डाबर के शहद-घी और नारियल तेल पर क्यों मचा बवाल? FSSAI के एक्शन पर कोर्ट ने लगाई रोक, 10 सवालों में जानें पूरा विवाद

Published : Aug 07, 2026, 05:42 PM IST
Dabur Products Ban Case

सार

Dabur Products Controversy: डाबर के शहद, घी और नारियल तेल पर FSSAI के एक्शन से क्यों बवाल मच गया? दिल्ली हाईकोर्ट ने बैन पर रोक क्यों लगाई? 10 सवालों में समझिए पूरा मामला।

Dabur FSSAI Ban Case Latest Update: डाबर के कुछ पॉपुलर प्रोडक्ट्स इन दिनों एक अलग वजह से चर्चा में हैं। मामला किसी प्रोडक्ट की खराब क्वॉलिटी या सेफ्टी का नहीं, बल्कि पैकेट पर लिखे '100% प्योर', '100% नेचुरल' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों से जुड़ा है। FSSAI ने ऐसे दावों वाले डाबर के कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने का आदेश दिया था। इसके बाद कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब शुक्रवार को कोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत देते हुए FSSAI के आदेश पर रोक लगा दी है। यानी फिलहाल प्रभावित प्रोडक्ट्स की बिक्री जारी रह सकती है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर FSSAI को इन प्रोडक्ट्स के लेबल पर क्या आपत्ति थी? डाबर ने कोर्ट में क्या कहा और हाईकोर्ट ने आदेश पर रोक क्यों लगाई? आइए पूरे मामले को 10 सवालों में समझते हैं...

डाबर के किन प्रोडक्ट्स पर FSSAI ने कार्रवाई की थी?

FSSAI की कार्रवाई उन डाबर प्रोडक्ट्स को लेकर थी, जिनके पैकेट या लेबल पर ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे किए गए थे। इनमें डाबर हनी, डाबर हनी स्क्वीजी, डाबर सुंदरबंस हनी, डाबर हिमालयन एपल साइडर विनेगर, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल, डाबर काउ घी, रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर ऑर्गेनिक हनी जैसे प्रोडक्ट शामिल बताए गए हैं। यानी मामला सिर्फ शहद या घी तक सीमित नहीं था। नारियल तेल, नारियल पानी और दूसरे प्रोडक्ट्स भी इसकी जद में आए।

FSSAI को ‘100%’ लिखने पर क्या आपत्ति थी?

FSSAI का कहना था कि किसी फूड प्रोडक्ट के पैकेट पर ‘100%’ जैसे शब्द ग्राहक को भ्रमित कर सकते हैं। रेगुलेटर की चिंता यह थी कि ऐसे दावों को हर स्थिति में आसानी से वेरिफाई करना संभव नहीं है। अगर किसी प्रोडक्ट पर ‘100% प्योर’ या ‘100% नेचुरल’ लिखा है, तो ग्राहक इसे प्रोडक्ट की पूरी तरह शुद्धता या प्राकृतिक होने की गारंटी के तौर पर समझ सकता है। यही वजह है कि FSSAI ने ऐसे क्लेम्स को लेकर आपत्ति जताई और कार्रवाई की।

डाबर ने FSSAI के आदेश को कोर्ट में क्यों चुनौती दी?

डाबर ने इस कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। कंपनी की दलील थी कि FSSAI ने कार्रवाई से पहले तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। डाबर के मुताबिक, उसे पहले शो-कॉज नोटिस या सुधार का नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए था। कंपनी का कहना था कि बिना पर्याप्त मौका दिए सीधे बिक्री रोकने का आदेश जारी कर दिया गया। यही बात डाबर ने कोर्ट के सामने प्रमुख मुद्दे के तौर पर रखी।

डाबर ने FSSAI के आदेश में कौन-कौन सी कमियां बताईं?

डाबर ने कानूनी और तकनीकी दोनों आधार पर FSSAI के आदेश पर सवाल उठाए। कंपनी का तर्क था कि FSSAI Act, 2006 की धारा 18 में दिए गए सिद्धांत किसी अधिकारी को हर मामले में सीधे बिक्री रोकने की ताकत नहीं देते। इसके अलावा डाबर ने यह भी सवाल उठाया कि आदेश में साफ तौर पर यह नहीं बताया गया कि ‘100% प्योर’ या ‘100% नेचुरल’ जैसे शब्द किस खास नियम का उल्लंघन करते हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि अगर कोई प्रोडक्ट सिंगल-इन्ग्रीडिएंट या पूरी तरह प्राकृतिक है, तो उसके लिए ‘100% प्योर’ कहना अपने आप में गलत या भ्रामक नहीं माना जाना चाहिए।

क्या डाबर के प्रोडक्ट खराब या असुरक्षित पाए गए थे?

