
Sugar Price and Fuel Connection: आप जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी या दशहरा-दिवाली के लिए घर में मिठाइयां बनाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ चीनी के दाम आसमान छू रहे हैं। पिछले कुछ समय में चीनी इतनी महंगी हो गई है कि आम आदमी की चाय का स्वाद फीका पड़ने लगा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में रखी चीनी के महंगे होने का सीधा कनेक्शन आपकी गाड़ी में डलने वाले पेट्रोल से है? सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह सच है। आइए जानते हैं कि आखिर चल क्या रहा है और सरकार इसे कंट्रोल करने के लिए क्या बड़े कदम उठा रही है...
भारत सरकार पिछले कुछ समय से पेट्रोल में एथेनॉल (Ethanol) मिलाने पर बहुत जोर दे रही है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने से बनता है। सरकार का टारगेट है कि पेट्रोल में ज्यादा से ज्यादा एथेनॉल मिलाया जाए ताकि हमें विदेशों से महंगा कच्चा तेल (Crude Oil) कम खरीदना पड़े। यहीं से शुरू हुई सारी समस्या। जब गन्ने का बहुत बड़ा हिस्सा चीनी बनाने की जगह पेट्रोल के लिए एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने लगा, तो बाजार में चीनी का प्रोडक्शन कम हो गया। सीधे शब्दों में कहें तो गाड़ी का फ्यूल सस्ता और इको-फ्रेंडली करने के चक्कर में रसोई की चीनी महंगी हो गई। इसके अलावा कम बारिश और गन्ने की फसल में बीमारियों ने भी चीनी की सप्लाई पर बुरा असर डाला है।
चीनी की रिटेल प्राइस
कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के डेटा के मुताबिक, जो चीनी पिछले साल अगस्त में लगभग 46 रुपए प्रति किलो मिल रही थी, वह अब बढ़कर 52 रुपए से ऊपर जा चुकी है। यानी करीब 13% का उछाल आया है।
चीनी की होलसेल प्राइस
मिलों से निकलने वाली चीनी का रेट भी 3,900 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 5,400-5,500 रुपए प्रति क्विंटल के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है। पंजाब, मुंबई और भोपाल जैसी जगहों पर तो रिटेल में चीनी 60 रुपए किलो के आसपास बिक रही है।
अक्टूबर से नया शुगर सीजन शुरू हो रहा है और सामने गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हैं। त्योहारों में बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक और मिठाई बनाने वाली कंपनियां बहुत ज्यादा चीनी खरीदती हैं। ऐसे में दाम और न बढ़ें, इसके लिए सरकार ने तुरंत एक्शन मोड में आते हुए दो बड़े फैसले लिए हैं...
1. 10 साल बाद ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट
सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) को टैक्स-फ्री (बिना किसी इम्पोर्ट ड्यूटी के) भारत में मंगाने की परमिशन दे दी है। पिछले एक दशक (10 साल) में ऐसा पहली बार हुआ है। मिलों और रिफाइनरियों से 21 अगस्त से 28 अगस्त के बीच इसके लिए एप्लीकेशन भी मांगे गए हैं। बाहर से चीनी आने पर बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें अपने आप नीचे आ सकती हैं।
2. होर्डिंग पर लगाम
कई बड़ी कंपनियां और डीलर सस्ते में चीनी खरीदकर उसे गोदामों में भर लेते हैं, ताकि त्योहारों में महंगे दाम पर बेच सकें। इस जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने नया रूल लागू कर दिया है। जो बड़ी कंपनियां (जैसे कोल्ड ड्रिंक, मिठाई या फूड प्रोसेसिंग वाले) महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी यूज करती हैं, वो अब सिर्फ 15 दिन का स्टॉक ही अपने पास रख सकती हैं। पहले यह लिमिट 30 दिनों की थी। यह नया नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।
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