DeFI कैसे करती है काम? यह क्या है और कितनी सुरक्षित है, जाने इसकी पूरी डिटेल

Published : Aug 01, 2022, 06:15 PM IST
DeFI कैसे करती है काम? यह क्या है और कितनी सुरक्षित है, जाने इसकी पूरी डिटेल

सार

DeFI को डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस कहते हैं। इसमें यूजर कई सुविधा पा सकते हैं। यह पुरानी फाइनांस सुविधा का नया स्वरूप है। इसके इस्तेमाल में कैसी सावधानियां बरतनी चाहिए, हम आपको बता रहे हैं। 

बिजनेस डेस्कः DeFI एक डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस सुविधा है। यह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर बेस्ड होती है। इसमें यूजर्स को कई सुविधाएं मिलती है। इसमें क्रिप्टोकरेंसी में उधार लेने और उधार देने की सुविधा है। सदियों पुरानी सेंट्रलाइज्ड फाइनेंस सुविधा का एक नया ऑप्शन DeFI है। इसे बैंकिंग सिस्टम की तौर पर समझा जा सकता है। जो DeFI के बारे में नहीं जानते हैं उनके लिए, सेंट्रलाइज्ड फाइनेंस को बैंकिंग सिस्टम से समझा जा सकता है। बैंकिंग सिस्टम लोगों को अपनी ही संपत्ति पर स्वामित्व और नियंत्रण से प्रतिबंधित रखता है। लेकिन क्रिप्टो करेंसी पर डेफी आपको आपकी संपत्ति का पूरा हक देता है। मतलब बिना किसी लिमिट और बिना किसी दखल के आप पैसे निकालने, उधार लेने और पैसे जमा करने का काम कर सकते हैं। 

DeFi का क्या है महत्व

  • DeFi लेनेदेन के लिए किसी भी थर्ड पार्टी या फिर ब्रोकर पर भरोसा नहीं करती है। इसमें कोई सेंट्रलाइज्ड अथॉरिटी नहीं शामिल होता है। इसका पूरा लेनदेन एक अलग टेक्नोलॉजी के माध्यम से होता है। वह एल्गोरिदम बेस्ड ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी है। 
  • फंड्स को तुरंत ट्रांसफर किया जा सकता है। लेनदेन की दरें पुराने बैंकिंग सिस्टम की तुलना में कम होती हैं। यूजर्स की तरफ से DeFi पर किए जाने वाले सभी लेनदेन एक डेटाबेस में स्टोर होते हैं, जिसे हर कोई देख सकता है। इससे लेनदेन करने में ज्यादा पारदर्शिता रहती है। केंद्रीय वित्तीय एजेंसियां इसमें दखल नहीं देती है। 
  • DeFI लोगों के लेनदेन को सरेआम नहीं करती है। इसमें केवाईसी की जरूरत भी नहीं होती है। यूजर्स के प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखती है। एक क्रिप्टो वॉलेट से आप डेफी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने लग जाएंगे। 

कैसे होते हैं साइबर हमले

DeFi में हमेशा एक ओपन सोर्स कोड मौजूद रहता है। इसके प्रोटोकॉल हमेशा पढ़ सकते हैं। लेकिन इसमें बदलाव हो सकते हैं। लेकिन साइबर क्रिमिनल इसका फायदा उठा लेते हैं। कोड में खामियों का फायदा उठाकर फ्रॉड कर लेते हैं।  DeFI की सुरक्षा में हुई खामियों को नहीं जांचा जा सकता है। इससे हैकर्स आसानी से निशाना बना सकते हैं। 

दो तरह के होते हैं साइबर हमले 

  • वर्ष 2021 में 'Rug Pull' का मामला सामने आया था। इसमें 36 फीसदी लोगों को 2.8 बिलियन डॉलर (लगभग 280 करोड़ रुपये) से ज्यादा का घाटा हुआ था। Rug Pull एक मैलेशियल प्रैक्टिस है। इसमें क्रिप्टो डेवलपर्स एक प्रोजेक्ट को छोड़ देते हैं और इन्वेस्टर्स के फंड को लेकर भाग खड़े होते हैं।
  • हैकर्स ने DeFi प्रोटोकॉल में एक बग की पहचान कर ली है। जो सभी क्रिप्टो वॉलेस तक एक्सेस हासिल कर DeFi से पैसे उड़ा ले जाते हैं।
  • DeFi प्लेटफॉर्म पर बाहरी खतरों का रिस्क होता है। डेटा ब्रीच के कारण ऐसा होता है। 

DeFi की सुरक्षा कैसे होती है?

DeFi के इस्तेमाल से पहले जांच लें कि प्रोटोकॉल पूरी तरह से टेस्टेड है या नहीं। किसी फेमस ऑडिटेड एजेंसी की तफ से वह ऑडिट की गयी है या नहीं। अपना क्रिप्टो वॉलेट पासकोड किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। यूजर्स को हमेशा बड़े घाटे से बचने के लिए ऐसी जगह पैसा नहीं निवेश करना चाहिए, जो एक दिन में अचानाक बड़े रिटर्न देते हैं। ऐसी जगह निवेश के ज्यादा खतरे होते हैं। यूजर्स को संभावित हनीपोट्स से दूर रहने की सलाह दी जाती है। यूजर्स को किसी भी स्कैम एडवर्टाइज से दूर रहना चाहिए। यूजर्स को हमेशा अपनी तरह से जांच करनी चाहिए। जांचा परखा गया प्रोटोकॉल ही बेहतर होता है। हमेशा बेसिक सिक्योरिटी चेकिंग करनी चाहिए। 

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