नहीं। यह बात इस पूरे विवाद को समझने के लिए सबसे जरूरी है। मामला इस बात का नहीं था कि डाबर का शहद, घी, नारियल तेल या कोई दूसरा प्रोडक्ट खराब, नकली या असुरक्षित पाया गया। डाबर की ओर से कोर्ट में यह बात साफ की गई कि FSSAI के आदेश में इन प्रोडक्ट्स को मिलावटी या स्वास्थ्य के लिए खतरनाक नहीं बताया गया था। यानी विवाद मुख्य रूप से लेबल और प्रोडक्ट पर किए गए दावों की भाषा को लेकर था।

FSSAI की कार्रवाई से डाबर के बिजनेस पर क्या असर पड़ रहा था?

डाबर ने कोर्ट को बताया कि बिक्री रोकने के आदेश से कंपनी के कारोबार पर तुरंत असर पड़ रहा था। अगर बाजार में पहले से मौजूद पैकेटों पर आपत्ति है, तो कंपनी के सामने उन्हें वापस लेने या दोबारा पैक करने जैसी स्थिति बन सकती थी। इसके अलावा ऑनलाइन रिटेलर्स और दूसरे चैनल पार्टनर्स को बिक्री रोकने की सलाह दिए जाने से भी कंपनी के कारोबार और ब्रांड इमेज पर असर पड़ने की बात डाबर ने कोर्ट के सामने रखी। कंपनी का कहना था कि इस तरह के आदेश से बाजार में मौजूद स्टॉक को लेकर भी बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

हाईकोर्ट ने अब क्या फैसला दिया है?

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले प्रभावित प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने को कहा गया था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र सरकार और FSSAI को नोटिस भी जारी किया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल FSSAI का वह आदेश लागू नहीं रहेगा और अगली सुनवाई तक डाबर को राहत मिली हुई है।

अब डाबर के प्रोडक्ट्स की बिक्री पर क्या असर होगा?

कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रभावित डाबर प्रोडक्ट्स की बिक्री फिलहाल जारी रह सकती है। यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दुकानों पर इन प्रोडक्ट्स की बिक्री सिर्फ उस FSSAI आदेश के आधार पर रोकने की स्थिति फिलहाल नहीं है। कंपनी को भी फिलहाल उस आदेश के कारण बाजार से स्टॉक वापस लेने या पैकेजिंग बदलने जैसी कार्रवाई करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि यह अंतरिम राहत है। अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।

अब आगे क्या होगा?

दिल्ली हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब FSSAI और केंद्र सरकार को अपना जवाब देना होगा। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। कोर्ट आगे यह देखेगा कि FSSAI की ओर से जारी किया गया 3 अगस्त का आदेश कानूनी तौर पर सही था या उसमें बदलाव/रद्द करने की जरूरत है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि डाबर को इस मामले में हमेशा के लिए क्लीन चिट मिल गई है। फिलहाल कंपनी को सिर्फ अंतरिम राहत मिली है और मामला कोर्ट में आगे चलेगा।

आम ग्राहकों के लिए इस पूरे मामले का क्या मतलब है?

अगर आप डाबर का शहद, घी, नारियल तेल या इनमें से कोई दूसरा प्रभावित प्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं, तो इस खबर को प्रोडक्ट के खराब या असुरक्षित होने की खबर समझने की जरूरत नहीं है। यह विवाद मुख्य रूप से इस बात पर है कि किसी फूड प्रोडक्ट के पैकेट या विज्ञापन पर ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे शब्द किस तरह इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यानी सवाल प्रोडक्ट की सेफ्टी से ज्यादा लेबलिंग और मार्केटिंग क्लेम का है।

PREV

अर्थव्यवस्था, बजट, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शेयर मार्केट अपडेट्स के लिए Business News in Hindi पढ़ें। निवेश सलाह, बैंकिंग अपडेट्स और गोल्ड-सिल्वर रेट्स समेत पर्सनल फाइनेंस की जानकारी Money News in Hindi सेक्शन में पाएं। वित्तीय दुनिया की स्पष्ट और उपयोगी जानकारी — Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

RBI Loan Recovery Rules: अब धमकाना-गाली देना पड़ेगा भारी, RBI ने लोन वसूली के लिए बनाया सख्त नियम
KCC Loan नहीं चुकाया तो क्या जमीन चली जाएगी? किसानों के लिए जानना जरूरी है ये नियम