N Chandrasekaran Tata Sons: एन चंद्रशेखरन 2032 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रहेंगे। टाटा ग्रुप में पहली बार रिटायरमेंट का नियम टूटा है। जानिए इनसाइड स्टोरी।
Tata Sons Chairman: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन अब 2032 तक अपने पद पर बने रहेंगे। गुरुवार को कंपनी बोर्ड ने उनके कार्यकाल को 5 साल का विस्तार दे दिया है। इसके साथ ही टाटा ग्रुप के 100 साल से ज्यादा पुराने इतिहास में पहली बार 65 साल में रिटायरमेंट का नियम टूटा है। आइए जानते हैं आखिर एन चंद्रशेखरन कौन हैं, टाटा ने उनके लिए रिटायरमेंट की उम्र वाली तय सिस्टम से अलग रास्ता क्यों अपनाया और उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप कितना बड़ा हुआ...
इंटर्नशिप से शुरुआत, फिर बने रतन टाटा के खास
तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मोहनूर में 2 जून 1963 को जन्मे नटराजन चंद्रशेखरन को प्यार से लोग 'चंद्रा' कहते हैं। एनआईटी तिरुचिरापल्ली (NIT Trichy) से एमसीए (MCA) की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे 1987 में टीसीएस (TCS) में महज एक इंटर्न के तौर पर जुड़े थे। अपनी मेहनत और समझ की बदौलत वे 2009 से 2017 तक टीसीएस के सीईओ और एमडी रहे और कंपनी को दुनिया की शीर्ष आईटी कंपनियों में ला खड़ा किया। उनके इसी विजन को देखकर रतन टाटा ने उन पर भरोसा जताया और जनवरी 2017 में उन्हें देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने यानी टाटा संस का चेयरमैन बना दिया।
टाटा ग्रुप में पहली बार टूटा 65 साल में रिटायरमेंट का नियम
टाटा ग्रुप की दशकों पुरानी पॉलिसी रही है कि कोई भी एग्जीक्यूटिव 65 साल की उम्र पूरी होने के बाद उस पद पर नहीं रह सकता है। नॉन-एग्जीक्यूटिव पद पर 70 साल तक रहा जा सकता है। चंद्रशेखरन अभी 63 साल के हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था। बोर्ड द्वारा 2032 तक कार्यकाल बढ़ाने के फैसले के बाद जब वे रिटायर होंगे, तब उनकी उम्र 70 साल होगी। ग्रुप के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी एग्जीक्यूटिव को 65 की उम्र पार करने के बाद भी चेयरमैन पद पर एक्सटेंशन दिया गया है।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में कैसे बदला रेवेन्यू और प्रॉफिट का रिकॉर्ड
चंद्रशेखरन की अगुआई में टाटा ग्रुप ने सिर्फ पुरानी कंपनियों को नहीं संभाला, बल्कि भविष्य के कारोबारों में आक्रामक निवेश किया। वित्त वर्ष 2020 में पूरे ग्रुप का रेवेन्यू ₹7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर ₹16.24 लाख करोड़ पहुंच गया। ग्रुप का कुल मुनाफा ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ हो गया। शेयर बाजार में लिस्टेड टाटा कंपनियों का मार्केट कैप ₹9.31 लाख करोड़ से उछलकर ₹24.39 लाख करोड़ के पार चला गया। उन्होंने ही एअर इंडिया की घर वापसी कराई, सेमीकंडक्टर प्लांट, ईवी बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और टाटा न्यू ऐप जैसे नए डिजिटल बिजनेसेज की मजबूत नींव रखी।
टाटा संस का आने वाला है सबसे बड़ा IPO
बोर्ड ने इस बैठक में एक और ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने का फैसला है। चूंकि चंद्रशेखरन की देखरेख में कई मेगा प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं और अब टाटा संस खुद शेयर मार्केट में उतरने की तैयारी में है, ऐसे में निवेशकों और कर्मचारियों के भरोसे को बनाए रखने के लिए उनका पद पर बने रहना बेहद जरूरी माना गया।
टाटा संस में कितनी कंपनियां?
- टाटा संस मुख्य होल्डिंग कंपनी है, जो टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाइटन जैसी 100 से ज्यादा कंपनियों में शेयर रखती है और बड़े फैसले लेती है।
- टाटा ट्रस्ट्स परोपकारी और चैरिटी ट्रस्टों का समूह है, जिसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
- टाटा ग्रुप, टाटा संस के तहत आने वाले तमाम छोटे-बड़े कारोबारों को एक साथ टाटा ग्रुप कहा जाता है।


