UPI यूजर्स के लिए बड़ा अपडेट! क्या अब UPI पेमेंट पर देना होगा चार्ज? सरकार ने पेश किया नया बिल-जानें पूरा सच

Published : Aug 05, 2026, 09:30 AM IST
upi mdr charges explained

सार

सरकार ने भविष्य में UPI पर चार्ज लगाने के लिए कानून बदला है। 2000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांजैक्शन पर बड़े व्यापारियों से 0.3% MDR लिया जा सकता है। आम ग्राहकों पर कोई असर नहीं होगा और UPI अभी भी फ्री है।

नई दिल्लीः देश में फ्री UPI पेमेंट सर्विस में एक बड़ा बदलाव होने की तैयारी है। केंद्र सरकार 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट' में एक संशोधन लेकर आई है। इस बदलाव के बाद भविष्य में कुछ UPI ट्रांजैक्शन्स पर 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) नाम का सर्विस चार्ज लगाया जा सकेगा। लेकिन सरकार ने साफ किया है कि अभी कोई नया चार्ज नहीं लगाया गया है और न ही तुरंत ऐसा करने का कोई प्लान है।

अभी चार्ज नहीं, सिर्फ कानून में बदलाव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में जो बिल पेश किया है, वो सिर्फ भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर MDR लगाने का एक कानूनी रास्ता तैयार करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार्ज कितना होगा और किन-किन ट्रांजैक्शन पर लगेगा, इस पर अभी कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है।

कितना चार्ज लगाने पर हो रहा विचार?

अभी जो प्रस्ताव चर्चा में है, उसके मुताबिक 2000 रुपये से ज़्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% तक MDR लगाने का आइडिया है। लेकिन ये चार्ज सिर्फ उन बड़े व्यापारियों से वसूला जाएगा, जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। इसका मतलब है कि आम ग्राहकों को कोई एक्स्ट्रा पैसा नहीं देना होगा और छोटे-मोटे दुकानदारों को भी इस चार्ज से बाहर रखा जाएगा।

आखिर ये मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) है क्या?

MDR वो सर्विस फीस है जो दुकानदार डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए बैंकों और पेमेंट सर्विस कंपनियों को देते हैं। क्रेडिट और डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर ऐसा चार्ज पहले से ही लगता है, लेकिन UPI अब तक पूरी तरह से फ्री था। इसी वजह से ये दुकानदारों और ग्राहकों के बीच इतना पॉपुलर हुआ।

सरकार ये नया नियम क्यों ला रही है?

पेमेंट इंडस्ट्री का कहना है कि UPI सर्विस से कोई कमाई न होने की वजह से डिजिटल पेमेंट कंपनियों की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। कंपनियों का तर्क है कि नई टेक्नोलॉजी में निवेश करने और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए ज़्यादा वैल्यू वाले ट्रांजैक्शन पर थोड़ा-बहुत सर्विस चार्ज लगाना ज़रूरी है।

अकेले जुलाई महीने में देश में 23.6 अरब UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत 29.9 ट्रिलियन रुपये थी। फिलहाल, कानून में ये बदलाव सिर्फ एक संभावना है। सरकार ने अभी ये तय नहीं किया है कि सर्विस चार्ज लगेगा भी या नहीं, और अगर लगेगा तो कब और कितना। इसलिए अभी के लिए UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह ही पूरी तरह फ्री रहेंगे।

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