
UPI MDR Rules Latest Updates: त्योहारी सीजन की खरीदारी शुरू होने से पहले देश के 50 करोड़ से ज्यादा यूपीआई यूजर्स और छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले महीने चर्चा थी कि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% चार्ज लगाया जाएगा। लेकिन अब रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले को कुछ महीनों के लिए टाला जा सकता है। अगर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इस पर मुहर लगाती है, तो ये नया नियम 15 अक्टूबर के बजाय अगले साल जनवरी से लागू हो सकता है। इसका मतलब साफ है कि दिवाली और छठ की बंपर शॉपिंग के दौरान डिजिटल पेमेंट बिल्कुल पहले की तरह बिना किसी अड़चन के चलता रहेगा।
अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश में दशहरा, धनतेरस, दिवाली और शादियों का सीजन रहता है। इस दौरान लोग जमकर खरीदारी करते हैं और कैश के बजाय ज्यादातर पेमेंट फोन पे, गूगल पे या पेटीएम जैसे यूपीआई ऐप्स से क्यूआर कोड स्कैन करके करते हैं। इस फैसले को आगे बढ़ाने की 3 बड़ी वजहें सामने आई हैं...
फेस्टिव शॉपिंग में रुकावट से बचने के लिए: त्योहारों के पीक सीजन में नया चार्ज लगाने से रिटेल बाजार और ऑनलाइन पेमेंट्स में भ्रम या तकनीकी दिक्कत पैदा हो सकती थी।
सिस्टम अपग्रेड के लिए वक्त: डिजिटल पेमेंट कंपनियों और बैंकों को अपना नया बिलिंग सिस्टम तैयार करने और सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने के लिए कुछ और हफ्तों का समय चाहिए।
व्यापारियों का विरोध: खुदरा व्यापारियों और रिटेलर्स ने इस प्रस्तावित 0.4% चार्ज का विरोध किया था, क्योंकि छह साल से ज्यादा समय से वे जीरो-कॉस्ट यूपीआई सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम ग्राहक को यूपीआई करने पर अपनी जेब से एक्स्ट्रा पैसे देने होंगे? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। ये चार्ज आम ग्राहकों के लिए नहीं, बल्कि दुकानदारों (मर्चेंट्स) पर लगने वाला इंटरचेंज चार्ज है। अगर आप किसी को पैसे भेजते हैं या दुकान पर सामान खरीदते हैं, तो आपके बैंक खाते से कोई अतिरिक्त 0.4% नहीं कटेगा। इसके अलावा, नियम टलने की खबरों का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। पेटीएम और वन मोबिक्विक जैसी फिनटेक कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक इस नए चार्ज से कंपनियों की कमाई बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
भारत में यूपीआई अब सिर्फ एक पेमेंट ऐप नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। एनपीसीआई के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अकेले अगस्त महीने में ही 24.51 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये थी। ऐसे में फेस्टिव सीजन में किसी भी नए नियम को बिना पूरी तैयारी के लागू करना बाजार की रफ्तार धीमी कर सकता था।
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