDR लागू नहीं है। वर्तमान में जो चर्चा चल रही है, वह UPI नेटवर्क को भविष्य के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने को लेकर है। इसलिए इस समय ऐसी खबरों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक जानकारी देखना जरूरी है। अभी तक ग्राहकों के लिए UPI भुगतान पर किसी नए शुल्क की घोषणा नहीं की गई है।
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