WhatsApp भी अब फ्री नहीं? 1 अक्टूबर से इन मैसेजेस के लिए देने होंगे पैसे, जानें कितना लगेगा चार्ज

Published : Sep 30, 2026, 10:49 AM IST

WhatsApp Business Price Hike: वॉट्सऐप के जरिए ग्राहकों से बात करने वाली कंपनियों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से नियम बदलने जा रहा है। मेटा अब वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म पर भेजे जाने वाले कुछ मैसेज के लिए चार्ज लेगा। जानिए इसका असर आप पर पड़ेगा या नहीं?

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क्या आम यूजर्स की पर्सनल चैटिंग पर कटेगा पैसा?

नए नियम का असर आम आदमी यानी आपके पर्सनल चैट्स, फैमिली ग्रुप्स और वीडियो-ऑडियो कॉल्स पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। आम लोग हमेशा की तरह वॉट्सऐप बिल्कुल फ्री इस्तेमाल करते रहेंगे। ये नया बदलाव सिर्फ उन कंपनियों और कारोबारियों के लिए है जो ग्राहकों से जुड़ने के लिए वॉट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म (API) का इस्तेमाल करते हैं।

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वॉट्सऐप पर किन मैसेजेस के लिए देना पड़ेगा चार्ज?

अब तक नियम ये था कि जब कोई ग्राहक किसी कंपनी को मैसेज करता था, तो अगले 24 घंटे तक कंपनी की तरफ से जाने वाले सभी रिप्लाई मुफ्त होते थे। लेकिन 1 अक्टूबर से ये छूट खत्म हो रही है। अब डिलीवरी स्टेटस, बुकिंग कन्फर्मेशन या पार्सल ट्रैकिंग जैसे जरूरी मैसेज भेजने पर कंपनियों को प्रति मैसेज चार्ज देना होगा।

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वॉट्सऐप पर 1,000 फ्री मैसेज की नई लिमिट तय

मेटा ने अब कंपनियों के लिए सर्विस मैसेजेस पर मंथली कोटा लागू कर दिया है। हर रजिस्टर्ड बिजनेस नंबर को महीने में सिर्फ 1,000 सर्विस मैसेज ही मुफ्त मिलेंगे। जैसे ही ये कोटा पूरा होगा, कंपनी को हर नए रिप्लाई और सपोर्ट मैसेज के लिए भुगतान करना पड़ेगा।

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भारत में कितना लगेगा चार्ज?

भारत में यूटिलिटी मैसेज का रेट करीब 11.5 पैसे प्रति मैसेज तय की गई है, जिस पर जीएसटी अलग से लगेगा। अगर कोई कंपनी महीने में 10,000 ऐसे मैसेज भेजती है, तो उसे ₹1,150 प्लस टैक्स चुकाना पड़ेगा। लाखों ग्राहकों को रोजाना अपडेट भेजने वाले बड़े ब्रांड्स के लिए ये खर्च हर महीने लाखों रुपए तक पहुंच जाएगा।

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किन कंपनियों और सर्विसेज पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

इस फैसले का असर ई-कॉमर्स साइट्स, फूड डिलीवरी ऐप्स, बैंक, ट्रेवल बुकिंग पोर्टल्स और ऑनलाइन हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगी। ट्रेन टिकट का पीएनआर अपडेट, बैंक ट्रांजेक्शन अलर्ट या ऑनलाइन ऑर्डर की लोकेशन जैसी जरूरी सूचनाएं अब कंपनियों के लिए महंगी साबित होंगी।

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वॉट्सऐप आम यूजर्स की जेब पर क्या असर दिख सकता है?

कंपनियां इस बढ़ते खर्च से बचने के लिए दो रास्ते अपना सकती हैं। पहला, वे वॉट्सऐप पर आने वाले छोटे-मोटे गैर-जरूरी अपडेट्स बंद करके दोबारा नॉर्मल SMS का रुख कर सकती हैं। दूसरा, बड़े स्तर पर बढ़ी लागत की भरपाई के लिए कुछ प्लेटफॉर्म्स डिलीवरी फीस या सर्विस चार्ज में मामूली फेरबदल कर सकते हैं।

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